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सोमवार, 7 मई 2018

भारतीय उपमहाद्वीप में साहित्य के एकमात्र नोबेल पुरस्कार विजेता रवीन्द्र नाथ टैगोर जी की जयंती


नहीं मांगता, प्रभु, विपत्ति से,
मुझे बचाओ, त्राण करो
विपदा में निर्भीक रहूँ मैं,
इतना, हे भगवान, करो।

नहीं मांगता दुःख हटाओ
व्यथित ह्रदय का ताप मिटाओ
दुखों को मैं आप जीत लूँ
ऐसी शक्ति प्रदान करो
विपदा में निर्भीक रहूँ मैं,
इतना, हे भगवान,करो।

कोई जब न मदद को आये
मेरी हिम्मत टूट न जाये।
जग जब धोखे पर धोखा दे
और चोट पर चोट लगाये -
अपने मन में हार न मानूं, 
ऐसा, नाथ, विधान करो।
विपदा में निर्भीक रहूँ मैं,
इतना, हे भगवान,करो।

नहीं माँगता हूँ, प्रभु, मेरी
जीवन नैया पार करो
पार उतर जाऊँ अपने बल
इतना, हे करतार, करो।
नहीं मांगता हाथ बटाओ
मेरे सिर का बोझ घटाओ
आप बोझ अपना संभाल लूँ
ऐसा बल-संचार करो।
विपदा में निर्भीक रहूँ मैं,
इतना, हे भगवान,करो।

सुख के दिन में शीश नवाकर
तुमको आराधूँ, करूणाकर।
औ' विपत्ति के अन्धकार में, 
जगत हँसे जब मुझे रुलाकर--
तुम पर करने लगूँ न संशय, 
यह विनती स्वीकार करो।
विपदा में निर्भीक रहूँ मैं, 
इतना, हे भगवान, करो।

- रवीन्द्रनाथ टैगोर-

आज रवीन्द्र नाथ टैगोर जी (7  मई 1861-7 अगस्त 1941) की जयंती है।  दो-दो देशों (भारत और बांग्लादेश) के राष्ट्रगान के रचयिता, आधुनिक भारत के असाधारण सृजनशील कलाकार, साहित्यकार-संगीतकार-लेखक-कवि-नाटककार-संस्कृतिकर्मी एवं भारतीय उपमहाद्वीप में साहित्य के एकमात्र नोबेल पुरस्कार विजेता टैगोर जी की 157वीं  जयंती पर शत-शत नमन !!

-कृष्ण कुमार यादव @ शब्द-सृजन की ओर 

मंगलवार, 1 मई 2018

अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस : मेहनत को पहचान मिले


मेहनत को पहचान मिले,
मजदूरों को सम्मान मिले,
जो ऊंच-नीच की खाई भर दे,
काश ऐसा कोई इन्सान मिले !!

***********
श्रमिक दिवस-मजदूर दिवस
International Labours Day

सिविल सर्विसेज में नवोदय विद्यालय के विद्यार्थी

वर्ष 2001 में जब सिविल सर्विसेज में हमारा चयन हुआ था तो उस समय सिविल सेवाओं में जवाहर नवोदय विद्यालय के विद्यार्थियों का प्रतिनिधित्व लगभग शून्य ही था। वक़्त के साथ नवोदयी विद्यार्थियों ने सिविल सेवाओं में भी अपनी सफलता के परचम फहराने आरम्भ किये और इस वर्ष 2018 में जारी रिजल्ट में विभिन्न स्रोतों से प्राप्त जानकारी के अनुसार नवोदय विद्यालय के लगभग 27 विद्यार्थी चयनित हुए हैं। वाकई हम सभी नवोदयी विद्यार्थियों के लिये गौरव के क्षण। सभी को हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं !!

Bipasha Kalita, Rank 41
JNV Moregaon Assam

Sang Priy, Rank 92
JNV Kanpur Dehat UP

Jayendra Kumar, Rank 150
JNV Mahoba UP

Dr Jitendra Kumar Yadav, Rank 170
JNV Raigarh Chattisgarh

VijayPal Bishnoi, Rank 290
JNV Bikaner Rajasthan

Kumar Deepak, Rank 338
JNV Samastipur, Bihar

Rajeev Kumar Choudhary, 371
JNV Alwar Rajasthan

Jag Pravesh, Rank 483
JNV Dausa Rajasthan

Pradeep Kumar Dwivedi, Rank 491
JNV Chatarpur MP

Yogesh Patel, Rank 571
JNV Mahasamund Chattisgarh

Mukesh Kumar Lunayat, Rank 587
JNV Jaipur Rajasthan

Sujit Kumar Bharti, Rank 588
JNV Madhubani Bihar

Akshay Kumar Terawal, Rank 615
JNV Betul MP

Preetham S. Rank 654
JNV Chikmanglur Karnataka

Dr Manoj Chaudhary, Rank 675
Alumnus JNV Basti UP.

