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सोमवार, 6 अप्रैल 2009

रिश्तों का अर्थशास्त्र

रिश्तों के बदलते मायने
अब वे अहसास नहीं रहे
बन गये अहम् की पोटली
ठीक अर्थशास्त्र के नियमों की तरह
त्याग की बजाय माँग पर आधारित
हानि और लाभ पर आधारित
शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव
की तरह दरकते रिश्ते
ठीक वैसे ही
जैसे किसी उद्योगपति ने
बेच दी हो घाटे वाली कम्पनी
बिना समझे किसी के मर्म को
वैसे ही टूटते हैं रिश्ते
आज के समाज में
और अहसास पर
हावी होता जाता है अहम्।

23 टिप्‍पणियां:

Bhanwar Singh ने कहा…

रिश्तों के बदलते मायने
अब वे अहसास नहीं रहे
बन गये अहम् की पोटली
...Nice one.Beautiful expressions.

Science Bloggers Association ने कहा…

रिश्तों को जीने के लिए यह अर्थशास्त्र समझना आवश्यक है।
----------
तस्‍लीम
साइंस ब्‍लॉगर्स असोसिएशन

Amit Kumar Yadav ने कहा…

बदलते रिश्तों पर बेहद करीने एवं संजीदगी से लिखी कविता.

एस. बी. सिंह ने कहा…

सटीक। अब शायद हर रिश्ता अर्थशास्त्र से हो कर गुजरता है, सुंदर कविता।

Dr. Brajesh Swaroop ने कहा…

एक नई तरह की कविता पढ़ रहा हूँ...अच्छा लगा.

Dr. Brajesh Swaroop ने कहा…

एक नई तरह की कविता पढ़ रहा हूँ...अच्छा लगा.

Akanksha Yadav ने कहा…

वर्तमान दौर में आपने कविता के माध्यम से रिश्तों की सही व्याख्या की है.

Akanksha Yadav ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक ने हटा दिया है.
Unknown ने कहा…

शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव
की तरह दरकते रिश्ते
ठीक वैसे ही
जैसे किसी उद्योगपति ने
बेच दी हो घाटे वाली कम्पनी
बिना समझे किसी के मर्म को
Behad sundar bhav.

अनाम ने कहा…
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अनाम ने कहा…

...के.के. जी आप लिखते ही नहीं बल्कि गहराई में जाकर लिखते हैं. इस कविता से मैं इतना प्रभावित हूँ की यह मेरी डायरी की शोभा बन चुकी है.

Ram Shiv Murti Yadav ने कहा…

बेहद उम्दा भावों से रची कविता....दिल को छूती है.

हिंदी साहित्य संसार : Hindi Literature World ने कहा…

आज अर्थशास्त्र कहाँ नहीं है. हर रिश्ते का आधार ही अर्थ हो गया है. अर्थ के बिना सारा जग ही सूना हो गया है.

www.dakbabu.blogspot.com ने कहा…

अर्थ की महिमा ना होती तो कौटिल्य को "अर्थशाश्त्र" लिखने की जरुरत ही क्यों पड़ती....

शरद कुमार ने कहा…

पहली बार आपके ब्लॉग पर आया हूँ...अच्छा लगा. ये रचनाएँ आपके व्यक्तित्व का प्रतिबिम्ब है.

शरद कुमार ने कहा…
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Unknown ने कहा…

Risto ka arthshastra pda, padne par aaj ke waqt ki sachchai se rubru hua.

अनाम ने कहा…

बेहद सार्थक और समसामयिक मुद्दा उठती कविता

महामंत्री - तस्लीम ने कहा…

जीवन को सटीक ढंग से चलाने के लिए रिश्तों का अर्थशास्त्र समझना अति आवश्यक है।
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TSALIIM.
-SBAI-

Akanksha Yadav ने कहा…

Apki agali rachna ka intzar.

mark rai ने कहा…

बहुत ही खुबसूरत लिखा है आपने ......
एक श्वेत श्याम सपना । जिंदगी के भाग दौड़ से बहुत दूर । जीवन के अन्तिम छोर पर । रंगीन का निशान तक नही । उस श्वेत श्याम ने मेरी जिंदगी बदल दी । रंगीन सपने ....अब अच्छे नही लगते । सादगी ही ठीक है ।

Amit Kumar Yadav ने कहा…

Hi

Akanksha Yadav ने कहा…
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