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रविवार, 13 अप्रैल 2025

Navodaya Foundation Day (13 April) : नवोदय स्थापना दिवस - हम नव युग की नई भारती, नई आरती...


 हम नव युग की नई भारती, नई आरती

हम स्वराज्य की ऋचा नवल, भारत की नवलय हों

नव सूर्योदय, नव चंद्रोदय, हमी नवोदय हों। 

भारत में 13 अप्रैल, 1986 को दो नवोदय विद्यालयों से आरंभ हुआ यह सफर आज 661 तक पहुँच चुका है। नवोदय विद्यालय एक सरकारी संस्थान होने के बावजूद उत्कृष्ट शिक्षा व बेहतर परीक्षा परिणामों की वजह से आज शीर्ष पर है। 'वसुधैव कुटुंबकम्' एवं 'शिक्षार्थ आइए, सेवार्थ जाइए' की भावना से प्रेरित नवोदय में जाति, संप्रदाय, क्षेत्र से परे सिर्फ राष्ट्रवाद की भावना है। देश भर में नवोदय विद्यालय के 16 लाख से अधिक पुरा विद्यार्थियों का नेटवर्क समाज को नई दिशा देने के लिए तत्पर है। राजनीति, प्रशासन, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, सैन्य सेवाओं से लेकर विभिन्न प्रोफेशनल सेवाओं, बिजनेस और सामाजिक सेवाओं में नवोदयन्स पूरे भारत ही नहीं वरन पूरी दुनिया में पहचान बना रहे हैं। 'हमीं नवोदय हों' की भावना के साथ आज नवोदय एक ब्रांड बन चुका है। 

नवोदय सिर्फ एक विद्यालय नहीं, वह एक सपना है — उन लाखों बच्चों का सपना, जिनकी आँखों में उम्मीदें थीं, पर साधन नहीं। शिक्षा ही वह रोशनी है, जिससे एक नया, सक्षम और समृद्ध भारत गढ़ा जा सकता है। नवोदय ने ग्रामीण भारत के होनहार बच्चों को न केवल उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा दी, बल्कि आत्मविश्वास, संस्कार और देशसेवा की भावना भी दी। यह वह संस्था है जहाँ एक किसान का बेटा वैज्ञानिक बनता है, एक मजदूर की बेटी डॉक्टर बनती है, और जहाँ से निकलकर छात्र न केवल अपनी, बल्कि पूरे परिवार और समाज की तक़दीर बदलते हैं। नवोदय ने हमें सिखाया कि सपने सिर्फ देखे नहीं जाते, उन्हें जिया भी जाता है — संघर्ष, अनुशासन और समर्पण के साथ। मुझे गर्व है कि मैं नवोदय का हिस्सा रहा हूँ और मुझे पूरा विश्वास है कि आज नवोदय के पूर्व छात्र देश-विदेश में अपने-अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं।

नवोदय विद्यालय की स्थापना का श्रेय तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री राजीव गाँधी जी को जाता है। 1984 में राजीव गांधी जी प्रधानमंत्री बने और 1985 में उन्होंने इस देश के ग्रामीण क्षेत्र के प्रतिभाशाली बच्चों को एक उच्च कोटि की शिक्षा मिल सके इस इरादे से नवोदय विद्यालय की नींव रखी। वे हमेशा एक ऐसे विजनरी प्रधानमंत्री के रूप में याद किये जायेंगे, जिन्होंने इस देश को समर्पित शिक्षा का उत्कृष्ट मॉडल नवोदय विद्यालय दिया। ग्रामीण क्षेत्रों की तमाम प्रतिभाओं को इन नवोदय विद्यालय में न सिर्फ निःशुल्क शिक्षा दी गई, बल्कि हॉस्टल से लेकर रोजमर्रा तक की चीजें निःशुल्क थीं। बस एक ध्येय था कि नवोदय में पढ़े ये बच्चे एक दिन अपनी प्रतिभा से समाज और राष्ट्र को ऊँचाइयों पर ले जाएँगे और समाज ने उन पर जो खर्च किया है, उसका अवदान देंगे। आज भी नवोदय विद्यालय अपनी उसी गरिमा के साथ संचालित हैं। देश-दुनिया में नवोदय से पढ़कर निकले लाखों विद्यार्थी आज समाज व राष्ट्र को नया मुकाम दे रहे हैं। अधिकतर ग्रामीण पृष्ठभूमि के ये विद्यार्थी आज जिन ऊँचाइयों पर हैं, उसका श्रेय नवोदय की नव उदय की उस भावना को जाता है, जहाँ जात-पात, धर्म, अमीर-गरीब, शहरी-ग्रामीण जैसे तमाम विभेद भूलकर सब सिर्फ एक सकारात्मक सोच के साथ नए पथ पर अग्रसर होते हैं। 

