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रविवार, 28 अगस्त 2016

देश के युवाओं को श्रीकृष्ण के विराट चरित्र के बृहद अध्ययन की जरूरत - कृष्ण कुमार यादव


श्रीकृष्ण सिर्फ एक भगवान या अवतार भर नहीं थे।  इन सबसे आगे वह एक ऐसे पथ-प्रदर्शक और मार्गदर्शक थे, जिनकी सार्थकता  हर युग में बनी रहेगी।  उनके व्यक्तित्व में भारत को एक प्रतिभासम्पन्न राजनीतिवेत्ता ही नहीं, एक महान कर्मयोगी और दार्शनिक प्राप्त हुआ, जिसका गीता-ज्ञान समस्त मानव-जाति एवं सभी देश-काल के लिए पथ-प्रदर्शक है। उक्त विचार राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ  एवं चर्चित साहित्यकार श्री कृष्ण कुमार यादव ने यादव समाज, जोधपुर द्वारा गाँधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र, जोधपुर में 25 अगस्त, 2016  को आयोजित जन्माष्टमी  स्नेह मिलन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किये। 

डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने इस बात पर जोर दिया कि आज देश के युवाओं को श्रीकृष्ण के विराट चरित्र के बृहद अध्ययन की जरूरत है। राजनेताओं को उनकी विलक्षण राजनीति समझने की दरकार है और धर्म के प्रणेताओं, उपदेशकों को यह समझने की आवश्यकता है कि श्रीकृष्ण ने जीवन से भागने या पलायन करने या निषेध का संदेश कभी नहीं दिया। श्री यादव ने कहा कि श्रीकृष्ण ने कभी कोई निषेध नहीं किया। उन्होंने पूरे जीवन को समग्रता के साथ स्वीकारा है। यही कारण है कि भगवान श्री कृष्ण की स्तुति लगभग सारी दुनिया में किसी न किसी रूप में की जाती है। यहाँ तक कि वे लोग जिन्हें हम साधारण रूप में नास्तिक या धर्मनिरपेक्ष की श्रेणी में रखते हैं, वे भी निश्चित रूप से भगवदगीता से प्रभावित हैं। श्री यादव ने कहा कि श्रीकृष्ण द्वारा गीता में कहे गए उपदेशों का हर एक वाक्य हमें कर्म करने और जीने की कला सिखाता है। अब तो कॉरपोरेट जगत भी मैनेजमेंट के सिद्धांतों को गीता से जोड़कर प्रतिपादित कर रहा है।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में पधारे रेलवे वर्कशॉप जोधपुर में उप मुख्य यांत्रिक इंजीनियर श्री सत्यवीर सिंह यादव ने कहा कि भगवान् श्री कृष्ण  के चरित्र में सर्वत्र समदर्शिता प्रकट होती है।  रिटायर्ड अतिरिक्त रजिस्ट्रार, सहकारी समिति जोधपुर संभाग श्री योगेन्द्र सिंह यादव ने श्री कृष्ण के विचारों को सदैव प्रासंगिक बताते हुए उनके  जीवन से प्रेरणा लेने की बात कही।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे यादव समाज, जोधपुर के अध्यक्ष डॉ. शैलेष यादव ने कहा कि कृष्ण की सभी लीलाएँ कुछ न कुछ सन्देश देती हैं। उन लीलाओं को उनके आध्यात्मिक स्वरूप में ही समझा जा सकता है। यूथ हॉस्टल, जोधपुर के प्रबंधक ले. कर्नल (सेनि) प्रकाश चन्द्र यादव ने भी विचार व्यक्त किये।



कार्यक्रम में मुख्य अतिथि  निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने राजस्थान न्यायिक सेवा में चयनित (14 वीं रैंक) पूर्णिमा यादव सहित विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित भी किया। 

