(दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उदघाटन करते वरिष्ठ साहित्यकार उद्भान्त, साथ मे शिखा वार्ष्णेय,गिरीश पंकज,रणधीर सिंह सुमन और रवीन्द्र प्रभात)प्रस्तुति : कृष्ण कुमार यादव-आकांक्षा यादव
इस ब्लॉग पर आप रूबरू होंगे कृष्ण कुमार यादव की साहित्यिक रचनात्मकता और अन्य तमाम गतिविधियों से...
(दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उदघाटन करते वरिष्ठ साहित्यकार उद्भान्त, साथ मे शिखा वार्ष्णेय,गिरीश पंकज,रणधीर सिंह सुमन और रवीन्द्र प्रभात)
'शब्द सृजन की ओर' पर 20 जुलाई, 2012 को प्रकाशित पोस्ट साहस और मानवता की अप्रतिम मूर्ति : कैप्टन लक्ष्मी सहगल को भोपाल से प्रकाशित प्रतिष्ठित हिन्दी साप्ताहिक LN स्टार ने (4 -10 अगस्त 2012) अपने नियमित स्तंभ ‘ब्लॉगर्स साइट’ में प्रकाशित किया है.... आभार !
स्वतंत्रता की गाथा सिर्फ अतीत भर नहीं है बल्कि आगामी पीढ़ियों हेतु यह कई सवाल भी छोड़ती है। वस्तुतः भारत का स्वाधीनता संग्राम एक ऐसा आन्दोलन था, जो अपने आप में एक महाकाव्य है। लगभग एक शताब्दी तक चले इस आन्दोलन ने भारतीय राष्ट्रीयता की अवधारणा से संगठित हुए लोगों को एकजुट किया। यह आन्दोलन किसी एक धारा का पर्याय नहीं था, बल्कि इसमें सामाजिक-धार्मिक सुधारक, राष्ट्रवादी साहित्यकार, पत्रकार, क्रान्तिकारी, कांग्रेसी, गाँधीवादी इत्यादि सभी किसी न किसी रूप में सक्रिय थे।
ब्लागिंग के क्षेत्र में अप्रतिम योगदान हेतु इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ कृष्ण कुमार यादव और उनकी पत्नी आकांक्षा यादव को 'दशक के श्रेष्ठ ब्लॉगर दंपति' का सम्मान प्रदान किए जाने हेतु चयनित किया गया है। परिकल्पना समूह की तरफ से अन्तराष्ट्रीय स्तर पर दिए जाने वाले इस सम्मान के तहत हिंदी ब्लोगिंग में दशक के सर्वाधिक चर्चित पाँच ब्लागर और पाँच ब्लॉग के साथ-साथ दशक के श्रेष्ठ चर्चित ब्लोगर दंपत्ति के रूप में कृष्ण कुमार-आकांक्षा यादव का चयन किया गया है.






(ब्लागिंग के क्षेत्र में अप्रतिम योगदान हेतु हमें (कृष्ण कुमार यादव और आकांक्षा यादव)'दशक के श्रेष्ठ ब्लॉगर दंपति' का सम्मान प्रदान किए जाने हेतु चयनित किया गया है। परिकल्पना समूह की तरफ से अन्तराष्ट्रीय स्तर पर दिए जाने वाले इस सम्मान के तहत हिंदी ब्लोगिंग में दशक के सर्वाधिक चर्चित पाँच ब्लागर और पाँच ब्लॉग के साथ-साथ दशक के श्रेष्ठ चर्चित ब्लोगर दंपत्ति के रूप में कृष्ण कुमार-आकांक्षा यादव का चयन किया गया है...इस सम्मान-उपलब्धि के पीछे आप सभी का योगदान है. आप सभी के स्नेह और सहयोग के लिए आभार.'ब्लॉग-पुरुष' रवीन्द्र प्रभात जी को इस आयोजन के लिए कोटिश: साधुवाद !!)
आज फ्रैंडशिप-डे है, सो आज का दिन दोस्तों के नाम. इसी बहाने कुछ पुराने दोस्तों को फोन करके देखा जाय कि वे कहाँ हैं. जिंदगी की इस भागमभाग में दोस्ती के पैमाने भी बदल गए और उनके मायने भी. कई बार याद आते हैं स्कूल के वो दिन जब दोस्ती निभाने की बड़ी-बड़ी कसमें खाते थे, पर आज वो दोस्त कहाँ हैं पता ही नहीं. आर्कुट, फेसबुक जैसी सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट्स ने वर्चुअल दोस्तों की एक अच्छी-खासी फ़ौज खड़ी कर दी है, पर प्रोफाइल पर हाय-हेलो के अलावा शायद ही इसका कोई महत्त्व हो. यद्यपि इन सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट्स ने उन तमाम दोस्तों से जोड़ने में मदद अवश्य की है जो इधर-उधर बिखरे हुए हैं. खैर, अच्छी दोस्ती का कोई विकल्प नहीं और अच्छे दोस्त जीवन में बहुत कम मिलते हैं...सो, आज का दिन ऐसे ही दोस्तों के नाम !!
पीढ़ियों का अन्तराल महत्वपूर्ण नहीं होता, यदि पुरातन पीढ़ी वर्तमान परिवेश में भी अपनी प्रासंगिकता बनाये रहें. ऐसे ही पीढ़ी की एक जिंदादिल महिला हैं- कैप्टन डॉक्टर लक्ष्मी सहगल. उन्हें किताबों में पढ़ा, चित्रों में देखा, पोर्टब्लेयर गया तो वहां सेलुलर जेल की दीवारों पर देखा और कानपुर में रहने के दौरान एक साक्षात्कार के लिए उनसे रू-ब-रू भी हुआ. उनके बारे में इतना कुछ सुन रखा था कि कहीं-न-कहीं उनके व्यक्तित्व से आतंकित भी महसूस करता. पर जब पहली बार मिला तो इतना निश्छल और ममत्व भरा आत्मीय व्यवहार देखकर विश्वास ही नहीं हुआ कि यह आजाद हिन्द फौज की वही कर्नल हैं, जिन्होंने अपने साहस और बुद्धिमता के बल पर न सिर्फ आजादी को परवान पर चढ़ाया बल्कि नेता जी सुभाष चन्द्र बोस को आजादी की जंग में नारी-शक्ति में अटूट विश्वास करने पर बाध्य भी कर दिया. देश की आजादी के बाद हर किसी ने उसे भुनाया और सत्ता की चांदी की होड़ में दिल्ली में बसकर अपनी पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित करना सुनिश्चित किया, पर 98 वर्षीया यह डाक्टर आज भी अपने घर पर लोगों का इलाज करती हैं. देश-सेवा को भुनाने की बजे उन्होंने मानव-सेवा के पीछे अपना पूरा जीवन ही लगा दिया. यह संयोग ही है कि आज से ठीक दस वर्ष पूर्व वर्ष 2002 में 88 वर्ष की आयु में उन्होने वामपंथी दलों की ओर से श्री ए पी जे अब्दुल कलाम के विरुद्ध राष्ट्रपति पद का चुनाव लडा था और कल जब नए राष्ट्रपति के चुनाव के लिए मतदान हो रहा था तो उसी समय कैप्टन सहगल दिल के दौरे के बाद अस्पताल में भर्ती हो रही थीं.

प्रतीक्षा, मिलन और विरह की अविरल सहेली, निर्मल और लज्जा से सजी-धजी नवयौवना की आसमान छूती खुशी, आदिकाल से कवियों की रचनाओं का श्रृंगार कर, उन्हें जीवंत करने वाली ‘कजरी’ सावन की हरियाली बहारों के साथ तेरा स्वागत है। मौसम और यौवन की महिमा का बखान करने के लिए परंपरागत लोकगीतों का भारतीय संस्कृति में कितना महत्व है-कजरी इसका उदाहरण है। प्रतीक्षा के पट खोलती लोकगीतों की श्रृंखलाएं इन खास दिनों में गज़ब सी हलचल पैदा करती हैं, हिलोर सी उठती है, श्रृंगार के लिए मन मचलता है और उस पर कजरी के सुमधुर बोल! सचमुच वह सबकी प्रतीक्षा है, जीवन की उमंग और आसमान को छूते हुए झूलों की रफ्तार है। शहनाईयों की कर्णप्रिय गूंज है, सुर्ख़ लाल मखमली वीर बहूटी और हरियाली का गहना है, सावन से पहले ही तेरे आने का एहसास! महान कवियों और रचनाकारों ने तो कजरी के सम्मोहन की व्याख्या विशिष्ट शैली में की है।
विंध्य क्षेत्र में गायी जाने वाली मिर्जापुरी कजरी की अपनी अलग पहचान है। अपनी अनूठी सांस्कृतिक परंपराओं के कारण मशहूर मिर्जापुरी कजरी को ही ज्यादातर मंचीय गायक गाना पसंद करते हैं। इसमें सखी-सहेलियों, भाभी-ननद के आपसी रिश्तों की मिठास और छेड़छाड़ के साथ सावन की मस्ती का रंग घुला होता है-
(पिता जी और मम्मी जी )
(बहन किरन यादव के शुभ-विवाह पर आशीर्वाद देते पिता श्री राम शिव मूर्ति यादव जी, श्वसुर श्री राजेंद्र प्रसाद जी, MLC श्री कमला प्रसाद यादव जी और श्री समीर सौरभ जी (उप पुलिस अधीक्षक)
(बहन किरन यादव की शादी के दौरान रस्म निभाते मम्मी-पापा)
(पिता श्री राम शिव मूर्ति यादव जी और वरिष्ठ बाल-साहित्यकार डा. राष्ट्रबंधु जी)
(पिता श्री राम शिव मूर्ति यादव जी)
(पिता श्री राम शिव मूर्ति यादव जी, नाना स्वर्गीय श्री दलजीत यादव जी, श्री वैदेही यादव जी)


युगल दंपत्ति एवं चर्चित साहित्यकार व ब्लागर कृष्ण कुमार यादव और आकांक्षा यादव के बाल-गीत संग्रह 'जंगल में क्रिकेट' एवं 'चाँद पर पानी' का विमोचन पूर्व राज्यपाल डा. भीष्म नारायण सिंह और डा. रत्नाकर पाण्डेय (पूर्व सांसद) ने राष्ट्रभाषा स्वाभिमान न्यास एवं भारतीय सांस्कृतिक सम्बन्ध परिषद्, नई दिल्ली द्वारा गाँधी शांति प्रतिष्ठान, नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में 27 अप्रैल, 2012 को किया. उद्योग नगर प्रकाशन, गाजियाबाद द्वारा प्रकाशित इन दोनों बाल-गीत संग्रहों में कृष्ण कुमार यादव और आकांक्षा यादव के 30 -30 बाल-गीत संगृहीत हैं.