जवाहर नवोदय विद्यालयों की स्थापना-

सरकार की नीति के अनुसार, देश के प्रत्येक जिले में एक जवाहर नवोदय विद्यालय स्थापित किया जाना है। तद्नुसार, वर्ष 2016-17 के दौरान देश के विभिन्न जिलों में 62 नए नवोदय विद्यालय स्वीकृत किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, 10 जवाहर नवोदय विद्यालय अनुसूचित जाति जनसंख्या बहुल एवं 10 जवाहर नवोदय विद्यालय अनुसूचित जनजाति जनसंख्या बहुल क्षेत्रों के लिए स्वीकृत किए गए हैं। इसके अतिरिक्त 03 विशेष जवाहर नवोदय विद्यालय, सेनापति-II (मणिपुर), उखरुल-II (मणिपुर) तथा  रतलाम-II (मध्य प्रदेश) में स्वीकृत किए गए हैं। इस प्रकार कुल स्वीकृत जवाहर नवोदय विद्यालयों की संख्या 661 है। प्रत्येक विद्यालय के लिए कक्षाओं, शयन कक्षों, कर्मचारी आवासों, भोजन-कक्ष तथा अन्य बुनियादी सुविधाओं जैसे खेल के मैदान, कार्यशालाओं, पुस्तकालय एवं प्रयोगशालाओं इत्यादि के लिए पर्याप्त भवनों से युक्त सम्पूर्ण परिसर की व्यवस्था है। नए नवोदय विद्यालयों को खोलने का निर्णय राज्य सरकार के इस प्रस्ताव पर आधारित होता है कि वह विद्यालय के लिए लगभग 30 एकड़ भूमि (प्रत्येक मामले के आधार पर छूट सहित) निःशुल्क उपलब्ध कराने के साथ-साथ, विद्यालय को तब तक चलाने के लिए उपयुक्त अस्थायी भवन का प्रबंध करेगी जब तक कि विद्यालय के स्थायी भवन का निर्माण पूरा नहीं हो जाता।

नवोदय विद्यालय का विजन : मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिभाशाली बच्चों को उनके परिवार की सामाजिक-आर्थिक स्थिति पर ध्यान दिए बिना, गुणात्मक आधुनिक शिक्षा प्रदान करना, जिसमें सामाजिक मूल्यों, पर्यावरण के प्रति जागरूकता, साहसिक कार्यकलाप और शारीरिक शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण घटकों का समावेश हो।



Vision of Navodaya Vidyalaya : To provide good quality modern education-including a strong component of culture, inculcation of values, awareness of the environment, adventure activities and physical education- to the talented children predominantly from the rural areas without regard to their family's socio-economic conditions.  

Navodaya Vidyalayas are affiliated to CBSE and offer free education to talented children from Class-VI to XII. (At least 75% of the seats in a district are filled by candidates provisionally selected from rural areas of the district. Minimum One third of the total seats are filled by girls.) Each Navodaya Vidyalaya is a co-educational residential institution providing free boarding and lodging, free school uniforms, text books, stationery, and to and fro rail and bus fare to students. However, a nominal fee @ Rs. 600/- per month is charged from students of Classes- IX to XII as Vidyalaya Vikas Nidhi. The students belonging to SC/ST categories, girls and children of the families Below Poverty Line (BPL) are exempted from payment of this fee. VVN is collected @ Rs. 1500/- per student per month from the students whose parents are Govt. Employees.

