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बुधवार, 21 जुलाई 2010

लघु कथा : माँ /तारा निगम

मांमाँमाँ           
माँ ने बच्चे को खाना दिया, और जल्दी-जल्दी काम में लग गयी, बच्चे से बोली- बेटा, जल्दी खाले, मुझे आफिस जाना है।

 चीं चीं चीं की आवाज से बच्चे का ध्यान ट्यूबलाइट पर बैठी चिडिया पर गया, वो मुंह में दाना दबाये थी और घोंसले से बच्चे चोंच निकालकर चीं चीं चीं कर रहे थे, चिडिया ने मुंह का दाना बारी-बारी से बच्चों के मुंह में डाल दिया और फिर से दाना लेने उड गयी।

 बच्चे ने मां को दिखाया, देखो मां, चिडिया कैसे प्यार से अपने बच्चों को दाना ला लाकर खिला रही है। काश! मैं भी चिडिया का बच्चा होता!

((तारा निगम जी की यह लघुकथा पिछले दिनों दैनिक जागरण में पढ़ी थी. पसंद आई, सो यहाँ पर भी प्रस्तुत कर रहा हूँ.)

25 टिप्‍पणियां:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बड़ा ही भावनात्मक अवलोकन।

Akanksha~आकांक्षा ने कहा…

चिडिया कैसे प्यार से अपने बच्चों को दाना ला लाकर खिला रही है। काश! मैं भी चिडिया का बच्चा होता!....सुन्दर भाव..बधाई.

Bhanwar Singh ने कहा…

बहुत सुन्दर लघुकथा. तारा निगम जी को बधाई और के.के. यादव जी को इस शानदार प्रस्तुति के लिए बधाई.

Bhanwar Singh ने कहा…

बहुत सुन्दर लघुकथा. तारा निगम जी को बधाई और के.के. यादव जी को इस शानदार प्रस्तुति के लिए बधाई.

raghav ने कहा…

पढ़कर सोचने पर मजबूर...लाजवाब.

SR Bharti ने कहा…

कम शब्दों में बड़ी बात. यही तो लघुकथा का मर्म है.

शरद कुमार ने कहा…

Fantastic...

ersymops ने कहा…

मर्म को पकड़ा इस लघु कथा ने..लाजवाब.

Amit Kumar ने कहा…

माँ को लेकर सुन्दर लघु कथा...शुभकामनायें.

Ram Shiv Murti Yadav ने कहा…

वाह-वाह..क्या बात लिखी. मन प्रसन्न हो गया.

Ratnesh Kr. Maurya ने कहा…

सुन्दर शब्द...गहरे भाव...शानदार लघुकथा..बधाई.

Dr. Brajesh Swaroop ने कहा…

माँ पर जितना भी कहें कम ही है..सारगर्भित लघुकथा के लिए बधाई.

Mohd. Ghazi : गुफ्तगू ने कहा…

खूबसूरत अहसास...साधुवाद.

Shyama ने कहा…

Nice.

डॉ टी एस दराल ने कहा…

आधुनिक विकास की कीमत बचपन को चुकानी पड़ रही है ।
अच्छी भावपूर्ण लघु कथा ।

Shahroz ने कहा…

दरल साहब की बात मेरी भी समझें..

shikha varshney ने कहा…

आजकल के भागम भागी युग में एक बच्चे की मनोदशा दर्शाती सशक्त कथा.

राज भाटिय़ा ने कहा…

काश! मैं भी चिडिया का बच्चा होता! बहुत कुछ कह रही है यह कहानी..... धन्यवाद

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बच्चे की भावनाएं दर्शा रही है यह लघुकथा....

पर माँ भी तो चिड़िया की ही तरह दाने लाने जा रही है....

Akshita (Pakhi) ने कहा…

..पाखी माने भी तो चिड़िया...

नीरज गोस्वामी ने कहा…

चिड़िया और इंसान में फर्क समझ आ गया...सच्ची लघु कथा..
नीरज

sandhyagupta ने कहा…

Tezi se kritrim rup dharan karte ja rahe manviya rishton ki pol kholti laghukatha.

Coral ने कहा…

सुन्दर मार्मिक लघुकथा ...

हर्षिता ने कहा…

सुन्दर भावाभिव्यक्ति है।

Shyama ने कहा…

भावनात्मक...