Jagdish Prasad Meena, Rank 685
JNV Jaipur Rajasthan

Chetan Meghraj Shelke, Rank 781
JNV Nashik Maharashtra

Urwashi KUmari, Rank 788
JNV Muzaffarpur Bihar

Santosh Kumar Meena, Rank 856
JNV Dausa Rajasthan

Yogesh Kumar Meena, Rank 874
JNV Alwar Rajasthan

Vanya Are, Rank 916
JNV Karnool AP

Samay Singh Meena, Rank 919
JNV Dausa Rajasthan

Sudhanshu Nayak, Rank 931
JNV Gorakhpur UP

Supriya Ghaytadak, Rank 961
JNV Aurangabad Maharashtra

Rajkesh Meena, Rank 971
JNV Dausa Rajasthan

Ajeet Singh Meena, Rank 972
JNV Jaipur Rajasthan

Sangeeta Meena, Rank 973
#JNV Jaipur Rajasthan

@ Krishna Kumar Yadav

मंगलवार, 17 अप्रैल 2018

जोधपुर में साहित्यकार व लेखक

जोधपुर की धरती कहने को तो मरुस्थली है, पर साहित्यिक-सांस्कृतिक रूप से काफी समृद्ध है। यहाँ आने पर तमाम साहित्यकारों से मुलाकात हुई। हाल ही में हमारे आवास पर हुई एक मुलाकात की ग्रुप फोटो : प्रसिद्ध समालोचक और संपादक डॉ. रमाकांत शर्मा, रिटायर्ड जज और वरिष्ठ साहित्यकार श्री मुरलीधर वैष्णव, वरिष्ठ लेखक डॉ. हरिदास व्यास, चर्चित कवयित्री व लेखिका डॉ. पद्मजा शर्मा, चर्चित ब्लॉगर लेखिका आकांक्षा यादव, साहित्यकार व ब्लॉगर कृष्ण कुमार यादव, निदेशक डाक सेवाएं, राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर, और प्यारी बेटियाँ नन्ही ब्लॉगर और राष्ट्रीय बाल पुरस्कार विजेता अक्षिता (पाखी) और अपूर्वा। 

जोधपुर में एक आत्मीय मुलाकात

नए शहर में जाइए तो तमाम नए लोगों से मुलाकात होती है। प्रशासन से लेकर साहित्य-कला-संस्कृति में अभिरुचि रखने वालों से। इनमें से कई ऐसे होते हैं, जिनकी रचनाधर्मिता से हम अक्सर रूबरू होते हैं, पर मुलाकात का कोई सुयोग नहीं बना होता है। सोशल मीडिया और वर्चुअल लाइफ से परे इसी क्रम में जोधपुर में मुलाकात हुई रिटायर्ड जज और वरिष्ठ साहित्यकार श्री मुरलीधर वैष्णव जी से। उम्र के इस पड़ाव पर भी आपकी सक्रियता देखते बनती है। बेहद आत्मीय और संवेदनशील व्यक्तित्व !!

भारत के आदिवासी : चुनौतियाँ एवं सम्भावनाएँ

वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित पुस्तक "भारत के आदिवासी : चुनौतियाँ एवं सम्भावनाएँ" प्राप्त हुई। इस पुस्तक में मेरा लेख "अस्तित्व के लिए जूझते अण्डमान-निकोबार के आदिवासी" भी शामिल है। पुस्तक के सम्पादक डॉ. जनक सिंह मीना, असिस्टेंट प्रोफेसर, जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर एवं जनरल सेक्रेटरी, न्यू पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन सोसायटी ऑफ़ इण्डिया ने इस पुस्तक में काफी श्रम किया है। 243 पृष्ठों की इस पुस्तक में आदिवासी विमर्श पर कुल 23 लेख समाहित हैं।