इस अवसर पर  प्रविंद्र यादव, डॉ. राम रतन यादव, मदन सिंह यादव, अरुण यादव, आनंद यादव, राजकुमार यादव सहित तमाम लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन नंदकिशोर यादव ने किया।



सोमवार, 22 अगस्त 2016

आगामी पीढ़ियों के जीवन को बचाने हेतु वृक्षारोपण जरुरी - कृष्ण कुमार यादव

वृक्षारोपण मानव समाज का वैयक्तिक और सामाजिक दायित्व है। प्राचीन काल से ही मानव और वृक्षों का घनिष्ठ सम्बन्ध रहा है। मानवीय सभ्यता-संस्कृति के आरम्भिक विकास का पहला चरण भी वन-वृक्षों  की सघन छाया में ही उठाया गया। ऐसे में उनकी रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का कर्त्तव्य है। अपने और आने वाली पीढ़ी के जीवन को बचाने के लिए हमें वृक्षारोपण करना ही होगा। उक्त उद्गार राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक सेवाएं कृष्ण कुमार यादव ने जवाहर नवोदय विद्यालय, तिलवासिनी, जोधपुर में आयोजित पौधारोपण कार्यक्रम में कहीं। इस अवसर पर श्री यादव ने पौधरोपण कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। 

डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि वृक्ष कभी भी हमसे कुछ नहीं लेते, सिर्फ देते हैं।  ऐसे में यदि हर व्यक्ति अपने जीवन में एक पेड़ लगाने और उसे भरपूर समृद्ध करने का भी संकल्प ले ले तो पर्यावरण को सतत सुरक्षित किया जा सकता है। विद्यार्थियों को नैतिक शिक्षा के तहत वृक्षारोपण के बारे में बताने और उन्हें इस ओर प्रेरित करने पर भी श्री यादव ने जोर दिया। 

जवाहर नवोदय विद्यालय, तिलवासनी, जोधपुर के प्रधानाचार्य  चिंतामणि ने कहा कि हमारी परंपरा में एक वृक्ष को दस पुत्रों के सामान मन गया है, क्योंकि वृक्ष पीढ़ियों तक हमारी सेवा करते हैं। उन्होंने कहा कि  वृक्षारोपण और उनके रक्षण के  दायित्व का निर्वाह कर सृष्टि को भावी विनाश से बचाया जा सकता है । 

इस अवसर पर जवाहर नवोदय विद्यालय के तमाम अध्यापक और विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के आरम्भ में बच्चों ने  पर्यावरण संरक्षण एवम इसमें वृक्षों के योगदान पर संगीतमय प्रस्तुति दी। 




विश्व आदिवासी दिवस : आदिवासियों के जीवन को बचाने के साथ-साथ उनकी भाषा और संस्कृति को भी सहेजने की जरुरत

आदिवासी जनजातियों के मानवाधिकारों के प्रति लोक के मन में सहानुभूति के भाव को जाग्रत करने के लिए उनकी जीवन सम्बन्धी चुनौतियों पर विचार करने की महती आवश्यकता को मद्देनजर रख जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर एवं एम.वी. संस्थान, जोधपुर के संयुक्त प्रयासों से दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारम्भ एम.बी.एम. संस्थान के इंटरनेशनल सेमिनार हाॅल में 9 अगस्त, 2016 को किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ आदिवासी समाज व शिक्षा जगत के ख्याति प्राप्त प्रबुद्धजनों के द्वारा आदिवासियों के बलिदान के प्रतीक ‘मानगढ धाम’ की प्रतिमा के सम्मुख द्वीप प्रजज्वलन के साथ किया गया। 

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्री हेमराज मीणा, पूर्व विधायक एवं अध्यक्ष राजस्थान जनजाति मोर्चा, अध्यक्षता-श्री शंकरलाल मीना, साहित्कार एवं सेवानिवृत्त केन्द्रीय कस्टम कमिश्नर, विशिष्ट अतिथि चर्चित ब्लॉगर व साहित्यकार श्री कृष्ण कुमार यादव, निदेशक डाक सेवाएं, राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर , मुख्य वक्ता के रूप में केन्द्रीय मिशीगन विश्वविद्यालय यू.एस.ए. की प्रो. विदु सोनी रहे।

