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सोमवार, 25 जनवरी 2021

पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव ने बिरहा सम्राट पद्मश्री हीरालाल यादव के तैल चित्र व 'नागरी' पत्रिका का किया लोकार्पण

भारतीय संस्कृति में लोकचेतना का बहुत महत्त्व है और लोकगायक इसे सुरों में बाँधकर समाज के विविध पक्षों को सामने लाते हैं। लोकगीतों में बिरहा की अपनी एक समृद्ध परम्परा रही है, जिसे हीरालाल यादव ने नई उँचाइयाँ प्रदान कीं। हीरालाल की गायकी राष्ट्रीयता से ओतप्रोत होने के साथ-साथ सामाजिक बुराइयों से लड़ने की अपील भी करती थी। डिजिटल होते दौर में उनके बिरहा गायन को संरक्षित करके आने वाली पीढ़ियों हेतु भी जीवंत रखना जरुरी है। किसान फाउण्डेशन, उत्तर प्रदेश व नागरी प्रचारिणी सभा, वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में 24 जनवरी, 2021 को लोकगीत बिरहा के संवाहक पद्मश्री हीरालाल यादव की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम में उक्त विचार वाराणसी परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल एवं चर्चित साहित्यकार श्री कृष्ण कुमार यादव ने व्यक्त किये। इस अवसर पर स्वर्गीय हीरालाल यादव के तैल चित्र एवं लोक साहित्य पर केंद्रित 'नागरी' पत्रिका का लोकार्पण भी किया गया।


पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि हीरालाल यादव ने बिरहा विधा न सिर्फ विशेष विधा के तौर पर पहचान दिलाई, बल्कि राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी इसे लोकप्रिय बनाया। उन्हें इसके लिए संगीत नाटक अकादमी सम्मान, यश भारती, भिखारी ठाकुर सम्मान से लेकर पद्मश्री तक से नवाजा गया।   ऐसे में बनारस के तमाम स्थापित साहित्यकारों के चित्रों के बीच नागरी प्रचारिणी सभा, वाराणसी में 'बिरहा सम्राट' के चित्र को शामिल किया जाना एक नई परम्परा को जन्म देगा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार श्री हरिराम द्विवेदी (हरी भैया) ने कहा कि नागरी पत्रिका लोक विधा की कुंजी है, जिसमें लोक साहित्य एवं हीरालाल यादव का पूरा कृतित्व व व्यक्तित्व वर्णित है। साहित्य में ऐसी पत्रिकाओं की आवश्यकता है। बिरहा को राष्ट्रीय पटल पर स्थापित करने का श्रेय हीरालाल को जाता है। विशिष्ट अतिथि डाॅ. जितेन्द्र नाथ मिश्र ने कहा कि हीरालाल बिरहा के रसिया थे जिनकी मधुर आवाज ने समाज को झंकृत किया। बिरहा मात्र मनोरंजन का साधन नहीं  है बल्कि यह लोक रंजन की जीवनधार है। यह समाज में उत्साह, उमंग एवं सद्भाव पैदा करती है।

कविमंगल ने हीरालाल पर आधारित गीत से लोगों को भाव-विभोर कर दिया- “उड़ गया पंछी कहाॅं न जाने, करके पिजड़ा खाली, बिरहा की बगिया कर सूनी, हुआ अलविदा माली।” बिरहा गायक रामदेव के सुपुत्र शारदा ने भी गीत सुनाया।

नागरी प्रचारिणी सभा के सहायक मंत्री श्री सभाजीत शुक्ल ने कहा कि हीरालाल यादव का नागरी प्रचारिणी सभा से गहरा नाता था। सभा के माध्यम से वह संसद में बिरहा गायन किये, वे सुरीली आवाज के जादूगर व ग्राम्यांचल के चितेरे रहे।

