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शुक्रवार, 2 दिसंबर 2016

साहित्य समिति ने किया डाक विभाग के निदेशक व साहित्यकार कृष्ण कुमार यादव का अभिनंदन

प्रशासन के साथ साहित्य का अद्भुत संगम विरले ही देखने को मिलता है। इसके बावजूद तमाम प्रशासनिक अधिकारी अपनी व्यस्तताओं के मध्य हिन्दी साहित्य को समृद्ध कर रहे हैं। उक्त उद्गार साहित्य समिति, सादुलपुर, चूरू द्वारा निराला अस्पताल में राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक सेवाएँ एवं साहित्यकार श्री कृष्ण कुमार यादव के सम्मान एवं अभिनंदन के दौरान वक्ताओं ने व्यक्त किये। 
साहित्य समिति के मंत्री  अनिल शास्त्री ने कहा कि डाक विभाग में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी होने के साथ ही श्री कृष्ण कुमार यादव राष्ट्रीय स्तर के खयातनाम साहित्यकार भी हैं, ऐसे में उनका सम्मान हमारे लिए गौरव की बात है।
इस अवसर पर श्री यादव की पत्नी एवं अग्रणी महिला ब्लॉगर व लेखिका आकांक्षा यादव का भी लाजवंती घोटड व गायत्री बैरासर ने प्रतीक चिन्ह भेंट कर स्वागत किया। वहीं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रामकुमार घोटड ने समिति की गतिविधियों पर चर्चा करते हुए इस बात पर प्रसन्नता जाहिर की कि श्री कृष्ण कुमार यादव और आकांक्षा यादव युगल रूप में हिन्दी साहित्य को समृद्ध करते हुए विभिन्न विधाओं में निरंतर लेखन कर रहे हैं। 

इस अवसर पर साहित्यकार संतोष कुमार जांगिड़, सत्यभान पूनियाँ, अनिता सोनी ने अपनी साहित्य कृतियां श्री कृष्ण कुमार यादव और आकांक्षा यादव को भेंट की। इसके अलावा लघुकथा त्रैमासिक पत्रिका ‘सारा’ की हाल ही में प्रकाशित लघुकथा विशेषांक की प्रति भेंट की गई। कार्यक्रम में स्थानीय डाकपाल बलवीर सिंह, रामवतर बैरासरिया, पुरुषोत्तम  देव पाण्डिया, सुनील अग्रवाल, सांवरमल भार्गव, विजय कुमार सोनी आदि ने भी श्री यादव का अभिनंदन किया। कार्यक्रम का संचालन अनिल शास्त्री ने किया। 
(प्रस्तुति : अनिल शास्त्री, मंत्री- साहित्य समिति, सादुलपुर, चूरू-राजस्थान)






गुरुवार, 1 दिसंबर 2016

आधुनिक दौर में बच्चों में अध्ययन के साथ-साथ रचनात्मकता होना बहुत जरूरी- कृष्ण कुमार यादव


आधुनिक दौर में बच्चों में अध्ययन के प्रति समर्पण के साथ-साथ रचनात्मकता होना भी बहुत जरूरी है। यह रचनात्मकता ही हमें जिज्ञासु बनाती है और संवेदनशीलता को बरकरार रखती है। इसके लिए हमारे भीतर का बचपन जिन्दा रहना चाहिए। उक्त उद्गार राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक सेवाएँ एवं चर्चित साहित्यकार व ब्लॉगर श्री कृष्ण कुमार यादव ने 8 नवम्बर, 2016 को राजस्थान साहित्य परिषद् की ओर से पुलकित सीनियर सैकण्डरी स्कूल, हनुमानगढ़  में आयोजित पुस्तक लोकार्पण समारोह में वरिष्ठ बाल साहित्यकार दीनदयाल शर्मा की चार बाल पुस्तकों का लोकार्पण करते हुए कहीं। 