कार्यक्रम के शुरूआत में अतिथियों का पुष्पगुच्छ एवं साफा पहनाकर स्वागत किया और इसके बाद विभागाध्यक्ष प्रो. एच. एस. राठौड़ ने अतिथियों का शब्द सुमनों से स्वागत किया और अपने अनुभवों को साझा किया तथा पढ़े-लिखे एवं उच्च पदों पर आसीन आदिवासियों को पिछड़े एवं जरूरतमन्द लोगों की हरसंभव मदद करने की बात कही। इसी क्रम में अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के निदेशक डाॅ. जनक सिंह मीना ने मानगढ़ में शहीद हुए आदिवासियों को नमन करते हुए मंचासीन अतिथियों का स्वागत एवं परिचय करवाया और संगोष्ठी के विषय पर प्रकाश डालते हुए इसे आयोजित करने के पीछे के उद्देश्यों की ओर इशारा करते हुए आदिवासी दिवस के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य को बताया। डाॅ. मीना ने कहा कि 1993 से विश्व आदिवासी दिवस मनाने की शुरूआत हुई और इसको मनाने के पीछे आदिवासियों को उनके मानव अधिकारों के प्रति जागरूक करना, उनके अधिकारों का संरक्षण करना है। डाॅ. मीना ने बताया कि डाॅ. रामदयाल मुण्डा जो यू.एन.ओ. में गैर सरकारी सदस्य के रूप में गये, उन्होंने देखा कि सरकारी प्रतिनिधि ने यू.एन.ओ. में सही तथ्य नहीं रखे। डाॅ. मीना ने बताया कि दो दिन में पांच तकनीकी सत्रों में लगभग 150 शोध पत्र पढ़े जाएँगेऔर हिन्दी व अंग्रेजी के शोध पत्रों को पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया जाएगा और इस संगोष्ठी की सिफारिशों को भारत सरकार के समक्ष रखा जाएगा।

उद्घाटन सत्र के प्रारम्भ में संगोष्ठी की मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए सेण्ट्रल मिशिगन यूनिवर्सिटी, संयुक्त राज्य अमेरिका की प्रोफेसर प्रो. विदु सोनी ने आदिवासी जनजातियों के पहचान के मुद्दे को अपना विषय बनाया और संयुक्त राष्ट्र संघ के आदिवासियों के मानवाधिकारों पर प्रकाश डाला।

मुख्य अतिथि के रूप में श्री हेमराज मीणा, अध्यक्ष जनजाति मोर्चा राजस्थान ने अपने उद्बोधन में कहा कि आदिवासी प्रारम्भ से ही संघषरर्त रहे हैं  और आदिवासियों का योगदान देश की आजादी में अहम रहा है। इन्होंने विरसामुण्डा, गोविन्द गुरू मानगढ़ की चर्चा करते हुए बताया कि मानगढ़ की पहाड़ियों पर दो हजार से अधिक आदिवासी शहीद हुए। इन्होंने बताया कि बांसवाड़ा एवं आसपास के देशी रियासतों के शासकों ने आदिवासियों के विद्रोह की गुप्त सूचनाएं अंग्रेजों को उपलब्ध करवायी इसी कारण देश में गुलामी रही। 