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यादों की वो गलियाँ आज भी महकती हैं...

कभी मेस की लाइन में खड़ी हँसी,

कभी हॉस्टल की छत पर साझा किए ख्वाब,

कभी टीचर्स की डाँट में भी छुपा अपनापन —

नवोदय ने हमें सिर्फ पढ़ाया नहीं,

बल्कि जीना सिखाया, रिश्ते निभाना सिखाया...!!


वक़्त भले ही आगे बढ़ गया हो,

पर वो दिन, वो दोस्त, वो पल आज भी दिल के सबसे करीब हैं....


तो आइए, फिर से जी लें वो लम्हे,

फिर से बाँट लें वो मुस्कानें,

और फिर से कहें — "हमीं नवोदय हों !"

नवोदयी भावना एक ऐसा अनमोल रिश्ता है, जो हर नवोदयन के दिल में खास जगह बनाए हुए है। ये सिर्फ एक समूह नहीं, बल्कि एक ऐसा अनूठा परिवार है जिसमें अलग-अलग राज्यों या जिलों के नवोदय विद्यालय भले ही हों, लेकिन जज़्बा, अपनापन और यादों की मिठास सबमें एक जैसी है।










!! नवोदय विद्यालय परिवार के सभी साथियों को ‘नवोदय स्थापना दिवस’ की हार्दिक शुभकामनाएँ !!

शुक्रवार, 10 मई 2024

मतदान, चिट्ठियाँ और लोकतंत्र : पद्म अलंकृतों ने लिखी पाती, मतदान के लिए अवश्य आना साथी


चिट्ठियों का लोकतंत्र से बड़ा गहरा नाता रहा है। एक दौर था जब प्रत्याशी अपनी बात लोगों तक पहुँचाने के लिए घर-घर पैम्फलेट बाँटते थे, जनता-जनार्दन को पत्र लिखा करते थे और लोगों से मतदान की अपील करते थे। उसमें आत्मीयता थी, जन संवाद था, सहभागिता थी.....उसके बाद टेलीफोन, मोबाईल, सोशल मीडिया, व्हाट्सएप और भी न जाने कितने साधन आते गए ! 



वाराणसी को साहित्य-कला-संस्कृति की नगरी कहा जाता है, यही कारण है कि काशी नगरी में  पद्म अलंकृतों की भी कमी नहीं है। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के पूर्व सदस्य पद्मभूषण प्रो. देवी प्रसाद द्विवेदी, आध्यात्मिक गुरु महामहोपाध्याय पद्मश्री हरिहर कृपालु त्रिपाठी, संगीत नाटक अकादमी के पूर्व अध्यक्ष पद्मश्री डा. राजेश्वर आचार्य, ध्रुपद गायक पद्मश्री ऋत्विक सान्याल, सितार वादक पद्मश्री पं. शिवनाथ मिश्र, शास्त्रीय गायिका पद्मश्री सोम घोष, वस्त्र डिजाइनर पद्मश्री श्रीभास सुपाकर, स्वास्थ्य के क्षेत्र में पहचान रखने वाले पद्मश्री प्रो. के. के. त्रिपाठी, हस्तशिल्पी पद्मश्री गोदावरी सिंह, प्रगतिशील किसान पद्मश्री चंद्रशेखर सिंह जैसे तमाम व्यक्तित्व अपने क्षेत्र में ऊँचाइयों पर हैं। 

'दैनिक जागरण' अख़बार ने एक पहल करते हुए 9 मई, 2024 को इन तमाम पद्म अलंकृतों को एक बार फिर उस दौर में ले गए, जब ये खूब चिट्ठियाँ लिखा करते थे। वैसे भी पत्र-लेखन अपने आप में साहित्य की विधा है। इन तमाम पद्म अलंकृतों ने परदेसियों को मतदान करने के लिए प्रेरित करने को पत्र लिखा और फिर उन्हें उसी लाल रंग के लेटर बॉक्स में डाला, जिससे उनकी तमाम यादें जुड़ी हुई हैं।

