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शुक्रवार, 8 जुलाई 2011

बचपन के दिन


बचपन के दिन
कितने मस्ती भरे थे
गाँव भर में हुड़दंग मचाना
जामुन के पेड़ पर चढ़कर
गुठलियों से दूसरों को मारना
ऐसा लगता है
मानो कल की ही बात हो।

एक लंबे अंतराल के बाद
घर जा रहा हूँ
पता नहीं बचपन के साथी
किस हाल में होंगे
पहचान भी पाऊँगा कि नहीं
वो जामुन का पेड़
कहीं काट न दिया गया हो!޶

यही सब सोचते-सोचते गाँव आ गया
तभी हवा का एक तेज झोंका आया
मिट्टी की खुशबू नथुनों में भर गई
सामने जामुन का पेड़
हवाओं के बीच लहरा रहा था
दूर से ही हाथ मिलाकर
मेरा स्वागत करता हुआ।
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