बोधि प्रकाशन, जयपुर द्वारा  प्रकाशित चारों पुस्तकों  हिन्दी बाल गीत-‘चिडिय़ा चहके गीत सुनाए’, शिशु गीत-‘रसगुल्ला’, बाल कहानियां-‘मित्र की मदद’ तथा राजस्थानी बाल गीत-‘दिवळो कोई जगावां’ के लोकार्पण अवसर पर उपस्थित विद्यार्थियों और स्कूली बच्चों से रूबरू होते हुए  निदेशक डाक सेवाएँ एवं चर्चित साहित्यकार व ब्लॉगर श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि हमें मात्र रूटीनी गतिविधियाँ करके रोबोट नहीं बनना। किताबी पढ़ाई बहुत कुछ है लेकिन यह ही सब कुछ नहीं है। असली संसार तो इन किताबों से बाहर बसता है, जिसे कवि, लेखक और साहित्यकार अपने खूबसूरत शब्दों के माध्यम से पन्नों के दायरे में बाँधने की कोशिश करते हैं और हम सबसे रूबरू करवाते हैं। 

श्री कृष्ण कुमार यादव ने वर्तमान दौर में बच्चों के मन में चल रहे अन्तर्दन्द्धों और सपनों को बाहर लेन की बात कही। उन्होंने कहा कि समाचार पत्रों और न्यूज चैनलों पर अक्सर देखते और पढ़ते हैं कि अमुक जगह पर किसी बच्चे ने फेल होने पर आत्महत्या कर ली। आत्महत्या किसी समस्या का हल नहीं है। पढ़ाई के अलावा भी बहुत कुछ है। किसी बच्चे को खेल में, किसी को पेण्टिंग या ड्राइंग में तो किसी को संगीत आदि में रूचि होती है। हमें अपनी रूचियों को बढ़ावा देते हुए इसमें और आगे बढऩा चाहिए। 

श्री यादव ने कहा कि बाल साहित्यकार के रूप में दीनदयाल शर्मा ने तमाम खूबसूरत कृतियाँ रची हैं और इन रचनाओं में हमारा-आपका सभी का बचपन जीवंत होता है।  इनकी रचनाओं में सहजता है और बाल सुलभता है। बच्चों से संवाद करती इन बाल रचनाओं ने दीनदयाल शर्मा जी को सिर्फ राजस्थान ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान दिलाई है। श्री यादव ने आशा व्यक्त की कि सेवानिवृत्त  होने के बाद दीनदयाल शर्मा बाल-साहित्य के लिए और भी समय निकल सकेंगें और उनके मार्गदर्शन में तमाम भावी बाल साहित्यकार भी पैदा होंगे। 





लोकार्पण के मौके पर पुस्तकों के रचनाकार दीनदयाल शर्मा ने लोकार्पित पुस्तकों से कुछ कविताएं भी सुनाईं। कार्यक्रम के आरंभ में मुख्य अतिथि निदेशक डाक सेवाएं एवं वरिष्ठ साहित्यकार कृष्णकुमार यादव को माल्यार्पण करके श्रीफल भेंट किया गया तथा शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के अंत में स्कूल के प्रधानाचार्य राजेश मिढ़ा ने अतिथियों को धन्यवाद देते हुए आभार जताया। कार्यक्रम का संचालन सुदर्शन सामरिया, जोधपुर ने किया।
(प्रस्तुति - दीनदयाल शर्मा, संपादक -टाबर टोली, हनुमानगढ़, राजस्थान)






मंगलवार, 1 नवंबर 2016

हिन्दी पत्र-पत्रिकाओं में बढ़ती साहित्यिक और लेखकीय चोरी

साहित्यिक/लेखकीय चोरी दिनों-ब-दिन बढ़ती ही जा रही है। इधर कई पत्र-पत्रिकाओं में अपनी रचनाएँ दूसरों के नाम से प्रकाशित देखीं। जरूरत, हम सभी को सतर्क रहने की है। फिर चाहे वह लेखक हो या संपादक।  इंटरनेट के इस दौर में सतही लोग धड़ल्ले से लोगों की रचनाएँ कॉपी-पेस्ट करके अपने नामों से प्रकाशित करा रहे हैं।

फ़िलहाल, कोलकाता से प्रकाशित हिन्दी पत्रिका 'द वेक' (संपादक - श्रीमती शकुन त्रिवेदी) के सितंबर-2016 अंक में मेरे लेख "अंडमान-निकोबार में समृद्ध होती हिन्दी" को किसी कुहेली भट्टाचार्जी के नाम से प्रकाशित किया गया है।
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जब हमने इसे 3 अक्टूबर, 2016  को फेसबुक पर शेयर किया तो पाठकों की प्रतिक्रिया गौरतलब थी -

बेहद शर्मनाक ! कभी बंगाल या कोलकाता अपनी बौद्धिकता के लिए जाना जाता था। यहाँ के लोग साहित्य में भी अग्रदूत थे। और अब यहाँ की पत्रिकाएं और लेखक इस स्तर पर उतर आये हैं।