अतिथियों का स्वागत कवि शंकरानन्द, धन्नूभगत एवं किशन जायसवाल ने किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. जयशंकर जय एवं धन्यवाद ज्ञापन बृजेश चन्द्र पाण्डेय ने किया। स्व. हीरालाल के सुपुत्र रामजी यादव, प्रोफेसर सर्वेशानन्द, प्रोफेसर दयानन्द यादव, डाक्टर राजेन्द्र, डाक्टर उमाशंकर यादव, इन्जीनियर अशोक यादव, डाक्टर दुर्गाप्रसाद श्रीवास्तव व चपाचप बनारसी ने विचार व्यक्त किया। इस अवसर पर नरोत्तम शिल्पी, सिद्धनाथ शर्मा, ज्ञान प्रकाश, सुनील यादव, चैधरी शोभनाथ, राम जनम शरण, हरिहर जख्मी, कविराज, लालजी बाबा जी सहित तमाम साहित्यकार व बुद्धिजीवी उपस्थित रहे।













नागरी प्रचारिणी सभा में लगेगा बिरहा सम्राट पद्मश्री हीरालाल यादव का भी चित्र, पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव ने किया लोकार्पण 


गुरुवार, 3 दिसंबर 2020

पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव ने ‘सोच विचार’ पत्रिका के ठाकुर प्रसाद सिंह विशेषांक का किया लोकार्पण

बनारस की धरती को यह सौभाग्य प्राप्त है कि यहाँ के साहित्यकारों, पत्रकारों और बुद्धिजीवियों ने अपने कृतित्व से देश-विदेश में रोशनी बिखेरी। कबीर, रविदास, तुलसीदास से लेकर मुंशी प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद, आचार्य रामचंद्र शुक्ल, ठाकुर प्रसाद सिंह से लेकर वर्तमान में भी यहाँ कई नाम अग्रणी हैं। एक अध्यापक के साथ-साथ पत्रकार, साहित्यकार व प्रशासनिक अधिकारी रहे ठाकुर प्रसाद सिंह का बहुआयामी व्यक्तित्व भी इसी परंपरा को समृद्ध करता है। उक्त विचार ठाकुर प्रसाद सिंह की 96वीं जयन्ती पर 'साहित्यिक संघ' और 'ठाकुर प्रसाद सिंह स्मृति साहित्य संस्थान' द्वारा 2 दिसंबर, 2020 को आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि वाराणसी परिक्षेत्र के पोस्ट मास्टर जनरल एवं चर्चित साहित्यकार व ब्लॉगर श्री कृष्ण कुमार यादव ने व्यक्त किये। श्री यादव ने वाराणसी से प्रकाशित हिंदी साहित्यिक पत्रिका 'सोच विचार' के ठाकुर प्रसाद सिंह विशेषांक का विमोचन भी किया। इस अवसर पर वाराणसी के नाटी इमली चौराहे पर स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीपदान करके श्रद्धाजंलि भी व्यक्त की गई।

आयोजन के मुख्य अतिथि वाराणसी परिक्षेत्र के पोस्ट मास्टर जनरल एवं चर्चित साहित्यकार व ब्लॉगर श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि  महत्त्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर रहते हुए भी ठाकुर प्रसाद सिंह ने कभी कलम के साथ समझौता नहीं किया। प्रशासनिक दायित्वों की व्यस्तता के कारण उनके लेखन का परिमाण अवश्य सीमित रहा तथा रचनाकर्म की निरंतरता भी बाधित हुई लेकिन एक बड़े तथा कालजयी रचनाकार के रूप में सत्य की प्रतिष्ठा के लिए वे सदैव संघर्षरत रहे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए  वाराणसी मंडल के पूर्व अपर आयुक्त एवं वरिष्ठ साहित्यकार श्री ओम धीरज ने कहा कि एक बहुमुखी सृजन प्रतिभा के रूप में ठाकुर प्रसाद सिंह अपनी पीढ़ी के रचनाकारों में प्रथम पंक्ति में प्रतिष्ठित रहे हैं।  उपन्यास, कहानी, कविता, ललित निबन्ध, संस्मरण तथा अन्यान्य सभी विधाओं में उनका कृतित्व अपनी मौलिकता के कारण उल्लेखनीय है, किन्तु संथाली लोकगीतों की भावभूमि पर आधारित गीतों के संग्रह ‘बंसी और मादल’ के द्वारा वे हिन्दी नवगीत के प्रतिष्पादक रचनाकारों में अग्रगण्य हैं।

