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मंगलवार, 24 सितंबर 2013

हिंदी में वैश्विक भाषा बनने की क्षमता

भारतीय संस्कृति को अक्षुण्ण रखने में हिंदी का बहुत बड़ा योगदान है। जरूरत इस बात की है कि हम इसके प्रचार-प्रसार और विकास के क्रम में आयोजनों से परे अपनी दैनिक दिनचर्या से भी जोड़ें। हिन्दी-पखवाड़ा के अवसर पर पोस्टमास्टर जनरल, इलाहाबाद परिक्षेत्र कार्यालय में ’’बदलते परिवेश में हिन्दी की भूमिका’’ विषय पर 20 सितम्बर 2013 को  आयोजित संगोष्ठी में  इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं एवं चर्चित ब्लागर व साहित्यकार कृष्ण कुमार यादव  ने कहा कि हिंदी में वैश्विक भाषा बनने की पूरी क्षमता है और आज 150 से अधिक विश्वविद्यालयों में हिन्दी पढ़ाई जा रही है। विज्ञान-प्रौद्योगिकी से लेकर तमाम विषयों पर हिन्दी की किताबें अब उपलब्ध हैं, क्षेत्रीय अखबारों का प्रचलन बढ़ा है, इण्टरनेट पर हिन्दी की बेबसाइटों में बढ़ोत्तरी हो रही है, सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की कई कम्पनियों ने हिन्दी भाषा में परियोजनाएं आरम्भ की हैं । गूगल से हिन्दी में जानकारियाँ धड़ल्ले से खोजी जा रही हैं।

 श्री यादव ने कहा कि पहले जहाँ तमाम फाण्ट के चलते हिन्दी का स्वरूप एक जैसा नहीं दिखता था, वहीं वर्ष 2003 में यूनीकोड हिंदी में आया और इसके माध्यम से हिन्दी को अपने विस्तार में काफी सुलभता हासिल हुई। उन्होंने  कहा कि इंटरनेट के इस दौर में महत्वपूर्ण हिन्दी किताबों के ई प्रकाशन के साथ-साथ तमाम हिन्दी पत्र-पत्रिकाएं भी अपना ई-संस्करण जारी कर रही हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर  हिन्दी भाषा व साहित्य को नए आयाम मिले हैं। श्री यादव ने हिंदी-दिवस की आलोचना करने वालों को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि, जब लोग जन्मदिन मनाते हैं, नवरात्र मनाते हैं, अष्टमी-पूजन करते हैं तो फिर सवाल नहीं उठता। लेकिन जब  हिंदी को लेकर उत्सव मनते हों तो लोग कहते हैं यह खाना-पूर्ति है, इस सोच से बाहर निकलने की जरुरत है।

कार्यक्रम की  अध्यक्षता कर रहे प्रवर डाक अधीक्षक, इलाहाबाद मंडल श्री रहमतउल्लाह ने कहा कि हिंदी हमारी मातृ भाषा के साथ-साथ राजभाषा भी है और लोगों तक पहुँच स्थापित करने के लिए टेक्नॅालाजी स्तर पर इसका व्यापक प्रयोग करने की जरूरत है। 

कार्यक्रम के आरंभ में अपने सम्बोधन में सहायक निदेशक (हिंदी) टी. बी. सिंह ने इस बात पर प्रसन्नता जाहिर कि निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव स्वयं हिन्दी के सम्मानित लेखक और साहित्यकार हैं, ऐसे में डाक विभाग में राजभाषा हिन्दी के प्रति लोगों को प्रवृत्त करने में उनका पूरा मार्गदर्शन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि राजभाषा हिंदी अपनी मातृभाषा है, इसलिए इसका सम्मान करना चाहिए और बहुतायत में प्रयोग करना चाहिए। 

सहायक डाक अधीक्षक विनय कुमार ने कहा कि हिंदी को भाषा के साथ-साथ प्रयोजनीयता से भी जोड़ने की जरूरत है। डाक निरीक्षक ए. के. सिंह ने कहा कि, हिंदी साहित्य के साथ-साथ बोलचाल की भी भाषा है अतः इसे सरलीकरण रूप में आगे बढ़ाने की जरूरत है। 

इस अवसर पर डाक निरीक्षक दीपक कुमार, विनीत टन्डन, पंकज मौर्य, विक्रम सिंह, कु0 लक्ष्मी सहित तमाम कर्मचारियों ने अपने विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम में स्वागत भाषण सहायक निदेशक (राज भाषा) श्री टी बी सिंह आभार सहायक निदेशक तृतीय श्री तेज बहादुर सिंह व कार्यक्रम का संचालन श्री बृजेश कुमार शर्मा, निरीक्षक डाक द्वारा किया गया। 



इस अवसर पर निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने हिंदी पखवाड़े के दौरान आयोजित प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित भी किया। इनमें टंकण प्रतियोगिता में सर्वश्री विनीत टन्डन, राजेन्द्र प्रसाद, जगदीश कुशवाहा, निबन्ध प्रतियोगिता में अजय प्रकाश, स्वप्न कुमार, आर के श्रीवास्तव व हिंदी स्लोगन में जगदीश कुशवाहा, इजलेश कुमार, रामबहादुर ने क्रमशः प्रथम, द्वितीय व तृतीय पुरस्कार प्राप्त किया।

हिन्दी-पखवाड़ा के अवसर पर पोस्टमास्टर जनरल, इलाहाबाद परिक्षेत्र कार्यालय में ’’बदलते परिवेश में हिन्दी की भूमिका’’ विषय पर एक संगोष्ठी एवं विजेताओं को पुरस्कृत करने का कार्यक्रम 20 सितम्बर 13 को आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं एवं चर्चित ब्लागर व साहित्यकार कृष्ण कुमार यादव उपस्थित थे। कार्यक्रम के आंरभ में प्रवर डाक अधीक्षक, इलाहाबाद मंडल श्री रहमतउल्लाह ने श्री यादव का शाल ओढ़ाकर व स्मृति चिन्ह देकर स्वागत किया।

प्रस्तुति- तेजबहादुर सिंह, सहायक निदेशक (राजभाषा) कार्यालय-पोस्टमास्टर जनरल, इलाहाबाद परिक्षेत्र, इलाहाबाद.

(हिन्दुस्तान, 21 सितम्बर 2013 )

सोमवार, 23 सितंबर 2013

बेटियाँ सिर्फ बेटियाँ नहीं होतीं

कल डाटर्स-डे था। भला बेटियों को भी किसी दिन में बांधा जा सकता है। बेटियों का तो सारा जहां है, उनके बिना यह जग ही अधूरा है। तभी तो कहते हैं कि बेटे भाग्य से मिलते हैं और बेटियाँ सौभाग्य से। बेटियों को लेकर लिखी गई जीवन-संगिनी आकांक्षा जी की यह कविता  बहुत अपील करती है-


हमारी बेटियाँ 
घर को सहेजती-समेटती
एक-एक चीज का हिसाब रखतीं
मम्मी की दवा तो
पापा का आफिस
भैया का स्कूल
और न जाने क्या-क्या।

इन सबके बीच तलाशती
हैं अपना भी वजूद
बिखेरती हैं अपनी खुशबू
चहरदीवारियों से पार भी
पराये घर जाकर
बना लेती हैं उसे भी अपना
बिखेरती है खुशियाँ
किलकारियों की गूंज  की ।

हमारी  बेटियाँ 
सिर्फ बेटियाँ  नहीं होतीं
वो घर की लक्ष्मी
और आँगन की तुलसी हैं
मायके में आँचल का फूल
तो ससुराल में वटवृक्ष होती हैं 
हमारी बेटियाँ ।


रविवार, 22 सितंबर 2013

'हिंदी ब्लागिंग' और अंग्रेजी अख़बार

ब्लागिंग और सोशल नेटवर्किंग साइट्स ने हिंदी को खूब बढ़ावा दिया है। यद्यपि इसे कई बार देवनागरी लिपि की बजाय  रोमन लिपि में लिखने और भाषा की अशुद्धता को लेकर लम्बी बहसें भी हुई हैं, पर यह तो मानना ही पड़ेगा की इसके बहाने हिंदी का प्रयोग बढ़ा है। यही कारण है कि अब हिंदी को अंग्रेजी मीडिया भी इग्नोर नहीं कर पाता।अंग्रेजी अख़बारों में हिंदी के विज्ञापन धड़ल्ले से दिखने लगे हैं और कई बार हिंदी की बातें भी। हिंदी ब्लागिंग भी इससे अछूती नहीं है। अंग्रेजी अख़बार हिंदी ब्लागिंग से जुडी ख़बरों/रिपोर्ताज को भरपूर स्थान दे रहे हैं, आप भी देखिये-पढ़िए :




ALLAHABAD: Krishna Kumar Yadav and Akanksha Yadav, the blogger couple from city known for popularising the national language Hindi through New Media, were honoured at the International Bloggers Conference held in Kathmandu, Nepal.

While Krishna Kumar was awarded with Parikalpana Sahitya Samman, his wife Akanksha was felicitated with Parikalpana Blog Vibhushan. The awards were conferred upon the couple by former education and health minister of Nepal government and president of constituent assembly Arjun Narsingh Kesi. Akshitaa, a student of class 1 at Girls High School, Allahabad, also participated in this programme as the only young blogger.

Besides the Yadav couple, a number of bloggers in other languages like Nepali, Bhojpuri, Awadhi, Chattisgarhi, and Maithili from across the world were felicitated on the occasion. The programme was organized by Parikalpana Group at Sorahkhute Auditorium of Lekhnath Sahitya Sadan in Central Kathmandu from September 13-15.

During the session on New Media and its social concerns, Krishna Kumar Yadav elaborated on the role of New Media and its role in changing times, whereas Akanksha Yadav discussed the role of blogging in literature.



Hindustan Times (19 Sept. 2013) speaks : Postal Officer, wife get award for Hindi Blogging.

Northern India Patrika (19 Sept. 2013) says : Another feather in Blogger Couple's cap.




शुक्रवार, 20 सितंबर 2013

अख़बारों की सुर्खियाँ बना काठमांडू में हुआ अंतर्राष्ट्रीय ब्लागर सम्मेलन

नेपाल की राजधानी काठमांडू में हुए  'अंतर्राष्ट्रीय ब्लागर सम्मेलन' को प्रिंट-मीडिया ने भी हाथों-हाथ लिया। ब्लॉग को न्यू मीडिया के विकल्प रूप में नागरिक-पत्रकारिता का पर्याय माना जाता है, पर सच्चाई यही है कि कोई भी एक मीडिया अपने में अधूरा है। आपस में बिना सामंजस्य के मीडिया अग्रगामी नहीं हो सकता। यही कारण  है कि कभी अखबारी सुर्खियाँ फेसबुक और ब्लॉग पर छाती हैं तो कभी ब्लॉग जगत अख़बारों की सुर्खियाँ बनता है। 