विशिष्ट अतिथि के रूप में चर्चित ब्लॉगर व साहित्यकार श्री कृष्ण कुमार यादव, निदेशक डाक सेवाएं, राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर ने अपने उद्बोधन में कहा कि आदिवासी नाम में ही निहित है, जिनसे सभ्यता एवं संस्कृति का प्रारम्भ हुआ, जिन्होंने सबसे पहले धरती पर रहना शुरू किया। भारतीय परिप्रेक्ष्य में तीन प्रकार के आदिवासी हैं - पहले वे जो विकसित एवं समृद्ध हैं, जिन्होंने प्रत्येक क्षेत्र में अपनी मौजूदगी दर्ज करवायी है। दूसरे प्रकार के वे आदिवासी हैं, जिन्हें नक्सल क्षेत्र से जोड़ते हैं और इनके साथ खिलवाड़ हो रहा है। तीसरे प्रकार के  वे आदिवासी हैं, जो आज भी प्राकृतिक संसाधनों पर पूरी तरह निर्भर हैं और वे सभ्यता से कटे हुए हैं। श्री कृष्ण कुमार यादव ने अण्डमान-निकोबार द्वीप समूह में अपने प्रवास का जिक्र करते हुए वहां के आदिवासियों से जुड़े तमाम अनछुए पहलुओं की चर्चा की। उन्होने वहां की छः आदिवासी जनजातियाॅं बतायी और उनकी विलुप्त होती प्रजातियों के आंकड़ों पर प्रकाश डाला। आदिवासियों की समस्याओं एवं चुनौतियों की ओर इशारा करते हुए उनकी बोली, भाषा, संस्कृति पर मंडरा रहे संकट पर श्री यादव ने सचेत करते हुए कहा कि  आज इन जनजातियों के जीवन को बचाने के साथ-साथ इन बिखरी संस्कृतियों और इनके तत्वों को भी सहेजने की जरुरत है, अन्यथा संस्कृति और समाज की टूटन जनजातियों को राष्ट्र की मुख्य धारा से अलग ही कर देगी।

अध्यक्षीय उद्बोधन में श्री शंकरलाल मीना  ने व्यांगयात्मक भाषा में आदिवासियों की वास्तविक स्थिति को रेखांकित किया। उन्होने कहा कि आदिवासियों को पिछले कुछ समय से वनवासी कह कर पुकारा जा रहा है और उसके कद को छोटा किया जा रहा है। इन्होंने कहा कि आदिवासियों के इतिहास को लेकर प्रश्न खड़े किये जाते हैं, परन्तु क्या वर्तमान को भी नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है। इन्होंने आदिवासियों के साथ वर्तमान के परिदृश्य को उदाहरणों के माध्यम से उजागर किया। साथ ही इन्होंने कार्पोरेट जगत की झांसेबाजी एवं सरकार के विज्ञापनों की पोल खोली।

इस अवसर पर आदिवासियों से सरोकार रखती हुई  डाॅ. श्रवण कुमार मीना की ‘आदिवासी कहानी विविध सन्दर्भ’, डाॅ. मन्जू गांधी की ‘खाड़ी युद्ध में संयुक्त राष्ट्र संघ की भूमिका’ एवं आदिवासी सरोकारों को समर्पित पत्रिका "अरावली उद्घोष"  का विमोचन भी किया गया। 

इस अवसर पर चन्दनमल नवल, किशोरी लाल मीना, डाॅ रमेश चन्द्र मीना, अफगानिस्तान के मोहम्मद शफीक, यू.एस.ए. से प्रो. विधू सोनी, श्री धर्मसिंह वर्मा, श्रीमति विमला वर्मा, श्री वेदव्यास, प्रो. पूनम वावा, प्रो. कान्ता कटारिया, डाॅ. मीना बरडिया, डाॅ. यादराम मीना, डाॅ. शीतल प्रसाद मीना, प्रो. सोहन लाल मीना, डाॅ. औतार लाल मीना, डाॅ. रमा आरोड़ा, प्रो. हेमन्त शर्मा इत्यादि सहित तमाम प्राध्यापक, बुद्धिजीवी, शोध छात्र उपस्थित थे।

 उद्घाटन सत्र के अन्त में डाॅ. आर.पी. मीणा आयोजन सचिव ने सभी अथितियों का धन्यवाद ज्ञापन किया और मंच का संचालन डाॅ. निधि संधल ने किया।

                                                                      
-डाॅ. जनक सिंह मीना
संगोष्ठी निदेशक 
जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर-राजस्थान  




विश्व आदिवासी दिवस पर जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर के राजनीति शास्त्र विभाग द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार में "भारत की आदिवासी जनजातियाँ : चुनौतियाँ और संभावनाएं" विषय पर व्याख्यान देते राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक सेवाएँ कृष्ण कुमार यादव। 

आदिवासी विमर्श को समर्पित पत्रिका ''अरावली उद्घोष'' का विमोचन। 

डाॅ. श्रवण कुमार मीना की ''आदिवासी कहानी : विविध सन्दर्भ'' पुस्तक का लोकार्पण। 

आदिवासियों के बलिदान के प्रतीक ‘मानगढ धाम’ की प्रतिमा के सम्मुख द्वीप प्रजज्वलन करते राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक सेवाएं एवं साहित्यकार कृष्ण कुमार यादव 



 International Seminar on the International Day of the World's Indigenous Peoples on 9th August, 2016 at JNVU, Jodhpur

मंगलवार, 2 अगस्त 2016

नवोदय विद्यालय समिति द्वारा आयोजित संकुल स्तरीय विज्ञान व कला प्रदर्शनी का डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव ने किया उद्घाटन

विज्ञान से जनसाधारण को जोड़ने के लिए जरुरी है कि इसे किताबों के पन्नों से निकालकर व्यावहारिक रूप दिया जाये। विज्ञान-प्रौद्योगिकी और नवाचार की पहुँच समाज के अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित किया जाय। विज्ञान की विशिष्टता को सामान्य व्यक्ति से जोड़े बिना इसका विकास संभव नहीं है। उक्त उद्गार राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने नवोदय विद्यालय समिति द्वारा आयोजित संकुल स्तरीय विज्ञान एवं कला प्रदर्शनी का जवाहर नवोदय विद्यालय, तिलवासनी, जोधपुर में उद्घाटन करते हुए कहा।

मुख्य अतिथि के रूप में निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने अपने संबोधन में कहा कि, आज के युवाओं में संवेदना के साथ-साथ नए विचारों का पोषण, रचनात्मकता और जिज्ञासु परिप्रेक्ष्य विकसित करने की जरूरत है। इनकी पहल से ही समाज में वैज्ञानिक दृष्टि, जागरूकता और प्रगतिशील विचारों का विकास होगा। विज्ञान और कला में कोई विरोधाभास नहीं है, बल्कि दोनों मिलकर ही समाज में रचनात्मक दृष्टिकोण और वैज्ञानिक मनोवृत्ति पैदा कर सकते हैं।


इस अवसर पर नवोदयी विद्यार्थियों ने पर्यावरण संरक्षण, वाटर हार्वेस्टिंग, पनबिजली का प्रयोग, आर्गेनिक खेती, विद्युत बचाने, रिमोट सेंसिंग, स्वच्छता अभियान जैसे तमाम उपयोगी चीजों पर मॉडल बनाकर और सिंधु घाटी सभ्यता से लेकर राजस्थानी संस्कृति के विभिन्न पहलुओं पर प्रदर्शनी प्रस्तुत की। इस अवसर पर जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर, चूरू, पाली, झुञ्झुनू, बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ सहित राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र के दस नवोदय विद्यालय के विद्यार्थियों ने अपने मॉडल्स प्रस्तुत किए। विद्यार्थियों द्वारा बनाए गए विभिन्न मॉडल्स की प्रशंसा करते हुये श्री यादव ने कहा कि नवोदय विद्यालय का पूर्व छात्र होने के कारण नवोदयी विद्यार्थियों की मेधा पर मुझे पूर्ण विश्वास और गर्व है। ये ही कल के रमन, भाभा और कलाम  हैं। श्री यादव ने कहा कि आज तमाम नवोदयी विद्यार्थी देश-दुनिया में विभिन्न क्षेत्रों में नाम कमा रहे हैं।  

जवाहर नवोदय विद्यालय, तिलवासनी, जोधपुर के प्रधानाचार्य श्री चिंतामणि ने कहा कि विज्ञान एवं कला ने मानव जीवन के विकास एवं समृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। विद्यार्थियों को इन सबसे रूबरू कराने और  अपनी परंपराओं से जोड़ने के लिए ही इस प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है। उन्होने बताया कि इस प्रदर्शनी में चयनित उत्कृष्ट मॉडल्स को राज्य स्तरीय प्रदर्शनी के लिए आगे भेजा जाएगा।

 कार्यक्र्म के आरंभ में मुख्य अतिथि श्री यादव ने पौधारोपण कर हरियाली का संदेश दिया और फिर दीप-प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। तत्पश्चात विद्यालय की छात्राओं ने सरस्वती-गान और स्वागत-गीत प्रस्तुत किया। जवाहर नवोदय विद्यालय, तिलवासनी, जोधपुर के प्रधानाचार्य श्री चिंतामणि ने मुख्य अतिथि के रूप में श्री यादव का स्वागत करते हुए कहा कि यह गौरव का विषय है कि नवोदय विद्यालय के ही पूर्व छात्र रहे श्री कृष्ण कुमार यादव ने आज उच्च प्रशासनिक पद पर विराजमान होते हुए यहाँ छात्र-छात्राओं की हौसला-आफजाई की।

कार्यक्रम का संचालन मनोहर सिंह और आभार ज्ञापन शोहरत हुसैन ने किया। इस अवसर पर तमाम नवोदय विद्यालय के अध्यापक, विद्यार्थिगण इत्यादि मौजूद रहे।


















































शनिवार, 23 जुलाई 2016

चन्द्रशेखर आज़ाद की 110वीं जयंती : आज़ाद था, आज़ाद हूँ, आज़ाद रहूँगा !


आज चन्द्रशेखर 'आजाद' (23 जुलाई, 1906 - 27 फरवरी, 1931) की आज 110 वीं जयंती है। ऐतिहासिक दृष्टि से भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के अत्यन्त सम्मानित और लोकप्रिय स्वतंत्रता सेनानी रहे चन्द्रशेखरआज़ाद पण्डित राम प्रसाद बिस्मिल व सरदार भगत सिंह सरीखे महान क्रान्तिकारियों के अनन्यतम साथियों में से थे। 


इलाहाबाद में उनका अंतिम समय गुजरा और यहीं की मिट्टी में उन्होंने अंतिम साँस ली। आज भी कंपनी गार्डेन में लगी उनकी भव्य मूर्ति उनके जीवन को प्रतिबिंबित करती है। वाकई वो अंत तक आज़ाद ही रहे। 




अमर शहीद चन्द्र शेखर आजाद की 27 फरवरी, 1931 की अल्फ्रेड पार्क, इलाहाबाद में पुलिस से हुई मुठभेड़ में प्रयुक्त पिस्तौल जो तत्कालीन पुलिस अधीक्षक, इलाहाबाद सर जॉन नाट बावर के सौजन्य से प्राप्त हुई थी। इसे इलाहाबाद संग्रहालय में सुरक्षित रखा गया है। 
(The pistol used by Chandra Shekhar Azad when he last time spotted in the "company garden"or Alfred park called at that time renamed Chandrashekhar Azad park)

भारत की फिजाओं को सदा याद रहूँगा 
आज़ाद था, आज़ाद हूँ, आज़ाद रहूँगा !

स्वतंत्रता संग्राम के क्रन्तिकारी नायक चन्द्रशेखर आज़ाद जी की 110वीं जयंती पर उन्हें शत-शत नमन !!