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मंगलवार, 15 जून 2010

मानवता के दुश्मन

रात का सन्नाटा
अचानक चीख पड़ती हैं मौतें
किसी ने हिन्दुओं को दोषी माना
तो किसी ने मुसलमां को
पर किसी ने नहीं सोचा कि
न तो ये हिंदू थे न मुसलमां
बस मानवता के दुश्मन थे।
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