'द पायनियर',19 सितम्बर 2013 में चर्चा :  इलाहाबाद के ब्लॉगर दम्पति का नेपाल में सम्मान। डाक निदेशक केके यादव एवं उनकी पत्नी आकांक्षा को स्वास्थ्य मंत्री ने किया सम्मानित। 


चर्चा में : ब्लॉगर दम्पति का नेपाल में सम्मान। काठमांडू में आयोजित ब्लॉगर  सम्मलेन  में कृष्ण कुमार यादव और आकांक्षा यादव सम्मानित। (साभार : अमर उजाला, इलाहाबाद, 19 सितम्बर 2013) 



'पंजाब केसरी',19 सितम्बर 2013 में चर्चा : केके और  उनकी पत्नी को मिला सम्मान।


'श्री टाइम्स',19 सितम्बर 2013 में चर्चा : प्रयाग के ब्लॉगर दम्पति डाक निदेशक को नेपाल में मिला सम्मान।


'हिन्दुस्तान',19 सितम्बर 2013 में चर्चा : कृष्ण कुमार यादव को मिला परिकल्पना साहित्य सम्मान।


'स्वतंत्र चेतना',19 सितम्बर 2013 में चर्चा :  डाक निदेशक केके यादव व आकांक्षा को नेपाल में मिला सम्मान


'अमर उजाला काम्पैक्ट',19 सितम्बर 2013 में चर्चा : डाक निदेशक केके यादव आकांक्षा सम्मानित ।


'दैनिक जागरण',19 सितम्बर 2013 में चर्चा : जिले के दम्पति को मिला ब्लॉग विभूषण सम्मान।


'अमर उजाला', जौनपुर 19 सितम्बर 2013 में चर्चा : डाक निदेशक को ब्लॉग विभूषण सम्मान।
प्रयाग में हुआ हिंदी ब्लागर्स का जमावड़ा : काठमांडू में अंतर्राष्ट्रीय ब्लागर सम्मेलन के बाद इलाहाबाद में भी हिंदी ब्लागर्स का जमावड़ा हुआ। दरअसल हुआ यूँ कि काठमांडू से लौटते हुए गिरीश पंकज जी, बी एस पाबला जी और ललित शर्मा जी हमारे मेहमान बनकर रुके और फिर उन्होंने महफूज अली को भी बुला लिया ....फिर क्या था, खबर तो बननी ही थी और बन भी गई। इसमें तमाम ब्लागर्स का जिक्र है। (जनसंदेश टाइम्स, 17 सितम्बर 2013 इलाहाबाद संस्करण के पेज संख्या 5 पर आप भी देख-पढ़ सकते हैं।)

गुरुवार, 19 सितंबर 2013

ब्लागर दंपति कृष्ण कुमार यादव व आकांक्षा नेपाल में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय ब्लागर सम्मेलन में सम्मानित

इंटरनेट पर हिंदी के व्यापक प्रचार-प्रसार और ब्लागिंग के माध्यम से देश-विदेश में अपनी रचनाधर्मिता को विस्तृत आयाम देने वाले ब्लागर दम्पति कृष्ण कुमार यादव और  आकांक्षा  यादव को काठमांडू, नेपाल में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय ब्लागर सम्मेलन में क्रमशः ''परिकल्पना साहित्य सम्मान'' एवं ''परिकल्पना ब्लाग विभूषण'' से नवाजा गया। नेपाल की विषम राजनीतिक परिस्थितियों के चलते मुख्य अतिथि नेपाल के राष्ट्रपति डा0 राम बरन यादव की अनुपस्थिति में यह सम्मान नेपाल सरकार के पूर्व शिक्षा व स्वास्थ्य मंत्री तथा संविधान सभा के अध्यक्ष अर्जुन नरसिंह केसी ने दिया। इस सम्मेलन में एकमात्र बाल ब्लागर के रूप में गल्र्स हाई स्कूल, इलाहाबाद की कक्षा 1 की छात्रा अक्षिता ने भी भाग लिया। 

इस अवसर पर यादव दम्पति सहित देश-विदेश के हिंदी, नेपाली, भोजपुरी, अवधी, छत्तीसगढ़ी, मैथिली आदि भाषाओं के ब्लागर्स को भी सम्मानित किया गया। परिकल्पना समूह द्वारा आयोजित यह समारोह 13-15 सितम्बर के मध्य काठमांडू के लेखनाथ साहित्य सदन, सोरहखुटे सभागार में हुआ।

इस अवसर पर ’’न्यू मीडिया के सामाजिक सरोकार’’ सत्र में वक्ता के रूप में कृष्ण कुमार यादव ने बदलते दौर में न्यू मीडिया व ब्लागिंग व इसके सामाजिक प्रभावों पर विस्तृत चर्चा की, वहीं ’’साहित्य में ब्लागिंग की भूमिका’’ पर हुयी चर्चा को सारांशक रूप में आकांक्षा यादव ने मूर्त रूप दिया।

गौरतलब है कि इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं पद पर पदस्थ कृष्ण कुमार यादव एवं उनकी पत्नी आकांक्षा यादव एक लंबे समय से ब्लाग और न्यू मीडिया के माध्यम से हिंदी साहित्य एवं विविध विधाओं में अपनी रचनाधर्मिता को प्रस्फुटित करते हुये अपनी व्यापक पहचान बना चुके हैं।

(साभार प्रकाशित)

मंगलवार, 17 सितंबर 2013

सुनहरी यादें छोड़ गया काठमांडू में हुआ अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मलेन...