सर ! आपका लेख चोरी किया जा सकता है, पर आपका कृतित्व नहीं।

आपके पास मौलिक रचना है। ऐसे झूठे लोगो को आइना दिखाया जा सकता है। आप के पास अपनी मूल रचना का copyright law के तहत एकाधिकार होने की सूरत में ही कानूनी कार्यवाही के लिए आगे बढ़ा जा सकता है।

हाहाहा आप के लेख की भी चोरी ,जानती नहीं होंगी डाक विभाग हमेशा सचेत रहता है।

साहित्य और लेखन में ऐसी घृणित चोरी निंदनीय है। आप पत्रिका के संपादक को भी इस बारे में बताइये।

Chori unhi Cheezon ki hoti hai Jo churayi ja sakti hain...sub kuch to chura loge e zamane walon magar WO "Attitude" kahan se laoge Jo Ek gift hai by birth...Have a great day Sir

कॉपी राईट एक्ट और मजबूत होना चाहिए

यह एक गलत प्रचलन है। इसके लिए कुछ आवश्यक कदम उठाये जा सकते हैँ।

पत्रिका के नाम कानूनी कार्रवाई करने का लेटर भेजिए...होश ठिकाने आ जाएंगे...

सोमवार, 31 अक्तूबर 2016

सोशल मीडिया पर लिखी गई पोस्टों के बीमा के लिए तत्पर हैं बीमा कंपनियाँ

(अनवरत काल से चली आ रही साहित्य, कला, संस्कृति से जुड़ी तमाम विधाओं का बीमा भले ही न हुआ हो, पर सोशल मीडिया पर लिखी गई पोस्टों के बीमा के लिए बीमा कंपनियाँ तत्पर हैं। बाजार हर चीज को अपने दायरे में लेना चाहता है........ )

सोशल मीडिया पर किसी घटना, विषय या किसी व्यक्ति के बारे में खुलकर अपनी बात लिखने वालों को अब डरने के जरूरत नहीं है। क्योंकि उनके खिलाफ यदि कोई मानहानि का केस करता है तो इंश्योरेंस कंपनी उस व्यक्ति को कवर देगी। कंपनी केस साबित करने वाले व्यक्ति को क्लेम की पूरी रकम देगी। अभी भारत में सोशल मीडिया यूजर्स का इंश्योरेंस नहीं होता है। 

देश की ऐसी पहली इंश्योरेंस पॉलिसी लाने पर निजी कंपनी बजाज आलियांज काम कर रही है। इसके बारे में कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर तपन सिंहल ने जानकारी दी है। उनका कहना है, ‘यदि किसी व्यक्ति को सोशल मीडिया पर किसी पोस्ट या कमेंट की वजह से मुकदमा झेलना पड़े और मुआवजा देने की नौबत आए तो साइबर इंश्योरेंस इस लागत को कवर करेगा। हमारी कंपनी व्यक्तिगत साइबर कवर डिजाइन कर रही है। यह कॉर्पोरेट्स के लिए वर्तमान में मौजूद साइबर इंश्योरेंस कवर जैसा ही होगा। बीमा कराने वाले व्यक्ति को दिए जाने वाले साइबर कवर में उसकी साख, डाटा सेंध और किसी निजी, वित्तीय या संवेदनशील जानकारी चोरी हो जाने के मामले में कवर मिलेगा। इंटरनेट यूजर्स की बढ़ती संख्या और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के बढ़ते चलन की वजह से नए खतरे पैदा हुए हैं। सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स वेबसाइट्स पर काफी मात्रा में निजी जानकारी मौजूद है। व्यक्तिगत साइबर इश्योरेंस पॉलिसी के तहत फिशिंग, आइडेंडिटी थेफ्ट, साइबर स्टाकिंग, शोषण और बैंक अकाउंट्स की हैकिंग को कवर किया जाएगा। अभी साइबर इश्योरेंस आईटी फर्मों, बैंकों, ई-कॉमर्स और फार्मस्यूूटिकल कंपनियों को बेचे जाते हैं। इसके तहत कॉर्पाेरेट्स को प्राइवेसी और डाटा ब्रीच, नेटवर्क सिक्योरिटी दावों और मीडिया देनदारी का कवर मिलता है।’ भारत में कॉर्पोरेट्स कंपनियों द्वारा साइबर कवर लेने का चलन पिछले कुछ सालों में बढ़ा है। देश में पिछले तीन साल से ऐसी पॉलिसी उपयोग हैं। इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक, ऐसी करीब 500 पॉलिसीज ली गई हैं। 

भारत में 1000 करोड़ रु. का साइबर बाजार 

एकअनुमान के मुताबिक, भारत में साइबर बीमा का बाजार करीब 1,000 करोड़ रुपए का है। यह दायित्व बाजार के 7 से 10 फीसदी हिस्सों को कवर करता है। देश में इंटरनेट यूजर्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इसमें सबसे ज्यादा नए इंटरनेट यूजर्स का झुकाव सोशल मीडिया की तरफ होता है। अमेरिका के बाद भारत में इंटरनेट यूजर्स के लिहाज से दूसरा सबसे बड़ा देश है। कुछ साालों में भारत पहले स्थान पर होगा। 
-कृष्ण कुमार यादव @ शब्द-सृजन की ओर
Krishna Kumar yadav @ http://kkyadav.blogspot.in/

मशहूर अमेरिकी गीतकार बॉब डिलन को साहित्य का नोबेल पुरस्कार : 115 साल में पहली बार गीतकार को साहित्य का नोबेल

पिछले 50 वर्षो से अपनी पीढ़ी की आवाज माने जाने वाले अमेरिकी गीतकार और गायक बॉब डिलन को वर्ष  2016 के साहित्य के नोबेल पुरस्कार के लिए चुना गया है। 1901 से अब तक 115 साल में 109 शख्सियतों को यह नोबेल मिला, लेकिन ऐसा पहली बार होगा जब किसी गीतकार और गायक को साहित्य के नोबेल के लिए चुना गया है। बॉब डिलन का लेखन उपन्यास, कविता या किसी अन्य परंपरागत विधा में नहीं आता है, जिसके लिए अब तक यह पुरस्कार दिया जाता रहा है।

स्वीडन की नोबेल अकादमी ने 13 अक्टूबर, 2016 को इसकी घोषणा करते हुए कहा कि अमेरिकी गीतों की परंपरा में कविता के नए भावों को रचने के लिए बॉब डिलन को यह पुरस्कार दिया जा रहा है। एकेडमी की स्थायी सचिव सारा दानियस ने कहा कि डिलेन के गाने ‘कानों में कविता जैसे लगते हैं। ’ डिलन ने अमेरिका में प्रचलित गायन परंपरा में एक नए युग की शुरुआत की है। ब्लोविन इन द विंड, मास्टर्स ऑफ वार, ए हार्ड रेन्स ए-गोना फॉल, द टाइम्स दे आर ए-चेंजिंग और लाइक ए रोलिंग स्टोन जैसे गीतों में उन्होंने विद्रोह, असंतोष और स्वतंत्रता जैसे भावों को अभिव्यक्ति दी है। 

साठ के दशक में अपने गिटार और माउथऑर्गन के साथ संगीत की दुनिया में आए डिलन को लोकगीतों का रॉक स्टार भी कहा जाता है। 75 साल के डिलन आज भी गाने लिखते हैं और अक्सर टूर पर रहते हैं। स्वीडिश अकादमी के सदस्य पर वास्टबर्ग ने कहा कि वह शायद सबसे महान जीवित कवि हैं। उपन्यासकार टोनी मोरिसन के बाद से नोबेल पुरस्कार हासिल करने वाले डिलन पहले अमेरिकी साहित्यकार हैं। मोरिसन को 1993 में इस पुरस्कार से नवाजा गया था।

रॉबर्ट एलेन जिमेरमन उर्फ बॉब डिलेन का जन्म 24 मई, 1941 को अमेरिका में  मिनेसोटा के डुलुथ में एक साधारण परिवार में  हुआ। 1959 में उन्होंने मिनेसोटा के कॉफी हाउस में गायक के तौर पर कैरियर शुरू किया।1961 में वह न्यूयॉर्क चले आए। 1961 में ही उन्होंने अपना नाम औचारिक रूप से रॉबर्ट ज़िम्मरमैन से बदलकर बॉब डिलन कर लिया था। यहां के ग्रीनविच गांव में वह क्लब और कैफे में गाना गाने लगे। बड़े होने के साथ उन्होंने हार्मोनिका, गिटार और पियानो बजाना सीखा। 1961 में पहला अलबम 'बॉब डिलन' बाजार में आया। पहले अलबम की अपार सफलता के बाद बॉब ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उस समय अमेरिका के लोकप्रिय संगीत पर उनके गानों का जबर्दस्त असर पड़ा। अमेरिका के बदलते दौर और कलचर को पांच  दशकों से डिलन बखूबी गायकी और लेखन में उतारते रहे हैं। उन्हें अमेरिका की दिक्कतें बताने वाला अनौपचारिक इतिहासकार भी कहा जाता है।

 बॉब के बारे में कहा जाता है कि वो परंपरा के खिलाफ अलग तरह के गाने लिखते और गाते हैं। इसकी वजह से वो कई बार विवादों में भी रहे। बॉब डिलन के ‘ब्लोविन इन द विंड और द टाइम्स दे आर ए चेंज इन’ जैसे गानों  को अमेरिका में जंग के खिलाफ और सिविल राइट्स मूवमेंट के प्रतीक के तौर पर भी देखा जाता है। बॉब डिलन ने 54 साल में 70 एलबम निकाले, 653 गाने गाए और लिखे एवम 6 किताबें खुद लिखीं।  बॉब के हिट एल्बमों में 1965 में ब्रिंगिंग इट ऑल बैक होम और हाइवे 61 रिविजिटेड,1966 में ब्लांड ऑन ब्लांड, 1975 में ब्लड ऑन द ट्रैक्स, 1989 में ओह मर्सी,1997 में टाइम आउट ऑफ माइंड और 2006 में मॉडर्न टाइम्स शामिल हैं। उनके सबसे लोकप्रिय गीतों में मिस्टर टैंबूरिन मैन से लेकर लाइक ए रोलिंग स्टोन, ब्लोइंग इन द विंड और द टाइम्स दे आर चेजिंग शामिल हैं। 

बॉब डिलन ने अकॉस्टिक सिंगर और सॉन्ग राइटर के तौर पर करियर शुरू किया था। कहा जाता है कि शुरुआती वर्षों में बॉब डिलन जर्मन तानाशाह हिटलर से बेहद प्रभावित थे।1965 के फोक फेस्टिवल में वे तब विवादों  में आ गए जब उन्होंने अपनी अकॉस्टिक गिटार अलग रख दी और इलेक्ट्रिक गिटार से परफॉर्मेंस दी। इस फेस्टिवल में लोगों ने बॉब डिलन के खिलाफ हूटिंग भी की, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। 1966 में उनका एक्सीडेंट हो गया। माना गया कि वे शोहरत का दबाव महसूस कर रहे थे। इसलिए उन्होंने इस हादसे के बारे में हकीकत कभी सामने नहीं आने दी। एक्सीडेंट के बाद 8 साल तक उन्होंने कोई टूर नहीं किया।

बॉब डिलन सिर्फ अमेरिका में ही नहीं बल्कि विश्व भर में प्रसिद्ध हैं।  बॉब डिलन को साहित्य को नोबेल मिलने पर भारत में भी खुशियां जताई जा रही हैं। सरोद वादक अमजद अली खान से लेकर संगीत निर्देशक ए आर रहमान तक ने डिलन को बधाइयां दी हैं। दोनों ने ही इसे संगीत से जुड़े सभी लोगों के लिए ‘‘गौरव का क्षण'' बताया। प्रसिद्ध गीतकार जावेद अख्तर कि यह खबर सुनकर काफी उत्साहित हूं। हम कुछ चीजों को लेकर काफी नैतिकतावादी हो जाते हैं। किसी गाने को साहित्य के तौर पर नहीं देखा जाता। गजल और नज्म को साहित्य समझा जाता है। बॉब एक शानदार इंसान हैं। उन्होंने इतिहास रचा है।

गौरतलब है कि 1901 से अब तक साहित्यर के 108 नोबेल पुरस्का र दिए जा चुके हैं। बॉब डिलन साहित्यल का नोबेल पाने वाली 109वीं शख्सियत हैं। अब तक साहित्य में सबसे अधिक नोबेल पुरस्कार  जीतने वाले अंग्रेजी के लेखक (27) रहे हैं। उसके बाद फ्रेंच (14) और तीसरे नंबर पर (13) जर्मन हैं। नोबेल पुरस्कार जीतने वालों को करीब 80 लाख स्वीडिश क्रोनर (करीब छह करोड़ रुपये) पुरस्कार के तौर पर मिलते हैं। सभी पुरस्कार विजेता 10 दिसंबर को अल्फ्रेड नोबेल की पुण्यतिथि पर स्वीडेन में पुरस्कार ग्रहण करते हैं।
कृष्ण कुमार यादव @ शब्द-सृजन की ओर 
Krishna Kumar Yadav @ http://kkyadav.blogspot.in/


रविवार, 28 अगस्त 2016

देश के युवाओं को श्रीकृष्ण के विराट चरित्र के बृहद अध्ययन की जरूरत - कृष्ण कुमार यादव


श्रीकृष्ण सिर्फ एक भगवान या अवतार भर नहीं थे।  इन सबसे आगे वह एक ऐसे पथ-प्रदर्शक और मार्गदर्शक थे, जिनकी सार्थकता  हर युग में बनी रहेगी।  उनके व्यक्तित्व में भारत को एक प्रतिभासम्पन्न राजनीतिवेत्ता ही नहीं, एक महान कर्मयोगी और दार्शनिक प्राप्त हुआ, जिसका गीता-ज्ञान समस्त मानव-जाति एवं सभी देश-काल के लिए पथ-प्रदर्शक है। उक्त विचार राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ  एवं चर्चित साहित्यकार श्री कृष्ण कुमार यादव ने यादव समाज, जोधपुर द्वारा गाँधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र, जोधपुर में 25 अगस्त, 2016  को आयोजित जन्माष्टमी  स्नेह मिलन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किये। 

डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने इस बात पर जोर दिया कि आज देश के युवाओं को श्रीकृष्ण के विराट चरित्र के बृहद अध्ययन की जरूरत है। राजनेताओं को उनकी विलक्षण राजनीति समझने की दरकार है और धर्म के प्रणेताओं, उपदेशकों को यह समझने की आवश्यकता है कि श्रीकृष्ण ने जीवन से भागने या पलायन करने या निषेध का संदेश कभी नहीं दिया। श्री यादव ने कहा कि श्रीकृष्ण ने कभी कोई निषेध नहीं किया। उन्होंने पूरे जीवन को समग्रता के साथ स्वीकारा है। यही कारण है कि भगवान श्री कृष्ण की स्तुति लगभग सारी दुनिया में किसी न किसी रूप में की जाती है। यहाँ तक कि वे लोग जिन्हें हम साधारण रूप में नास्तिक या धर्मनिरपेक्ष की श्रेणी में रखते हैं, वे भी निश्चित रूप से भगवदगीता से प्रभावित हैं। श्री यादव ने कहा कि श्रीकृष्ण द्वारा गीता में कहे गए उपदेशों का हर एक वाक्य हमें कर्म करने और जीने की कला सिखाता है। अब तो कॉरपोरेट जगत भी मैनेजमेंट के सिद्धांतों को गीता से जोड़कर प्रतिपादित कर रहा है।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में पधारे रेलवे वर्कशॉप जोधपुर में उप मुख्य यांत्रिक इंजीनियर श्री सत्यवीर सिंह यादव ने कहा कि भगवान् श्री कृष्ण  के चरित्र में सर्वत्र समदर्शिता प्रकट होती है।  रिटायर्ड अतिरिक्त रजिस्ट्रार, सहकारी समिति जोधपुर संभाग श्री योगेन्द्र सिंह यादव ने श्री कृष्ण के विचारों को सदैव प्रासंगिक बताते हुए उनके  जीवन से प्रेरणा लेने की बात कही।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे यादव समाज, जोधपुर के अध्यक्ष डॉ. शैलेष यादव ने कहा कि कृष्ण की सभी लीलाएँ कुछ न कुछ सन्देश देती हैं। उन लीलाओं को उनके आध्यात्मिक स्वरूप में ही समझा जा सकता है। यूथ हॉस्टल, जोधपुर के प्रबंधक ले. कर्नल (सेनि) प्रकाश चन्द्र यादव ने भी विचार व्यक्त किये।



कार्यक्रम में मुख्य अतिथि  निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने राजस्थान न्यायिक सेवा में चयनित (14 वीं रैंक) पूर्णिमा यादव सहित विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित भी किया। 

इस अवसर पर  प्रविंद्र यादव, डॉ. राम रतन यादव, मदन सिंह यादव, अरुण यादव, आनंद यादव, राजकुमार यादव सहित तमाम लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन नंदकिशोर यादव ने किया।