बुधवार, 24 जनवरी 2018

भारत सरकार के राजभाषा विभाग की पत्रिका "राजभाषा भारती" भी हुई साहित्यिक चोरी का शिकार

हिंदी साहित्य में आजकल रचनाओं की चोरी धड़ल्ले से हो रही है। इसका सबसे आसान जरिया बना है इंटरनेट, जहाँ आपकी रचना के प्रकाशन या सोशल मीडिया पर आपके मौलिक विचारों के प्रस्फुटन के साथ ही कुछेक साहित्यिक चोर धड़ल्ले से उन्हें कॉपी-पेस्ट कर अपने नाम से अन्यत्र प्रकाशित करवा साहित्यकार और लेखक होने का दम्भ भरने लगते हैं। ऐसे लोग एक जगह पकड़े जाते हैं, उनकी लानत-मलानत होती है...पर अपनी आदत से मजबूर फिर वही कार्य दोहराने लगते हैं।
उज्जैन (मध्यप्रदेश) के एक तथाकथित साहित्यकार  डॉ. प्रभु चौधरी ने सितंबर, 2016 में मेरे (कृष्ण कुमार यादव) एक लेख "विदेशों में भी पताका फहरा रही है हिंदी" को शीर्षक में कुछ बदलाव कर "विश्व में भी अपनी पहचान बना रही है हिंदी" शीर्षक से अपने नाम से जबलपुर से प्रकाशित "प्राची" पत्रिका के सितंबर अंक में प्रकाशित कराया था।  सबसे रोचक बात तो यह रही कि 'प्राची' पत्रिका में ही 4 वर्ष पूर्व मेरा यह लेख प्रकाशित हो चुका था। खैर, पत्रिका के संपादक श्री राकेश भ्रमर ने अगले महीने ही संपादकीय में इस तथाकथित साहित्यकार डॉ. प्रभु चौधरी की जमकर क्लास ली और यह घोषित भी किया कि उसकी रचनाएँ पत्रिका में अब प्रकाशित नहीं की जाएँगी। 

 और अब पुनः मेरे  (कृष्ण कुमार यादव) उसी लेख "विदेशों में भी पताका फहरा रही है हिंदी" को उक्त डॉ. प्रभु चौधरी ने भारत सरकार के राजभाषा विभाग द्वारा प्रकाशित पत्रिका राजभाषा भारती के अप्रैल-जून 2017 अंक में अपने नाम से प्रकाशित कराया है। ऐसी निर्लज्जता पर क्या कहा जाए ? इस प्रकार के साहित्यिक डॉक्टरों का क्या इलाज है ?? 
ख़ैर, इस मामले को जब हमने सोशल मीडिया पर शेयर किया और तमाम साहित्यिक मित्रों से भी इसकी चर्चा की व साथ में राजभाषा भारती पत्रिका के संपादक को भी लिखा तो उक्त डॉ. प्रभु चौधरी का माफ़ीनामा आया 

..........आप भी देखिए, कहीं प्रभु चौधरी जैसे चोर लेखक आपकी रचनाओं और विचारों को अपने नाम से प्रकाशित करवा अपनी पीठ न थपथपा रहे हों !! 

मंगलवार, 16 जनवरी 2018

'अन्‍ना', 'अच्‍छा', 'अब्‍बा' और सूर्य नमस्‍कार समेत भारतीय भाषाओं के 70 शब्‍द ऑक्‍सफोर्ड ड‍िक्‍शनरी में शामिल

ऑक्सफर्ड के ताजा संस्करण में भारतीय इंग्लिश के 70 नए शब्द जोड़े गए हैं. डिक्‍शनरी में पहले से इसके 900 शब्‍द हैं. अब दुनिया भर के लोग 'अन्‍ना', 'अच्‍छा', 'सूर्य नमस्‍कार' और 'अब्‍बा' जैसे शब्‍दों को जान पाएंगे. दरअसल, पिछले महीने जारी ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी के नए संस्करण में तेलुगू, उर्दू, तमिल, हिंदी और गुजराती भाषा के करीब 70 नए शब्दों को जोड़ा गया है.

वैसे ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में पहले से 'अन्‍ना' शब्द संज्ञा  के रूप में मौजूद है. इसका अर्थ पाकिस्तान और भारत में प्रचलित मौद्रिक इकाई से है, जो एक रुपये का 1/16 हिस्सा होता है. अब 'अन्‍ना 2' को डिक्शनरी में शामिल किया गया है, जिसका मतलब बड़ा भाई है. तमिल और तेलुगू में किसी व्यक्ति को सम्मान देने के लिए अन्‍ना शब्द का इस्तेमाल किया जाता है.

यही नहीं ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में उर्दू शब्द 'अब्बा' को भी शामिल किया गया है, जिसका मतलब पिता होता है. इसके अलावा डिक्शनरी में हिंदी के 'अच्छा', 'बड़ा दिन', 'बच्चा', 'सूर्य नमस्कार' शब्द भी शामिल किए गए हैं. हिंदी शब्द 'अच्छा' का अर्थ 'ओके' पहले से ही डिक्शनरी में मौजूद लेकिन नए एडिशन में जुड़े इस शब्द का मतलब आश्चर्य, संदेह और खुशी जाहिर करने वाली भावना से होगा.

ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में हिंदी शब्दों को तरजीह, 'चना' और 'चना दाल' को मिली जगह

ऑक्सफर्ड द्वारा जारी नोट के अनुसार, 'ऑक्सफर्ड के ताजा संस्करण में भारतीय इंग्लिश के 70 नए शब्द जोड़े गए हैं. डिक्‍शनरी में पहले से इसके 900 शब्‍द हैं. भारतीय भाषा में शिष्टाचार के संबंध में पारिवारिक रिश्तेदारी और पते के संबंध में एक जटिल शब्दकोश है, जिसमें उम्र, जेंडर और रिश्तेदारी के अलग-अलग शब्दों के समकक्ष अंग्रेजी में कोई शब्द नहीं होने की वजह से विशेष शब्दावली के रूप में इन्हें मार्क किया गया है.'

गौरतलब है कि ऑक्‍सफोर्ड इंग्लिश ड‍िक्‍शनरी साल में चार बार मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर में अपडेट होती है. ऑक्‍सफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रेस नोट के मुताबिक सितंबर 2017 में जो अपडेट हुआ है उसमें एक हजार नए शब्‍दों को शामिल किया गया है.

मंगलवार, 12 दिसंबर 2017

सृजन सेवा संस्थान, श्री गंगानगर द्वारा डाक निदेशक व साहित्यकार कृष्ण कुमार यादव को "सृजन साहित्य सम्मान"

साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान, समर्पण भाव एवं निरंतर साधना द्वारा समाज को अविरल योगदान देने हेतु चर्चित ब्लॉगर और साहित्यकार एवं सम्प्रति राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव को 3 दिसंबर को सृजन सेवा संस्थान, श्री गंगानगर, राजस्थान द्वारा "सृजन साहित्य सम्मान" से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उन्हें शाल ओढ़ाकर तथा सम्मान पत्र एवं साहित्य भेंट करके सम्मानित किया गया। कार्यक्रम अध्यक्ष श्री कश्मीरी लाल जसूजा, विशिष्ट अतिथि श्री विजेंद्र शर्मा  और  सृजन सेवा संस्थान, अध्यक्ष डॉ. कृष्ण कुमार 'आशु' ने उन्हें शाल ओढ़ाकर तथा सम्मान पत्र एवं साहित्य भेंट करके सम्मानित किया।
संस्थान के अध्यक्ष डॉ. कृष्ण कुमार 'आशु' ने कहा कि प्रशासनिक दायित्वों के साथ-साथ साहित्य सृजन और ब्लॉगिंग  के क्षेत्र में श्री कृष्ण कुमार यादव का योगदान महत्वपूर्ण है। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में अनवरत प्रकाशित होने के साथ-साथ, अब तक आपकी  7 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। देश-दुनिया में शताधिक सम्मानों से विभूषित श्री यादव एक लंबे समय से ब्लॉग और सोशल  मीडिया के माध्यम से भी हिंदी साहित्य एवं विविध विधाओं में अपनी रचनाधर्मिता को प्रस्फुटित करते हुये अपनी व्यापक पहचान बना चुके हैं।
इस अवसर पर "लेखक से मिलिए" कार्यक्रम में श्री कृष्ण कुमार यादव ने अपनी सृजन यात्रा की चर्चा करते हुए विभिन्न विधाओं में रचना पाठ भी किया। श्री यादव ने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और प्रशासनिक व्यस्तताओं के बीच साहित्य ऑक्सीजन का कार्य करता है।  साहित्य न सिर्फ लोगों को संवेदनशील बनाता है बल्कि यह  जन सरोकारों से जुड़ने का प्रबल माध्यम भी है। क्लिष्ट भाषा और रूपकों में बँधी रचनात्मकता की बजाय उन्होंने  सहज भाषा पर जोर दिया, ताकि आम आदमी भी उसमें निहित सरोकारों को समझ सके। 
श्री यादव ने अपनी रचना प्रक्रिया के बारे में कहा कि उनकी रचनाओं के पात्र हमारे आस-पास ही मौजूद हैं। मैं जो आसपास देखता हूं, महसूस करता हूं, उसे कागज पर उतारने का प्रयास भी करता हूं। कविता को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि न तो उन्हें शब्द ढ़ूंढ़-ढ़ूंढकर बनाई गई, बिंब-प्रतीकों के नाम पर भारी-भरकम कविता पसंद है और न ही आजकल सुबह सवेरे वाट्सएप और फेसबुक पर लगाई जाने वाली कविता। उन्हें तो वही कविता अच्छी लगती है जो आम आदमी की बात को आम आदमी तक पहुंचाती है।
सोशल मीडिया और हिंदी साहित्य के अंतर्संबंधों पर श्री कृष्ण कुमार यादव ने  कहा कि यहाँ भी  हिंदी साहित्य तेजी से विस्तार पा रहा है, पर कई बार इसमें तात्कालिकता का पुट और गंभीरता का अभाव दिखता है। लोग फेसबुक और वाट्सएप पर अपनी रचनाएं साझा करके तत्काल प्रशंसा भी चाहते हैं। बिना पढ़े रचनाओं को लाइक करने और कमेंट करने की प्रवृत्ति पर भी उन्होंने सचेत किया। ऐसे लोगों में मैं तुम्हें पंत कहूं, तुम मुझे निराला कहो की प्रवृति बढ़ती जा रही है। यह साहित्य के लिए बेहद खतरनाक है। श्री यादव ने कहा कि फोटोग्राफी में सेल्फी भले ही अब आई है लेकिन साहित्य में इसका चलन बहुत पहले से है। हर कोई खुद की बात करना चाहता है, खुद की ही चर्चा सुनना चाहता है। पर जरुरत गंभीर अध्ययन और चिंतन की है, ताकि साहित्य में नए आयाम जुड़ सकें।  

विशिष्ट अतिथि के रूप में बीएसएफ, जोधपुर के डिप्टी कमांडेंट और दोहाकार श्री विजेंद्र शर्मा ने कहा कि साहित्य का मूल संवेदना है और कृष्ण कुमार जी  की रचनाओं की विशेषता उनकी संवेदनाओं से झलकती है। कविता केवल सच नहीं होता। उसका शिल्प और शैली भी प्रभावित करते हैं। इस मामले में आपकी  रचनाएं हर कसौटी पर खरी उतरती हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए श्री अरोड़वंश समाज के पूर्व अध्यक्ष एवं समाज सेवी श्री कश्मीरी लाल जसूजा ने कहा कि कविता आदमी को सही दिशा की ओर अग्रसर करती है।
कार्यक्रम में डाक अधीक्षक श्रीगंगानगर गोपीलाल माली, डा. अरुण शहैरिया ताइर, सुरेंद्र सुंदरम, कृष्ण वृहस्पति, डॉ. सन्देश त्यागी, दीनदयाल शर्मा, दुष्यंत शर्मा, ओपी वैश्य, मनी राम सेतिया, रंगकर्मी भूपेन्द्रसिंह, हरविंद्रसिंह, राकेश मोंगा, दीपक गडई सहित अनेक साहित्यकार एवं बुद्धिजीवी मौजूद रहे। 
साभार:










सृजन सेवा संस्थान, श्री गंगानगर, राजस्थान  द्वारा लेखक से मिलिए कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार व् ब्लॉगर कृष्ण कुमार यादव



साभार


सोमवार, 20 नवंबर 2017

ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी पहली बार घोषित करेगी 'साल का लोकप्रिय हिंदी शब्द'