(सम्मान : अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर  सम्मलेन, काठमांडू-नेपाल में  कृष्ण कुमार यादव, निदेशक डाक सेवाएँ, इलाहाबाद परिक्षेत्र, नेपाल सरकार के पूर्व मंत्री तथा संविधान सभा के अध्यक्ष अर्जुन नरसिंह केसी जी, ब्लागर्स सम्मलेन संयोजक रवीन्द्र प्रभात और  कुमुद अधिकारी,वरिष्ठ नेपाली साहित्यकार।)


(अंतर्राष्ट्रीय ब्लागर सम्मेलन, काठमांडू (13 सितम्बर, 2013 ) में कृष्ण कुमार यादव को ''परिकल्पना साहित्य सम्मान'' से विभूषित करते नेपाल सरकार के पूर्व मंत्री तथा संविधान सभा के अध्यक्ष अर्जुन नरसिंह केसी। साथ में परिकल्पना के संयोजक रवीन्द्र प्रभात.)


(सम्मान : अंतर्राष्ट्रीय ब्लागर सम्मेलन, काठमांडू (13 सितम्बर, 2013 ) में आकांक्षा यादव को ''परिकल्पना ब्लॉग विभूषण'' से सम्मानित  करते नेपाल सरकार के पूर्व मंत्री तथा संविधान सभा के अध्यक्ष अर्जुन नरसिंह केसी जी। साथ में परिलक्षित हैं- कृष्ण कुमार यादव, बेटियाँ अक्षिता व अपूर्वा, परिकल्पना के संयोजक रवीन्द्र प्रभात  और वरिष्ठ नेपाली साहित्यकार कुमुद अधिकारी।)


(मुलाकात : नेपाल सरकार के पूर्व मंत्री तथा संविधान सभा के अध्यक्ष अर्जुन नरसिंह केसी जी के साथ कृष्ण कुमार यादव।)


(स्वागत : ब्लागर राजीवशंकर मिश्रा बनारस वाले द्वारा बैज लगाकर स्वागत।)


(लोकार्पण : अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर  सम्मलेन, काठमांडू-नेपाल में 'परिकल्पना समय' पत्रिका का लोकार्पण करते कृष्ण कुमार यादव, निदेशक डाक सेवाएँ, इलाहाबाद परिक्षेत्र, नेपाल सरकार के पूर्व मंत्री तथा संविधान सभा के अध्यक्ष अर्जुन नरसिंह केसी जी,  रवीन्द्र प्रभात, ब्लागर्स सम्मलेन संयोजक, माला चौबे, कार्यकारी संपादक- परिकल्पना समय, नमिता राकेश एवं डा. रमा दिवेद्धी, सम्पादक-'पुष्पक' पत्रिका।)


(लोकार्पण : अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर  सम्मलेन, काठमांडू-नेपाल में  ''धरती पकड़ निर्दलीय'' (व्यंग्य संग्रह, रवीन्द्र प्रभात, हिन्द युग्म प्रकाशन-नई दिल्ली)  का लोकार्पण करते मनोज पाण्डेय, कृष्ण कुमार यादव, निदेशक डाक सेवाएँ, इलाहाबाद परिक्षेत्र, नेपाल सरकार के पूर्व मंत्री तथा संविधान सभा के अध्यक्ष अर्जुन नरसिंह केसी जी, कुमुद अधिकारी,वरिष्ठ नेपाली साहित्यकार, रवीन्द्र प्रभात, ब्लागर्स सम्मलेन संयोजक, माला चौबे, कार्यकारी संपादक- परिकल्पना समय।)


(लोकार्पण : अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर  सम्मलेन, काठमांडू-नेपाल में  'सांसों की सरगम' (हाइकु संग्रह, डा. रमा दिवेद्धी।  हिन्द युग्म प्रकाशन-नई दिल्ली)  का लोकार्पण करते कृष्ण कुमार यादव, निदेशक डाक सेवाएँ, इलाहाबाद परिक्षेत्र, नेपाल सरकार के पूर्व मंत्री तथा संविधान सभा के अध्यक्ष अर्जुन  नरसिंह केसी जी, कुमुद अधिकारी,वरिष्ठ नेपाली साहित्यकार, डा. रमा दिवेद्धी, शैलेश भारतवासी, सम्पादक-हिन्द युग्म,  नमिता राकेश और रवीन्द्र प्रभात, ब्लागर्स सम्मलेन संयोजक।)


(लोकार्पण : अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर  सम्मलेन, काठमांडू-नेपाल में  'यात्रा-क्रम' ( संपत देवी मुरारका,ज्ञान भारती प्रकाशन-नई दिल्ली)  का लोकार्पण करते कृष्ण कुमार यादव, निदेशक डाक सेवाएँ, इलाहाबाद परिक्षेत्र, नेपाल सरकार के पूर्व मंत्री तथा संविधान सभा के अध्यक्ष अर्जुन नरसिंह केसी जी, कुमुद अधिकारी,वरिष्ठ नेपाली साहित्यकार, संपत देवी मुरारका, डा. रमा दिवेद्धी,  नमिता राकेश और रवीन्द्र प्रभात, ब्लागर्स सम्मलेन संयोजक।)

(तृतीय अंतर्राष्ट्रीय ब्लोगर सम्मलेन, काठमांडू :  मंच का एक दृश्य )


(संबोधन : अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर  सम्मलेन, काठमांडू-नेपाल में कृष्ण कुमार यादव का संबोधन।)


(ग्रुप फोटोग्राफ : तृतीय अंतर्राष्ट्रीय ब्लोगर सम्मलेन, काठमांडू)