 'जब तक साथ नहीं चलेंगे, उत्साह नहीं बनेगा' से लेकर 'आलाप करो, विलाप व प्रलाप मत करो' और 'मतदान को स्वराज की लड़ाई से कम नहीं समझें' से लेकर 'पहले तलवार से मिलती थी सत्ता,अब वोट ही है ताकत' जैसे क्रन्तिकारी/भावुक आह्वानों के साथ इन महानुभावों ने लोगों से मतदान की अपील की और उन्हें शब्दों में पिरोकर वोटर्स से अपील करते हुए चिट्ठी भी लिखी। 




उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के पूर्व सदस्य पद्मभूषण प्रो. देवी प्रसाद द्विवेदी और वाराणसी परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव
Padma Bhushan Prof. Devi Prasad Dwivedi, Ex. Member, Uttar Pradesh Public Service Commission and Sh. Krishna Kumar Yadav, Postmaster General, Varanasi Region. 



प्रसिद्ध ध्रुपद गायक पद्मश्री ऋत्विक सान्याल और वाराणसी परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव
Renowned Dhrupad Singer Padma Shri Ritwik Sanyal and Sh. Krishna Kumar Yadav, Postmaster General, Varanasi Region.  

उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के पूर्व अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. राजेश्वर आचार्य (ध्रुपद गायक और जलतरंग वादन में महारत हासिल विख्यात संगीतकार) और वाराणसी परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव।
Ex. Chairman of Uttar Pradesh Sangeet Natak Academy Padm Shri Dr. Rajeshwar Acharya (Hindustani classical vocalist) and Sh. Krishna Kumar Yadav, Postmaster General, Varanasi Region.
 
पद्मश्री डॉ. चंद्रशेखर सिंह (प्रगतिशील किसान) और वाराणसी परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव।
Padm Shri Dr. Chandrashekhar Singh, Member, Spices Board India and Sh. Krishna Kumar Yadav, Postmaster General, Varanasi Region.  


शास्त्रीय गायिका पद्मश्री डॉ. सोमा घोष और वाराणसी परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव।
Padma Shri Dr. Soma Ghosh (Indian performer) and Sh. Krishna Kumar Yadav, Postmaster General, Varanasi Region.  
प्रसिद्ध सितार वादक पद्मश्री पं. शिवनाथ मिश्र और वाराणसी परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव।
Renowned  Sitar Player Padma Shri Pandit Shivnath Mishra and Sh. Krishna Kumar Yadav, Postmaster General, Varanasi Region.  


स्वास्थ्य के क्षेत्र में विशिष्ट पहचान रखने वाले पद्मश्री प्रो. के. के. त्रिपाठी और वाराणसी परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव।
Padma Shri Dr. KK Tripathi and Sh. Krishna Kumar Yadav, Postmaster General, Varanasi Region.  


आध्यात्मिक गुरु महामहोपाध्याय पद्मश्री हरिहर कृपालु त्रिपाठी और वाराणसी परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव।
Spiritual Guru Padma Shri Harihar Kripalu Tripathi and Sh. Krishna Kumar Yadav, Postmaster General, Varanasi Region.  

हस्तशिल्पी पद्मश्री गोदावरी सिंह और वाराणसी परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव।
Padma Shri Godawari Singh (Craft Wood Toy Maker) and Sh. Krishna Kumar Yadav, Postmaster General, Varanasi Region.  


प्रसिद्ध वस्त्र डिजाइनर पद्मश्री श्रीभास सुपाकर और वाराणसी परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव।
Padma Shri Sribhas Chandra Supakar and Sh. Krishna Kumar Yadav, Postmaster General, Varanasi Region.  