दुनिया में  हिन्दी के तेजी से बढ़ते रुतबे को अब ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी ने भी स्वीकार कर लिया है। हाल के वर्षों में हिंदी के कई शब्द ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में शामिल किये गए हैं, पर अब इससे भी एक कदम आगे बढ़कर विश्व का प्रतिष्ठित शब्दकोष ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी पहली बार 'साल का लोकप्रिय हिंदी शब्द' घोषित करने की पहल भी करने जा रहा है। साल 2017 के लिए लोकप्रिय हिंदी शब्द का चयन किया जाएगा और इस शब्द की घोषणा जनवरी 2018 में होगी। 

इस लोकप्रिय हिंदी शब्द के चयन के लिए कुछेक मानक भी निर्धारित किये गए हैं। यह हिंदी शब्द कोई ऐसा शब्द या अभिव्यक्ति का स्वरूप होगा जिसे इस साल लोगों के बीच बहुत पसंद किया गया हो।  चयनित शब्द को साल भर के लोकाचार, मनोभाव और मानसिक व्यस्ताताओं को दर्शाने वाला होना चाहिए।  यह आवश्यक नहीं कि यह कोई नया शब्द हो लेकिन इसका किसी भी तरह 2017 से बहुत मजबूत संबंध होना चाहिए। 
ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी ने देशभर के हिंदी बोलने वालों से इस शब्द के चयन में मदद करने का आह्वान किया है।  इसके लिए 29 नवंबर से पहले प्रविष्टियां भेजनी हैं। आम लोगों से सुझाव लेने के बाद इस शब्द का चयन ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस के हिंदी शब्दकोश दल द्वारा किया जाएगा और  साथ ही एक भाषा विशेषज्ञों  की समिति भी इस काम में मदद करेगी।  इस समिति में लेखक-प्रकाशक नमिता गोखले, भारतीय भाषा विशेषज्ञ कृतिका अग्रवाल, पत्रकार सौरभ द्विवेदी, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस इंडिया की वरिष्ठ संपादकीय प्रबंधक मलिका घोष और रांची विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर पूनम निगम सहाय शामिल हैं। 

बुधवार, 1 नवंबर 2017

डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव और पत्नी आकांक्षा यादव 'शब्द निष्ठा सम्मान' से सम्मानित

हिंदी लघुकथा को समृद्धि प्रदान करने हेतु राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक सेवाएं कृष्ण कुमार यादव और उनकी पत्नी आकांक्षा यादव को अजमेर में शब्द निष्ठा सम्मान-2017 से सम्मानित किया गया। यादव दम्पति एक लम्बे समय से साहित्य और लेखन में सक्रिय हैं।  विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होने के साथ-साथ, अब तक  कृष्ण कुमार यादव की 7 पुस्तकें और नारी सम्बन्धी मुद्दों पर प्रखरता से लिखने वालीं आकांक्षा यादव की 3 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। देश-दुनिया में शताधिक सम्मानों से विभूषित यादव दम्पति एक लंबे समय से ब्लॉग और सोशल  मीडिया के माध्यम से भी हिंदी साहित्य एवं विविध विधाओं में अपनी रचनाधर्मिता को प्रस्फुटित करते हुये अपनी व्यापक पहचान बना चुके हैं।
संयोजक डॉ. अखिलेश पालरिया ने बताया कि आचार्य रत्न लाल  'विद्यानुग' स्मृति अखिल भारतीय लघुकथा प्रतियोगिता हेतु देशभर के 17 राज्यों से 170 लघुकथाकारों  की कुल 850 लघुकथाएँ प्राप्त हुई थीं, जिनमें से श्रेष्ठ लघुकथाओं को चयनित कर लघुकथाकारों को सम्मानित किया गया।  यह सम्मान प्रतिवर्ष साहित्य की भिन्न-भिन्न विधाओं पर दिया जाता है। शब्द निष्ठा सम्मान 2017 श्रेष्ठ लघु कथाओं के लिए निर्धारित था। सम्मान के तहत चयनित लघुकथाकारों को मान पैलेस अजमेर में संपन्न अखिल भारतीय लघुकथा सम्मान समारोह  में प्रशस्ति पत्र, कथा संग्रह एवं सम्मान निधि देकर सम्मानित किया। 
यादव दंपती को 'शब्द निष्ठा सम्मान' 

डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव और पत्नी आकांक्षा यादव  को मिला 'शब्द निष्ठा सम्मान' 





डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव और पत्नी आकांक्षा यादव  'शब्द निष्ठा सम्मान' से सम्मानित