समारोह के विशिष्ट अतिथि के रूप में 'नाद रंग' पत्रिका के संपादक श्री आलोक पराड़कर ने कहा कि ठाकुर प्रसाद सिंह ने एक समर्थ पत्रकार - साहित्यकार होने के साथ-साथ नयी प्रतिभाओं के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान किया। वे एक बड़े रचनाकार के साथ ही बड़े इंसान भी थे। उनकी रचनाओं में पीड़ा की सामाजिकता दिखती है लेकिन जीवन में उनकी बातचीत हास्य-व्यंग्य से परिपूर्ण रहती थी। वे चुटीली टिप्पणी करते थे।

विशेषांक के अतिथि संपादक डॉ.उमेश प्रसाद सिंह ने कहा कि ठाकुर प्रसाद सिंह का बड़ा स्पष्ट और स्थिर विश्वास था कि साहित्य के समुचित विकास और उसकी प्रतिष्ठा के लिए साहित्यकार होने के साथ-साथ साहित्यिक का होना आवश्यक है। प्रो.अर्जुन तिवारी ने भी विचार व्यक्त किए।

अतिथियों का स्वागत सी.ए.मनोज कुमार ने तथा सम्मान श्री नरेन्द्र नाथ मिश्र, श्री वासुदेव उबेराय, प्रो. श्रद्धानंद ने किया। इस अवसर पर सर्वश्री सुरेंद्र वाजपेयी, डॉ.संजय गौतम, डॉ.पवन कुमार शास्त्री, सूर्य प्रकाश मिश्र आदि ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की। संचालन डॉ.जितेन्द्र नाथ मिश्र ने तथा धन्यवाद ज्ञापन राजनारायण सिंह ने किया। ठाकुर प्रसाद सिंह की पौत्री समीक्षा सिंह ने उनके गीतों का पाठ किया।









पत्रिका : प्रशासनिक दायित्वों के साथ ठाकुर प्रसाद सिंह ने रचनात्मकता को दिये नए आयाम - पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव

सत्य की प्रतिष्ठा के लिए निरंतर संघर्षरत रहे कवि ठाकुर प्रसाद सिंह- पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव



सोमवार, 18 नवंबर 2019

Ahmedabad International Literature Festival : सोशल मीडिया के दौर में भाषाई शुद्धता जरुरी -डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव

गुजरात में आयोजित हुए "अहमदाबाद इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल" (Ahmedabad International Literature Festival) में चर्चित ब्लॉगर व साहित्यकार एवं लखनऊ मुख्यालय परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ कृष्ण कुमार यादव  बतौर स्पीकर शामिल हुए। इस दौरान डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव ने 16 नवंबर, 2019 को आयोजित "भाषा के बदलते स्वरुप" (Continuous evolution of languages with time) सत्र को सम्बोधित किया और लोगों से संवाद किया। 
डाक  निदेशक कृष्ण कुमार यादव यादव (Krishna Kumar Yadav, Director Postal Services, Lucknow, UP) ने कहा कि भाषा सिर्फ माध्यम भर नहीं है बल्कि किसी भी देश की संस्कृति की संवाहक है। भाषा की सहजता और अन्य भाषाओं से शब्दों को ग्रहण करने की क्षमता इसे और भी मजबूत बनाती है। सोशल मीडिया के दौर में भाषाई शुद्धता का ध्यान रखना भी जरूरी है, अन्यथा आने वाली पीढ़ियाँ इसके मूल स्वरूप से वंचित रह जाएंगी।
बॉलीवुड के चर्चित गीतकार संदीप नाथ ने फिल्मों और गीतों में भाषा के बदलते स्वरूप पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन फ़ौकिया वाजिद ने किया।
 

गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत (Acharya Devvrat, Governor of Gujarat) ने अहमदाबाद लिटरेचर फेस्टिवल का उद्घाटन करते हुए कहा कि, साहित्य समाज का दर्पण है और आज के दौर में साहित्यकारों की भूमिका और भी बढ़ गई है।
फेस्टिवल के संस्थापक निदेशक उमाशंकर यादव ने बताया कि 16 और 17 नवंबर को आयोजित हुए इस लिटरेचर फेस्टिवल में देश-दुनिया की विभिन्न क्षेत्रों की हस्तियां शामिल हुईं और सार्थक संवाद के माध्यम से समाज को एक नई दिशा देने की कोशिश की।

सोशल मीडिया के दौर में भाषाई शुद्धता जरुरी -डाक निदेशक कृष्ण  कुमार यादव 


भाषा सिर्फ माध्यम भर नहीं, बल्कि देश की संस्कृति की संवाहक है-डाक निदेशक कृष्ण  कुमार यादव 

अहमदाबाद इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल में शामिल हुए डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव 

"भाषा के बदलते स्वरुप" सत्र को सम्बोधित किया डाक निदेशक केके यादव ने

शुक्रवार, 15 नवंबर 2019

अहमदाबाद इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल में शामिल होंगे डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव

चर्चित ब्लॉगर व साहित्यकार एवं लखनऊ मुख्यालय परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ कृष्ण कुमार यादव  गुजरात में आयोजित होने वाले अहमदाबाद इंटरनेशनल लिटरेचर में बतौर स्पीकर शामिल होंगे। डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव "भाषा के बदले स्वरुप" सत्र को सम्बोधित करेंगे और लोगों से संवाद करेंगे। श्री यादव के साथ इस सत्र में बॉलीवुड के चर्चित गीतकार व कवि संदीप नाथ एवं फौक़िया वाजिद भी शामिल होंगे। 16 और 17 नवंबर को आयोजित होने वाले इस लिटरेचर फेस्टिवल में देश-दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों की हस्तियों को आमंत्रित किया गया है। इस फेस्टिवल का उद्घाटन गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत करेंगे। 
गौरतलब है कि डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव ने प्रशासन के साथ-साथ साहित्यिक क्षेत्र में भी ख्याति अर्जित की है।  विभिन्न विधाओं में आपकी सात पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।  देश-विदेश में तमाम मंचों से सम्मानित श्री यादव ब्लॉगिंग और सोशल मीडिया के क्षेत्र में भी बेहद सक्रिय हैं।  इसी प्रकार चर्चित गीतकार संदीप नाथ ने पेज थ्री, सरकार, कॉरपोरेट, सांवरिया, सरकार राज, फैशन, जेल, पान सिंह तोमर, साहेब बीवी और गैंग्सटर, बुलेट राजा, आशिकी 2 और सिंघम रिटर्न जैसी कई हिट फिल्मों के लिए गीत लिखे हैं।










अहमदाबाद इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल में शामिल होंगे डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव 
"भाषा के बदले स्वरुप" सत्र को सम्बोधित करेंगे डाक निदेशक केके यादव 

शनिवार, 5 अक्तूबर 2019

सोशल मीडिया ने बढ़ाया हिंदी का दायरा -डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव

सृजन एवं अभिव्यक्ति की दृष्टि से हिंदी दुनिया की अग्रणी भाषाओं में से एक है। हिन्दी सिर्फ एक भाषा ही नहीं बल्कि हम सबकी पहचान है, यह हर हिंदुस्तानी का हृदय है। हिन्दी को राष्ट्रभाषा  किसी सत्ता ने  नहीं बनाया, बल्कि भारतीय भाषाओं और बोलियों के बीच संपर्क भाषा के रूप में जनता ने इसे चुना। उक्त उद्गार लखनऊ (मुख्यालय) परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं और चर्चित साहित्यकार व ब्लॉगर श्री कृष्ण कुमार यादव ने जवाहर नवोदय विद्यालय, पिपरसंड, लखनऊ में राजभाषा हिंदी पर आयोजित संगोष्ठी का शुभारम्भ करते हुए बतौर मुख्य अतिथि कहीं। कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप-प्रज्वलन और मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुआ। मानस, उपमा, अनन्या और सुशील ने सस्वर कविता-वाचन के माध्यम से शमां बाँधा। 


इस अवसर पर विद्यालय के बच्चों ने साहित्यिक-सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से लोगों का मन मोह लिया। डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव ने प्रधानाचार्य श्री जेसी गुप्ता संग विद्यालय की हस्तलिखित पत्रिका "कोशिशें" का विमोचन भी किया।


डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि हिन्दी में विश्व भाषा बनने की क्षमता है। हिन्दी आज सिर्फ साहित्य और बोलचाल की ही भाषा नहीं, बल्कि विज्ञान-प्रौद्योगिकी से लेकर संचार-क्रांति और सूचना-प्रौद्योगिकी से लेकर व्यापार की भाषा भी बनने की ओर अग्रसर है।  श्री यादव ने कहा कि डिजिटल क्रान्ति के इस युग में वेबसाइट्स, ब्लॉग और फेसबुक व टविटर जैसे  सोशल मीडिया ने तो हिन्दी का दायरा और भी बढ़ा दिया है। विश्व भर में हिन्दी बोलने वाले 50 करोड़ तो इसे समझने वालों की संख्या 80 करोड़ है।  विश्व के लगभग 150 विश्वविद्यालयों में हिन्दी पढ़ाई जाती है, जो कि हिन्दी की बढ़ती लोकप्रियता का परिचायक है।
जवाहर नवोदय विद्यालय, पिपरसंड, लखनऊ के प्रधानाचार्य श्री जेसी गुप्ता ने कहा कि, यह हम सभी के लिए सौभाग्य का विषय है कि डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव भी नवोदय विद्यालय के पुरा-छात्र रहे हैं और हिंदी को लेकर अपनी रचनात्मक प्रतिबद्धता व अग्रणी सोच से आपने साहित्य जगत में एक नया मुकाम बनाया है।  प्रधानाचार्य श्री जेसी गुप्ता ने कहा कि संविधान में वर्णित सभी प्रांतीय भाषाओं का पूर्ण आदर करते हुए इस विशाल बहुभाषी राष्ट्र को एक सूत्र में बांधने में भी हिन्दी की एक महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में हिन्दी भाषा के प्रयोग पर हमें गर्व महसूस करना चाहिए। उप प्रधानाचार्य प्रभात मारवाह ने  कहा कि हिंदी पूरे देश को जोड़ने वाली भाषा है और सामान्य जीवन में भी इसे बहुतायत में अपनाया जाना चाहिये।
इस अवसर पर प्रधानाचार्य जेसी गुप्ता,  उप प्रधानाचार्य प्रभात मारवाह, डॉ. वाई सी द्विवेदी, कमर सुल्तान, सुधा पाठक, प्रीति तिवारी, सुमति श्रीवास्तव, पीपी शुक्ला, डॉ. मो. ताहिर सहित नवोदय विद्यालय के तमाम अध्यापकगण व विद्यार्थी  उपस्थित रहे।  





जवाहर नवोदय विद्यालय, लखनऊ में राजभाषा हिंदी पर आयोजित संगोष्ठी का डाक निदेशक केके यादव ने किया शुभारम्भ 
हिन्दी में विश्व भाषा बनने की क्षमता - डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव 
हिन्दी सिर्फ एक भाषा ही नहीं बल्कि हम सबकी पहचान है-डाक निदेशक केके यादव 
सोशल मीडिया ने बढ़ाया हिंदी का दायरा -डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव