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शुक्रवार, 13 जून 2008

माँ

मेरा प्यारा सा बच्चा
गोद में भर लेती है बच्चे को
चेहरे पर नज़र न लगे
माथे पर काजल का टीका लगाती है
कोई बुरी आत्मा न छू सके
बांहों में ताबीज बाँध देती है


बच्चा स्कूल जाने लगा है
सुबह से ही माँ जुट जाती है
चौके -बर्तन में
कहीं बेटा भूखा न चला जाए

लड़कर आता है पडोसियों के बच्चों से
माँ के अंचल में छुप जाता है
अब उसे कुछ नही हो सकता

बच्चा बड़ा होता जाता है
माँ मन्नते मांगती है
देवी- देवताओं से
बेटा के सुनहरे भविष्य की खातिर
बेटा कामयाबी पता है
माँ भर लेती है उसे बांहों में
अब बेटा नज़रों से दूर हो जाएगा

फिर एक दिन आता है
शहनाईयां गूंज उठती हैं
माँ के कदम आज जमीं पर नही
कभी इधर दौड़ती है कभी उधर
बहू के क़दमों का इंतजार है उसे
आशीर्वाद देती है दोनों को
एक नयी जिन्दगी की शुरुआत के लिए

माँ सिखाती है बहू को
परिवार की परम्पराएँ और संस्कार
बेटे का हाथ बहू के हाथों में रख
बोलती है
बहुत नाज़ से पला है इसे
अब तुम्हें ही देखना है

माँ की खुशी भरी आँखों से
आंसू की एक गरम बूँद
गिरती है बहू की हथेली पर।
***कृष्ण कुमार यादव***

7 टिप्‍पणियां:

hindi.literature ने कहा…

Maa ke prati itni samanvit kavita pahli bar dekhi aur padhi hai...badhaiyan!

Rashmi Singh ने कहा…

माँ व्यक्ति के जीवन का सबसे पवित्र और महान रिश्ता है. यह जीवन की बुनियाद है. माँ पर बहुतों ने कलम चलायी है, पर आपने जिस तरह से माँ की बच्चे के प्रति सोच और भावनाओं को शब्द दिए हैं, अद्भुत है. आपके एक-एक शब्द माँ के प्रति प्रेम से ओत-प्रोत हैं ........इस कविता के लिए आपको ढेर सारी बधाइयाँ. कुछ पंक्तियां तो वाकई दिल को छू जा जाती हैं-
लड़कर आता है पडोसियों के बच्चों से
माँ के अंचल में छुप जाता है
अब उसे कुछ नही हो सकता
..........................
शहनाईयां गूंज उठती हैं
माँ के कदम आज जमीं पर नही
कभी इधर दौड़ती है कभी उधर
....................
माँ सिखाती है बहू को
परिवार की परम्पराएँ और संस्कार
.........................
आंसू की एक गरम बूँद
गिरती है बहू की हथेली पर।
.......................

बेनामी ने कहा…

Bahut2 badhai krishna kumar ji.Maa kavita ko padhkar meri ankhon se ansu nikal pade. dil ko chhune wali aisi kavita ek lambe antral ke bad padhne ko mili!!!!

Ram Shiv Murti Yadav ने कहा…

क्या भाव हैं इस कविता में. ऐसे लगता है मानो पूरे जीवन को एक माला में पिरोकर रख दिया हो. ये पंक्तियाँ बड़ी मर्मस्पर्शी हैं -
माँ की ख़ुशी भरी आँखों से
आंसू की एक गरम बूँद
गिरती है बहू कि हथेली पर.

Ratnesh ने कहा…

बड़ी खूबसूरत कविता है. दिल को छू जाती है.

Akanksha ने कहा…

माँ दुनिया का सबसे पवित्र रिश्ता है. अपनी इस कविता में के.के. जी ने माँ और बच्चे के संबंधों का बड़ा रोचक और सारगर्भित चित्र खींचा है. हर पल को उन्होंने जिस तरह शब्दों में ढाला है, वह माँ-बच्चे का शाश्वत सौन्दर्य बनकर प्रस्तुत हुआ है.

Dr. Brajesh Swaroop ने कहा…

I have no any words for such a nice poem on Maan...Keep it up Krishna.