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गुरुवार, 12 सितंबर 2019

हिंदी को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में लखनऊ की संस्था परिकल्पना का अहम स्थान-डाक निदेशक केके यादव

हिंदी को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में लखनऊ की संस्था परिकल्पना का अहम स्थान है।  विश्व के 11 देशों में  ‘‘ब्लॉगोत्सव‘‘ और ‘‘अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी उत्सव‘‘ का आयोजन कर चुकी यह संस्था हिन्दी भाषा को अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप देने की दिशा में बड़ा काम कर रही है। उक्त उद्गार चर्चित ब्लॉगर व साहित्यकार एवं लखनऊ मुख्यालय परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव ने परिकल्पना संस्था के 13 वें वार्षिक महासभा में बतौर मुख्य अतिथि व्यक्त किये।  
इस अवसर पर परिकल्पना की अध्यक्ष माला चौबे और महासचिव डॉ. रवींद्र प्रभात के तत्वाधान में  देश के विभिन्न हिस्सों से पधारे ब्लॉगर्स, साहित्यकार और बुद्धिजीवियों को सम्मानित भी किया गया। परिकल्पना की नयी कार्यकारिणी के गठन के साथ  नए उत्तरदायित्व ग्रहण करने वाले सदस्यों को पद और गोपनियता की शपथ भी दिलाई गयी। 


साथ ही परिकल्पना के जानकीपुरम, लखनऊ स्थित नए परिसर का लोकार्पण भी डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने किया।
डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि, वैश्वीकरण और डिजिटल इण्डिया के इस दौर में हिंदी की अहमियत समग्र विश्व समझ रहा है, ऐसे में हिन्दी की विविधता, सौन्दर्य, डिजिटल और अंतराष्ट्रीय स्वरुप को परिकल्पना ने जिस तरह से आगे बढ़ाया है, उसने नए प्रतिमान आयाम स्थापित किये हैं। यह संस्था हिन्दी भाषा को संयुक्त राष्ट्र संघ की आधिकारिक भाषा हेतु विगत कई वर्षों से संघर्षरत है।
सभाध्यक्ष वरिष्ठ साहित्यकार डॉ मिथिलेश दीक्षित ने कहा कि ‘‘परिकल्पना जिन पवित्र उद्देश्यों को लेकर काम कर रही है वह बहुत बड़ा काम है। परिकल्पना की सदस्य होने के नाते यदि मैं कहूँ कि परिकल्पना मुझमें बसती है और मैं परिकल्पना में तो शायद कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी।‘‘ विशिष्ट अतिथि महाराष्ट्र विश्वविद्यालय, जलगांव के हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ सुनील कुलकर्णी ने कहा कि  राष्ट्रभाषा के प्रचार को राष्ट्रीयता का मुख्य अंग मानते हुए परिकल्पना सही मायनों में हिन्दी के उत्थान की दिशा में अनुकरणीय भूमिका निभा रही है। अवधी के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. राम बहादुर मिश्र ने कहा कि ‘‘जहां हिन्दी है, वहीं परिकल्पना है और जहां परिकल्पना है वहीं हिन्दी है। परिकल्पना संस्था नहीं एक वैश्विक परिवार है जो वसुधैव कुटुंबकम की भावना को चरितार्थ करती है।‘‘

परिकल्पना की अध्यक्ष माला चौबे ने कहा कि यह संस्था हिन्दी भाषा और साहित्य की तकनीकी प्रगति को समर्पित है। यह संस्था एक वैश्विक परिवार है जिससे जुड़कर आप अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकते हैं और राष्ट्र निर्माण में अपनी हिस्सेदारी सुनिश्चित कर सकते हैं। परिकल्पना समय के प्रधान संपादक डॉ रवीन्द्र प्रभात ने बताया  कि भारतीय भाषाओं के विकास व उनके वैश्विक प्रारूप को समृद्ध बनाने के लिए प्रतिबद्ध संस्था के रूप में परिकल्पना संस्था ने पिछला अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी उत्सव  मई 2019 में भारतीय महावाणिज्य दूतावास वियतनाम के सहयोग से वियतनाम की आर्थिक राजधानी हो ची मिनह में आयोजित किया था।
 कार्यक्रम में  डॉ रवीन्द्र प्रभात, माला चौबे, डॉ सुनील कुलकर्णी, डॉ मिथिलेश दीक्षित, डॉ ओंकार नाथ द्विवेदी, कुसुम वर्मा, डॉ राम बहादुर मिश्र सहित तमाम ब्लॉगर्स, साहित्यकार और बुद्धिजीवी शामिल हुए।   
परिकल्पना संस्था की नयी कार्यकारिणी में डॉ मिथिलेश दीक्षित को मानद अध्यक्ष, डॉ मीनाक्षी सक्सेना को उपाध्यक्ष (महिला प्रकोष्ठ), सत्या सिंह को उपाध्यक्ष (सामाजिक गतिविधियां), डॉ सुषमा सिंह को उपाध्यक्ष (वैश्विक प्रसार), रणधीर सिंह सुमन को उपाध्यक्ष (मीडिया सह विधिक प्रभारी), शचिंद्रनाथ मिश्र को उपाध्यक्ष (युवा प्रकोष्ठ), शीला पाण्डेय को सचिव (कार्यक्रम संयोजन), राजीव प्रकाश को सचिव (सेंट्रल उत्तर प्रदेश प्रभारी),  डॉ अमोल रॉय को सचिव (बिहार प्रभारी),  गगन शर्मा को सचिव (दिल्ली प्रभारी), डॉ अरुण कुमार शास्त्री को सचिव (पश्चिमी उत्तर प्रदेश प्रभारी), नीता जोशी को सचिव (महिला प्रकोष्ठ), कनक लता गुप्ता को सचिव (सामाजिक गतिविधियां),  कुसुम वर्मा को सचिव (सांस्कृतिक गतिविधियां), डॉ उदय प्रताप सिंह को सचिव (मीडिया प्रभारी), आकांक्षा यादव को सह सचिव (महिला प्रकोष्ठ) और आभा प्रकाश को सह सचिव  (सांस्कृतिक गतिविधियां) का दायित्व प्रदान किया गया। इसके अलावा  नकुल दुबे, कृष्ण कुमार यादव, डॉ सुनील कुलकर्णी, डॉ राम बहादुर मिश्र, डॉ चम्पा श्रीवास्तव तथा डॉ प्रभा गुप्ता को संस्था का संरक्षक और  शिव सागर शर्मा, डॉ ओंकारनाथ द्विवेदी, डॉ ओम प्रकाश शुक्ल अमिय, डॉ अनीता श्रीवास्तव और डॉ बाल कृष्ण पाण्डेय को मार्गदर्शक मण्डल में शामिल किया गया।




लखनऊ की संस्था परिकल्पना का 13वाँ वार्षिक महासभा संपन्न, 11 देशों में करा चुकी है अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी उत्सव

परिकल्पना संस्था के तत्वाधान में साहित्यकार व ब्लॉगर्स का हुआ सम्मान