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बुधवार, 10 अगस्त 2011

अपने जन्मदिन का खुशनुमा अहसास...

आज मेरा जन्मदिन है। वाकई इस दिन का महत्त्व भी है, आखिर यह दिन न होता तो फिर दुनिया में कैसे आते. जन्मदिन खुशियाँ भी देता है तो कई बार चिंता में भी डाल देता है कि एक साल और गुजर गए. खैर यही जीवन-चक्र है. आज भी स्कूल के वो दिन याद आते हैं, जब हम साथियों को टाफियाँ बाँटकर जन्म दिन मनाया करते थे। कई बार स्कूल की प्रातः सभा में यह ऐलान भी किया जाता कि आज फलां का जन्मदिन है। कई दोस्त तो सरप्राइज देने के लिए अपने हाथों से बना ग्रीटिंग कार्ड भी सामूहिक रूप से देते थे। जब हम जवाहर नवोदय विद्यालय, जीयनपुर- आजमगढ़ में पढ़ते थे तो कुछ ऐसे ही बर्थडे मनाते थे। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पढ़ने के लिए आये तो बर्थडे का मतलब होता-किसी थियेटर में जाकर बढ़िया फिल्म देखना और शाम को मित्रों के साथ जमकर चिकन-करी खाना। हर मित्र इन्तजार करता कि कब किसी का बर्थडे आये और उसे बकरा बनाया जाय। बर्थडे केक जैसी चीजें तो एक औपचारिकता मात्र होती। ऐसे दोस्त-यार बड़ी काम की चीज होते, जिनकी कोई गर्लफ्रेन्ड होती। ऐसे लोग बर्थडे की शोभा बढ़ाने के लिए जरूर बुलाये जाते। वो बन्धुवर तो हफ्तेभर पहले से ही दोस्तों को समझाता कि यार ध्यान रखना अपनी गर्लफ्रेण्ड के साथ आ रहा हूँ। मेरी इज्जत का जनाजा न निकालना। कुछ भी हो उन बर्थडे का अपना अलग ही मजा था।



जब सरकारी सेवा में आया तो बर्थडे का मतलब भी बदलता गया।



बर्थडे बकायदा एक त्यौहार हो गया और उसी के साथ नये-नये शगल भी पालते गये। बर्थडे केक, रंग-बिरंगे गुब्बारे, खूबसूरत और मंहगे गिफ्ट, किसी बढ़िया होटल का लजीज डिनर और इन सबके बीच सुन्दर परिधानों मे सजा हुआ व्यक्तित्व...कब जीवन का अंग बन गया, पता ही नहीं चला। पहले कभी किसी मित्र या रिश्तेदार का जन्मदिन पर भेजा हुआ ग्रीटिंग कार्ड मिलता था तो बड़ी आत्मीयता महसूस होती थी, पर अब तो सुबह से ही एस0एम0एस0, ई-मेल, फेसबुक पर संदेशों और आरकुटिंग स्क्रैप्स की बौछार आ जाती है। कई लोग तो एक ही मैसेज स्थाई रूप से सेव किये रहते हैं, और ज्यों ही किसी का बर्थडे आया उसे फारवर्ड कर दिया। कभी एक अदद गुलाब ही बर्थडे के लिए काफी था पर अब तो फूलों का पूरा गुच्छा अर्थात बुके का जमाना है। अगली सुबह जब इन बुके को देखिये तो उनका मुरझाया चेहरा देखकर पिछला दिन याद आता है कि कितनी दिल्लगी से ये प्रस्तुत किये गये थे।



वाकई जन्मदिन भी बड़ी आत्मीय चीज है. कई बार यह मुड़कर देखने को मजबूर भी करती है कि पिछले सालों का लेखा-जोखा लिया जाय. पर कुछ भी हो, इस दिन से जुडी इतनी यादें जेहन में बसी हैं कि यह दिन कभी भी नहीं भूल पाता. आप सभी लोगों की आत्मीयता, प्यार और स्नेह हर दिन को और भी खुशनुमा बनाते हैं !!


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