(नन्ही ब्लागर का प्रतिनिधित्व : बिटिया अक्षिता (पाखी) के साथ ब्लागर्स।)



(नन्ही ब्लागर अक्षिता (पाखी) को पुष्प-गुच्छ देकर सम्मानित करते  अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर  सम्मलेन, काठमांडू-नेपाल के संयोजक रवीन्द्र प्रभात जी के सुपुत्र।)


(फुर्सत के पल : बिटिया अक्षिता (पाखी) के साथ नेपाल सरकार के पूर्व मंत्री तथा संविधान सभा के अध्यक्ष अर्जुन नरसिंह केसी जी।)


( अलविदा की बेला)

बुधवार, 11 सितंबर 2013

लघु कथा: हिन्दी सप्ताह / कृष्ण कुमार यादव

हिन्दी सप्ताह का आगमन होते ही सरकारी कार्यालय में दिशा-निर्देश जारी होने लगे। पुराने बैनर और नेम प्लेटों को धो-पोंछकर  चमकाया जाने लगा, बस साल बदल जाना था। फिर तलाश आरम्भ हुई एक अदद अतिथि की, जो कि एक बाबू के पड़ोस में मिल गए। समारोह में आते ही फूल-मालाओं व उपहारों के बीच उन्होंने हिन्दी के राजभाषा बनने से लेकर अपने योगदान तक की चर्चा कर डाली। 

हिन्दी सप्ताह खत्म होते ही बाबू ने कुल खर्च की फाइल अधिकारी महोदय के सामने रखी। अधिकारी महोदय ने रोमन में लिख दिया- सेंक्सन्ड। 

बाबू ने धीमे से टोका-‘स......ऽ.....र‘

 तो अधिकारी महोदय ने नजरें तरेरते हुए कहा- ‘‘क्या तुम्हें यह भी बताना पड़ेगा कि हिन्दी सप्ताह बीत चुका है।’’

रविवार, 1 सितंबर 2013

देश के युवाओं को श्रीकृष्ण के विराट चरित्र से सीखने की जरूरत - कृष्ण कुमार यादव




अखिल भारतीय श्री कृष्ण चेतना संस्थान के तत्वाधान में 1 सितम्बर, 2013 को श्री कृष्ण जन्मोत्सव का आयोजन इलाहाबाद में किया गया। इस अवसर पर जहाँ भगवान श्री कृष्ण के विचारों को पुनः रेखांकित किया गया, वहीँ श्रीकृष्ण के जीवन पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं संगोष्ठी का भी आयोजन किया गया। 


कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ एवं चर्चित साहित्यकार कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि श्रीकृष्ण साधारण व्यक्ति न होकर युग पुरुष थे। उनके व्यक्तित्व में भारत को एक प्रतिभासम्पन्न राजनीतिवेत्ता ही नहीं, एक महान कर्मयोगी और दार्शनिक प्राप्त हुआ, जिसका गीता-ज्ञान समस्त मानव-जाति एवं सभी देश-काल के लिए पथ-प्रदर्शक है। डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने इस बात पर जोर दिया कि आज देश के युवाओं को श्रीकृष्ण के विराट चरित्र के बृहद अध्ययन की जरूरत है। राजनेताओं को उनकी विलक्षण राजनीति समझने की दरकार है और धर्म के प्रणेताओं, उपदेशकोंको यह समझने की आवश्यकता है कि श्रीकृष्ण ने जीवन से भागने या पलायन करने या निषेध का संदेश कभी नहीं दिया। श्री यादव ने कहा कि श्रीकृष्ण ने कभी कोई निषेध नहीं किया। उन्होंने पूरे जीवन को समग्रता के साथ स्वीकारा है। 


कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में इलाहाबाद के पूर्व जिलाधिकारी श्री महावीर यादव ने कहा कि हमारे अध्यात्म के विराट आकाश में श्रीकृष्ण ही अकेले ऐसे व्यक्ति हैं जो धर्म की परम गहराइयों व ऊंचाइयों पर जाकर भी गंभीर या उदास नहीं हैं। इलाहाबाद विश्विद्यालय के प्रो. उमाकांत यादव ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण की स्तुति लगभग सारे भारत में किसी न किसी रूप में की जाती है। यहाँ तक कि वे लोग जिन्हें हम साधारण रूप में नास्तिक या धर्म निरपेक्ष की श्रेणी में रखते हैं, वे भी निश्चित रूप से भगवतगीता से प्रभावित हैं। जिला सूचना अधिकारी जे. एस. यादव ने श्री कृष्ण के विचारों को सदैव प्रासंगिक बताया। संस्थान के 
अध्यक्ष इं. राम किशोर यादव ने सभी का स्वागत करते हुए भगवान श्री कृष्ण के जीवन से प्रेरणा लेने की बात कही। संस्थान के महामंत्री जगदम्बा सिंह यादव ने सभी का आभार ज्ञापन किया।


कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित भी किया। 


जगदम्बा सिंह यादव 

महामंत्री - अखिल भारतीय श्री कृष्ण चेतना संस्थान, इलाहाबाद 

शनिवार, 24 अगस्त 2013

काठमांडू में 'परिकल्पना साहित्य सम्मान' और 'ब्लॉग विभूषण' सम्मान

कुछ माह पहले लुम्बिनी गया था तो सोचा था कि जल्द ही काठमांडू भी जाऊंगा। लीजिए, ऊपर वाले ने सुन ली। हिंदी ब्लॉगिंग के माध्यम से समाज और साहित्य के बीच सेतु निर्माण के निमित्त हमारी जीवन संगिनी आकांक्षा जी को ''परिकल्पना ब्लॉग विभूषण सम्मान'' और हमें ( कृष्ण कुमार यादव) ''परिकल्पना साहित्य सम्मान'' के लिए चुना गया है। यह सम्मान 13-14 सितंबर 2013 को काठमाण्डू में आयोजित "अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन" में प्रदान किया जायेगा। इन सम्मान के अंतर्गत स्मृति चिन्ह, सम्मान पत्र, श्री फल, पुस्तकें अंगवस्त्र और एक निश्चित धनराशि प्रदान किए जाएंगे। इस समारोह में अन्य ब्लागर्स और साहित्यकारों को भी सम्मानित किया जाएगा .....इस चयन के लिए रवीन्द्र प्रभात जी और उनकी पूरी टीम का बहुत-बहुत आभार !!

इस सम्मान को विभिन्न प्रतिष्ठित अख़बारों ने भी भरपूर कवरेज दिया, उन सभी का आभार। आप भी इन्हें पढ़ सकते हैं !!


Rising Blogger Couple : i-next (24 Aug. 2013) में ब्लागिंग हेतु काठमांडू में सम्मान की चर्चा।


'दैनिक जागरण' (24 अगस्त, 2013 ) में ब्लागिंग हेतु ब्लागर्स कांफ्रेंस, काठमांडू में सम्मान की चर्चा : डाक निदेशक और उनकी पत्नी होंगी सम्मानित। 


'हिन्दुस्तान' (24 अगस्त, 2013) में ब्लागिंग हेतु सम्मान की चर्चा :: केके यादव व आकांक्षा को काठमांडू में मिलेगा सम्मान।

'अमर उजाला' (24 अगस्त, 2013 )  में ब्लागिंग हेतु ब्लागर्स कांफ्रेंस, काठमांडू में सम्मान की चर्चा : केके यादव और आकांक्षा यादव को सम्मान.


Hindustan Times (24 August, 2013) : Blogger couple set to receive international award. 


 Times of India (25 August, 2013) : Postal Official, wife to get award for Hindi blogging)


पंजाब केसरी (26 अगस्त, 2013 ) : के.के. यादव और उनकी पत्नी को मिलेगा सम्मान. 

बुधवार, 14 अगस्त 2013

स्वतंत्रता की गाथा सिर्फ अतीत भर नहीं है...


कल देश अपनी आजादी की एक और सालगिरह मनाएगा। स्वतंत्रता को आज व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखने की जरुरत है। स्वतंत्रता माने सिर्फ राजनैतिक स्वतंत्रता नहीं, बल्कि यह सामाजिक, आर्थिक, वैचारिक, आध्यात्मिक,पारिवारिक और अन्तत: वैयक्तिक स्वतंत्रता भी है, जहाँ हर स्तर पर निर्णय-प्रक्रिया में हम भागीदार हो सकें और सकारात्मक रूप में देश और समाज के लिए कुछ कर सकें। स्वतंत्रता अपने आप में संपूर्ण है। इसका शाब्दिक विश्लेषण करें तो यह स्व का तंत्र है, अर्थात स्वयं को पा लेना. इस स्वतंत्रता दिवस पर आत्म विश्लेषण करके देखने की जरुरत है कि क्या हम अपनी चेतना को पूर्ण रूप में पा चुके हैं और सच्चे अर्थों में वाकई स्वतंत्र हैं.

स्वतंत्रता की गाथा सिर्फ अतीत भर नहीं है बल्कि आगामी पीढ़ियों हेतु यह कई सवाल भी छोड़ती है। वस्तुतः भारत का स्वाधीनता संग्राम एक ऐसा आन्दोलन था, जो अपने आप में एक महाकाव्य है। लगभग एक शताब्दी तक चले इस आन्दोलन ने भारतीय राष्ट्रीयता की अवधारणा से संगठित हुए लोगों को एकजुट किया। यह आन्दोलन किसी एक धारा का पर्याय नहीं था, बल्कि इसमें सामाजिक-धार्मिक सुधारक, राष्ट्रवादी साहित्यकार, पत्रकार, क्रान्तिकारी, कांग्रेसी, गाँधीवादी इत्यादि सभी किसी न किसी रूप में सक्रिय थे।

1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम को अंग्रेज इतिहासकारों ने ‘सिपाही विद्रोह‘ मात्र की संज्ञा देकर यह सिद्ध करने का प्रयास किया कि यह विद्रोह मात्र सरकार व सिपाहियों के बीच का अल्पकालीन संघर्ष था, न कि सरकार व जनता के बीच का संघर्ष। वस्तुतः इस प्रचार द्वारा उन्होंने भारत के कोने-कोने में पनप रही राष्ट्रीयता की भावना को दबाने का पूरा प्रयास किया। पर इसमें वे पूर्णतया कामयाब नहीं हुये और इस क्रान्ति की ज्वाला अनेक क्षेत्रों में एक साथ उठी, जिसने इसे अखिल भारतीय स्वरूप दे दिया। इस संग्राम का मूल रणक्षेत्र भले ही नर्मदा और गंगा के बीच का क्षेत्र रहा हो, पर इसकी गूँज दूर-दूर तक दक्षिण मराठा प्रदेश, दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों, गुजरात और राजस्थान के इलाकों और यहाँ तक कि पूर्वोत्तर भारत के खासी-जंैतिया और कछार तक में सुनाई दी। परिणामस्वरूप, भारतीय स्वाधीनता आन्दोलन का यह प्रथम प्रयास पे्ररणास्रोत बन गया और ठीक 90 साल बाद भारत ने स्वाधीनता के कदम चूमकर एक नये इतिहास का आगाज किया।

