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मंगलवार, 24 सितंबर 2013

हिंदी में वैश्विक भाषा बनने की क्षमता

भारतीय संस्कृति को अक्षुण्ण रखने में हिंदी का बहुत बड़ा योगदान है। जरूरत इस बात की है कि हम इसके प्रचार-प्रसार और विकास के क्रम में आयोजनों से परे अपनी दैनिक दिनचर्या से भी जोड़ें। हिन्दी-पखवाड़ा के अवसर पर पोस्टमास्टर जनरल, इलाहाबाद परिक्षेत्र कार्यालय में ’’बदलते परिवेश में हिन्दी की भूमिका’’ विषय पर 20 सितम्बर 2013 को  आयोजित संगोष्ठी में  इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं एवं चर्चित ब्लागर व साहित्यकार कृष्ण कुमार यादव  ने कहा कि हिंदी में वैश्विक भाषा बनने की पूरी क्षमता है और आज 150 से अधिक विश्वविद्यालयों में हिन्दी पढ़ाई जा रही है। विज्ञान-प्रौद्योगिकी से लेकर तमाम विषयों पर हिन्दी की किताबें अब उपलब्ध हैं, क्षेत्रीय अखबारों का प्रचलन बढ़ा है, इण्टरनेट पर हिन्दी की बेबसाइटों में बढ़ोत्तरी हो रही है, सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की कई कम्पनियों ने हिन्दी भाषा में परियोजनाएं आरम्भ की हैं । गूगल से हिन्दी में जानकारियाँ धड़ल्ले से खोजी जा रही हैं।

 श्री यादव ने कहा कि पहले जहाँ तमाम फाण्ट के चलते हिन्दी का स्वरूप एक जैसा नहीं दिखता था, वहीं वर्ष 2003 में यूनीकोड हिंदी में आया और इसके माध्यम से हिन्दी को अपने विस्तार में काफी सुलभता हासिल हुई। उन्होंने  कहा कि इंटरनेट के इस दौर में महत्वपूर्ण हिन्दी किताबों के ई प्रकाशन के साथ-साथ तमाम हिन्दी पत्र-पत्रिकाएं भी अपना ई-संस्करण जारी कर रही हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर  हिन्दी भाषा व साहित्य को नए आयाम मिले हैं। श्री यादव ने हिंदी-दिवस की आलोचना करने वालों को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि, जब लोग जन्मदिन मनाते हैं, नवरात्र मनाते हैं, अष्टमी-पूजन करते हैं तो फिर सवाल नहीं उठता। लेकिन जब  हिंदी को लेकर उत्सव मनते हों तो लोग कहते हैं यह खाना-पूर्ति है, इस सोच से बाहर निकलने की जरुरत है।

कार्यक्रम की  अध्यक्षता कर रहे प्रवर डाक अधीक्षक, इलाहाबाद मंडल श्री रहमतउल्लाह ने कहा कि हिंदी हमारी मातृ भाषा के साथ-साथ राजभाषा भी है और लोगों तक पहुँच स्थापित करने के लिए टेक्नॅालाजी स्तर पर इसका व्यापक प्रयोग करने की जरूरत है। 

कार्यक्रम के आरंभ में अपने सम्बोधन में सहायक निदेशक (हिंदी) टी. बी. सिंह ने इस बात पर प्रसन्नता जाहिर कि निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव स्वयं हिन्दी के सम्मानित लेखक और साहित्यकार हैं, ऐसे में डाक विभाग में राजभाषा हिन्दी के प्रति लोगों को प्रवृत्त करने में उनका पूरा मार्गदर्शन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि राजभाषा हिंदी अपनी मातृभाषा है, इसलिए इसका सम्मान करना चाहिए और बहुतायत में प्रयोग करना चाहिए। 

सहायक डाक अधीक्षक विनय कुमार ने कहा कि हिंदी को भाषा के साथ-साथ प्रयोजनीयता से भी जोड़ने की जरूरत है। डाक निरीक्षक ए. के. सिंह ने कहा कि, हिंदी साहित्य के साथ-साथ बोलचाल की भी भाषा है अतः इसे सरलीकरण रूप में आगे बढ़ाने की जरूरत है। 

इस अवसर पर डाक निरीक्षक दीपक कुमार, विनीत टन्डन, पंकज मौर्य, विक्रम सिंह, कु0 लक्ष्मी सहित तमाम कर्मचारियों ने अपने विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम में स्वागत भाषण सहायक निदेशक (राज भाषा) श्री टी बी सिंह आभार सहायक निदेशक तृतीय श्री तेज बहादुर सिंह व कार्यक्रम का संचालन श्री बृजेश कुमार शर्मा, निरीक्षक डाक द्वारा किया गया। 



इस अवसर पर निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने हिंदी पखवाड़े के दौरान आयोजित प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित भी किया। इनमें टंकण प्रतियोगिता में सर्वश्री विनीत टन्डन, राजेन्द्र प्रसाद, जगदीश कुशवाहा, निबन्ध प्रतियोगिता में अजय प्रकाश, स्वप्न कुमार, आर के श्रीवास्तव व हिंदी स्लोगन में जगदीश कुशवाहा, इजलेश कुमार, रामबहादुर ने क्रमशः प्रथम, द्वितीय व तृतीय पुरस्कार प्राप्त किया।

हिन्दी-पखवाड़ा के अवसर पर पोस्टमास्टर जनरल, इलाहाबाद परिक्षेत्र कार्यालय में ’’बदलते परिवेश में हिन्दी की भूमिका’’ विषय पर एक संगोष्ठी एवं विजेताओं को पुरस्कृत करने का कार्यक्रम 20 सितम्बर 13 को आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं एवं चर्चित ब्लागर व साहित्यकार कृष्ण कुमार यादव उपस्थित थे। कार्यक्रम के आंरभ में प्रवर डाक अधीक्षक, इलाहाबाद मंडल श्री रहमतउल्लाह ने श्री यादव का शाल ओढ़ाकर व स्मृति चिन्ह देकर स्वागत किया।

प्रस्तुति- तेजबहादुर सिंह, सहायक निदेशक (राजभाषा) कार्यालय-पोस्टमास्टर जनरल, इलाहाबाद परिक्षेत्र, इलाहाबाद.

(हिन्दुस्तान, 21 सितम्बर 2013 )
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