बुधवार, 14 फ़रवरी 2024

पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव ने संत अतुलानंद कॉन्वेंट स्कूल, वाराणसी के विद्यार्थियों से किया संवाद, दिया सफलता का मन्त्र

आधुनिक दौर में विद्यार्थियों में अध्ययन के प्रति समर्पण के साथ-साथ रचनात्मकता होना भी बहुत जरूरी है। यह रचनात्मकता ही हमें जिज्ञासु बनाती है और संवेदनशीलता को बरकरार रखती है। परिश्रम का कोई विकल्प नहीं है और निरंतर अभ्यास ही सफलता की कुंजी है। हमारी इच्छाशक्ति जितनी मजबूत होगी, उतनी ही तेजी से हम मंजिल की तरफ बढ़ेंगे। उक्त उद्गार वाराणसी परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने संत अतुलानंद कॉन्वेंट स्कूल, कोइराजपुर, वाराणसी के इंद्रधनुष सभागार में विद्यार्थियों से संवाद करते हुए व्यक्त किये।





इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि पोस्टमास्टर जनरल ने स्वामी अतुलानंद रचना परिषद के सचिव इंजी. राहुल सिंह, संत अतुलानंद कॉन्वेंट स्कूल की निदेशक श्रीमती वंदना सिंह और प्रधानाचार्य डॉ. नीलम सिंह के साथ मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित भी किया और उनके उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम का आरम्भ माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और विद्यार्थियों द्वारा विद्यालय कुल गीत व सरस्वती वंदना से हुआ।


पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने विद्यार्थियों से रूबरू होते हुए कहा कि आत्मविश्वास, धैर्य, टाइम मैनेजमेंट, मौलिक चिंतन और सकारात्मक अभिवृत्ति बोर्ड परीक्षा से लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं तक की तैयारी में काफी मायने रखती हैं। रिजल्ट की चिंता में समय गंवाने की बजाय निरंतर मेहनत पर ध्यान दें। भगवान् श्री कृष्ण ने भी गीता में इसीलिए कर्म के भाव को ही अपनाने पर जोर दिया। विद्यार्थी जीवन में सोशल मीडिया से दूर रहना ही बेहतर है। इसकी बजाय अपनी नियमित दिनचर्या में उचित समय प्रबंधन के साथ अभिरुचियों के विकास, योग, व्यायाम इत्यादि पर जोर देकर तनाव मुक्त रहा जा सकता है।



पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने वर्तमान दौर में बच्चों के मन में चल रहे अंतर्द्वंद्वों और सपनों को बाहर लाने की बात कही। हर बच्चा अपने आप में अद्वितीय और विलक्षण होता है, ऐसे में अभिभावकों को भी उनकी दूसरों से तुलना की बजाय उनकी रूचि और क्षमता के अनुसार ही प्रोत्साहित करना चाहिए।  आपका मूल्य इससे निर्धारित नहीं होता है कि आप क्या हैं बल्कि इससे निर्धारित होता है कि आपमें खुद को क्या बनाने की क्षमता है। जीवन के किसी मोड़ पर निराश होकर या परीक्षा में असफल होने पर अवसादग्रस्त होकर आत्महत्या कर लेने जैसी घटनाएं  किसी समस्या का समाधान नहीं है।




सिविल सर्विसेज में अपने अनुभवों को साझा करते हुए पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि बाहर से बड़ी आकर्षक दिखने वाली इन सेवाओं में उतनी ही बड़ी जिम्मेदारियाँ और चुनौतियाँ भी है, ये चुनौतियां ही फील्ड में किसी अधिकारी की कार्यक्षमता और लोकप्रियता को निर्धारित करती हैं। एक प्रशासनिक अधिकारी से सामाजिक समस्याओं और अपने परिवेश के प्रति ज्यादा संवेदनशीलता की आशा की जाती है।

स्वामी अतुलानंद रचना परिषद के सचिव इंजी. राहुल सिंह ने आगामी बोर्ड परीक्षाओं हेतु विद्यार्थियों को सकारात्मक रहते हुए बिना किसी मानसिक तनाव के समय का सदुपयोग करते हुए अध्ययन में जुट जाने को कहा। प्रधानाचार्य डॉ. नीलम सिंह ने आभार ज्ञापन करते हुए सभी विद्यार्थियों को शुभकामनायें दीं। कार्यक्रम के अंत में पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव को स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों के साथ स्कूल के तमाम अध्यापकगण, स्टाफ, अभिभावकगण भी उपस्थित रहे।