भारतीय राष्ट्रीय स्वाधीनता आन्दोलन का सर्वाधिक महत्वपूर्ण पक्ष यह रहा कि आजादी के दीवानों का लक्ष्य सिर्फ अंग्रजों की पराधीनता से मुक्ति पाना नहीं था, बल्कि वे आजादी को समग्र रूप में देखने के कायल थे। भारतीय पुनर्जागरण के जनक कहे जाने वाले राजाराममोहन राय से लेकर भगतसिंह जैसे क्रान्तिकारी और महात्मा गाँधी तक ने एक आदर्श को मूर्तरूप देने का प्रयास किया। राजाराममोहन राय ने सती प्रथा को खत्म करवाकर नारी मुक्ति की दिशा में पहला कदम रखा, ज्योतिबाफुले व ईश्वरचन्द्र विद्यासागर ने शैक्षणिक सुधार की दिशा में कदम उठाए, स्वामी विवेकानन्द व दयानन्द सरस्वती ने आध्यात्मिक चेतना का जागरण किया, दादाभाई नौरोजी ने गरीबी मिटाने व धन-निकासी की अंग्रेजी अवधारणाओं को सामने रखा, लाल-बाल-पाल ने राजनैतिक चेतना जगाकर आजादी को अधिकार रूप में हासिल करने की बात कही, वीर सावरकर ने 1857 की क्रान्ति को प्रथम स्वाधीनता संग्राम के रूप में चिन्हित कर इसकी तुलना इटली में मैजिनी और गैरिबाल्डी के मुक्ति आन्दोलनों से व्यापक परिप्रेक्ष्य में की, भगत सिंह ने क्रान्ति को जनता के हित में स्वराज कहा और बताया कि इसका तात्पर्य केवल मालिकों की तब्दीली नहीं बल्कि नई व्यवस्था का जन्म है, महात्मा गाँधी ने सत्याग्रह व अहिंसा द्वारा समग्र भारतीय समाज को जनान्दोलनों के माध्यम से एक सूत्र में जोड़कर अद्वैत का विश्व रूप दर्शन खड़ा किया, पं0 नेहरू ने वैज्ञानिक समाजवाद द्वारा विचारधाराओं में सन्तुलन साधने का प्रयास किया, डा0 अम्बेडकर ने स्वाधीनता को समाज में व्याप्त विषमता को खत्म कर दलितों के उद्धार से जोड़ा....। इस आन्दोलन में जहाँ हिन्दू-मुसलमान एकजुट होकर लड़े, दलितों-आदिवासियों-किसानों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। तमाम नारियों ने समाज की परवाह न करते हुये परदे की ओट से बाहर आकर इस आन्दोलन में भागीदारी की।

स्वाधीनता का आन्दोलन सिर्फ इतिहास के लिखित पन्नों पर नहीं है, बल्कि लोक स्मृतियों में भी पूरे ठाठ-बाट के साथ जीवित है। तमाम साहित्यकारों व लोक गायकों ने जिस प्रकार से इस लोक स्मृति को जीवंत रखा है, उसकी उपेक्षा नहीं की जा सकती। वैसे भी पिस्तौल और बम इन्कलाब नहीं लाते बल्कि इन्कलाब की तलवार विचारों की सान पर तेज होती है (भगत सिंह)। यह अनायास ही नहीं है कि अधिकतर नेतृत्वकर्ता और क्रान्तिकारी अच्छे विचारक, कवि, लेखक या साहित्यकार थे। तमाम रचनाधर्मियों ने इस ‘क्रान्ति यज्ञ’ में प्रेरक शक्ति का कार्य किया और स्वाधीनता आन्दोलन को एक नयी परिभाषा दी।

वर्तमान परिप्रेक्ष्य में इस बात की आवश्यकता है कि राष्ट्रीय स्वाधीनता आन्दोलन के तमाम छुये-अनछुये पहलुओं को व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखा जाये और औपनिवेशिक पूर्वाग्रहों को खत्म किया जाये। इतिहास के पन्नों में स्वाधीनता आन्दोलन के साक्षात्कार और इसके गहन विश्लेषण के बीच आत्मगौरव के साथ-साथ उससे जुड़े सबकों को भी याद रखना जरूरी है। राजनैतिक स्वतन्त्रता से परे सामाजिक और आर्थिक स्वतंत्रता भी सच्चे अर्थों में हमारा ध्येय होना चाहिए। इसी क्रम में युवा पीढ़ी को राष्ट्रीय स्वाधीनता आन्दोलन के इतिहास से रूबरू कराना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए, पर उससे पहले इतिहास को पाठ्यपुस्तकों से निकालकर लोकाचार से जोड़ना होगा।

(चित्र में : बेटी अपूर्वा और अक्षिता (पाखी) तिरंगे के साथ, जिसे उन्होंने मिलकर बनाया और कलर किया है)

स्वतंत्रता दिवस की आप सभी को शुभकामनायें !!

सोमवार, 12 अगस्त 2013

Glimpses of the '9th All India Laxmi salon of Photography-2013' at Allahabad

The '9th All India Laxmi salon of Photography-2013' was inaugurated at the Nirala Art Gallery of Allahabad University, on Monday, 12th august 2013. Mr. Krishna Kumar Yadav, Director Postal Services, Allahabad Region, inaugurated the two days photo exhibition at 1 pm. The winning entries of the 9th All India Photo Salon hosted by the social organisation Sri Ganga Kalyan Sewa Samiti, were exhibited in the photo-exhibition. The inaugural function was presided by Dr Ajay Jaitley, Head of the Visual Arts department of Allahabad University and District magistrate, Allahabad Mr. Rajshekhargrace the fuction as Guest of honour. The photo competition was participated by over a hundred photographers from all parts of the country, in monochrome, colour, nature, photo journalism and travel categories, informed Jitendra Prakash, secretary of the organisation.


      (Krishna Kumar Yadav, Director Postal Services, Allahabad Region Inaugurating '9th All India Laxmi salon of Photography -2013' by Ribbon-Cut, at Nirala Art Gallery, University of Allahabad on 12th August 2013.)


(Krishna Kumar Yadav, Director Postal Services, Allahabad Region Inaugurating '9th All India Laxmi salon of Photography -2013' by lighting-lamp, at Nirala Art Gallery, University of Allahabad on 12th August 2013.)


(A view of Photographs exhibited at '9th All India Laxmi salon of Photography-2013' at Nirala Art Gallery, University of Allahabad on 12th August 2013.


(A view of Photographs exhibited by Krishna Kumar Yadav, Director Postal Services, Allahabad Region along with Jitendra Prakash, Secretary, Shri Ganga kalyan Sewa samiti after Inaugurating of '9th All India Laxmi salon of Photography-2013' at Nirala Art Gallery, University of Allahabad on 12th August 2013.)

(Mr. Krishna Kumar yadav, Director Postal Services, Allahabad Region and Mr. Rajshekhar, District Magistrate, Allahabad on dais during '9th All India Laxmi salon of Photography-2013' at Nirala Art Gallery, University of Allahabad on 12th August 2013.)


(Mr. Krishna Kumar Yadav, Director Postal Services, Allahabad Region, Mr. Rajshekhar, District Magistrate, Allahabad, Dr. Ajay Jaitly, Head of the Visual Arts department of Allahabad University on the dais during '9th All India Laxmi salon of Photography-2013' at Nirala Art Gallery, University of Allahabad on 12th August 2013.)


(Address by Mr. Krishna Kumar Yadav, Director Postal Services, Allahabad Region at '9th All India Laxmi salon of Photography -2013' at Nirala Art Gallery, University of Allahabad on 12th August 2013.) 


(Mr. Krishna Kumar yadav, Director Postal Services, Allahabad Region, Mr. Rajshekhar, District Magistrate, Allahabad, Dr Ajay Jaitley, Head of the Visual Arts department of Allahabad University and others during '9th All India Laxmi salon of Photography-2013' at Nirala Art Gallery, University of Allahabad on 12th August 2013.)

श्री गंगा कल्याण समिति की ओर से दो दिवसीय नौवीं अखिल भारतीय लक्ष्मी छायाचित्र प्रदर्शनी इलाहाबाद विश्वविद्यालय के निराला आर्ट गैलरी में 12 अगस्त को शुरू हुई। प्रदर्शनी का उद्घाटन मुख्य अतिथि के रूप में इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवायें, कृष्ण कुमार यादव ने दीप प्रज्जवलित कर किया। उन्होंने प्रदर्शनी का अवलोकन करने के बाद कहा कि इस तरह की छायाचित्र प्रदर्शनी का आयोजन नियमित रूप से होना चाहिए। इससे युवा पीढ़ी को प्रेरणा मिलती है। डाक निदेशक श्री यादव ने कहा कि फोटोग्राफी एक विधा के साथ-साथ हमारे समाज और परिवेश का प्रतिबिंब भी है। मात्र आड़ी तिरछी लाइनें खींचनी ही फोटोग्राफी नहीं हैं बल्कि उसका यथार्थ भी निकलना चाहिए।

विशिष्ट अतिथि जिलाधिकारी राजशेखर ने फोटो प्रदर्शनी की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसी छायाचित्र प्रदर्शनी का आयोजन होना चाहिए जिससे कि कुछ नयापन लोगों को देखने को मिले। उन्होंने कहा कि छायाचित्र अपनी संस्कृति की पहचान को बढ़ावा देते हैं।  इससे अधिक से अधिक लोगों को जुड़ना चाहिए।

अध्यक्षता करते हुए इलाहाबाद विश्वविद्यालय के दृश्य कला विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो0 अजय जेतली ने कहा कि इलाहाबाद शुरू से ही साहित्यकारों, कलाकारो का कर्मक्षेत्र रहा है। इस शहर से सभी क्षेत्रों में लोगांे में पहचान भी बनायी है।

छायाचित्र प्रदर्शनी के सचिव जितेन्द्र प्रकाश ने प्रदर्शनी पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि अगले वर्ष से अंतर्राष्ट्रीय स्तर के छायाकारों के भी छायाचित्र प्रदर्शनी में देखने को मिलेगा। उन्होंने बताया कि इस बार छायाचित्र प्रदर्शनी में 119 फोटोग्राफरों की 1160 तस्वीरें आयी थीं। श्रीमती लक्ष्मी अवस्थी ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम में वीरेन्द्र पाठक, एस के यादव, राजेश सिंह, पवन द्विवेदी, संजोग मिश्रा, विरेन्द्र प्रकाश, केनिथ जान, अनुराग अस्थाना, अमरदीप, रजत शर्मा, संजीव बनर्जी, संजय सक्सेना सहित बड़ी संख्या में छायाकार और अन्य लोग मौजूद रहे। संचालन वरिष्ठ पत्रकार अभिलाष नारायण ने किया।