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शुक्रवार, 30 जुलाई 2010

खुशियों का दिन : जन्मदिन आकांक्षा का





आज का दिन बहुत महत्वपूर्ण है हमारे लिए। आज ही के दिन ईश्वर ने हमारी जीवन साथी आकांक्षा जी को इस दुनिया में भेजा था. वैसे कभी सोचा है कि हर किसी के लिए ईश्वर एक न एक पसंद बनाकर रखते हैं. तभी तो कहते हैं शादियाँ स्वर्ग में तय होती हैं. मैं भी शादी से पहले इसे नहीं मानता था, तब लगता था सफलता मिलेगी, अच्छे रिश्ते आपने आप मिलेंगे. खैर मैं सौभाग्यशाली लोगों में था. सरकारी सेवा में आने के 9 साल बाद , अब भी किस ऐसे मित्रों को देखता हूँ जो सौभाग्यशाली नहीं हैं. 2-3 साल पहले तो अपने एक मित्र जो एक जिला के कलेक्टर भी थे, शादी के लिए बहुत परेशान थे. चूँकि उनकी ऊंचाई थोड़ी कम थी, सो कोई अपनी आगामी पीढियां उस तरह की नहीं देखना चाहता था. भाई जी दिन भर कलेक्टरी करते और शाम को शादी के सपने देखते....जब सलेक्सन हुआ था तो दरवाजे पर लाल-नीली बत्तियों वालों का हुजूम था, पर जनाब तो टरकाते गए अभी दो साल बाद. दो साल बाद दो रिजल्ट निकल चुके थे और कुंवारी लड़कियों की शादी हो गई. भाई साहब फ्लैश-बैक में चले गए. अब जाकर कहीं एक लड़की ढूंढ़ पाए हैं....ऐसे न जाने कितने वाकये समाज में हैं. पर वो लोग नसीब वाले हैं जिन्हें जीवन साथी के रूप में अच्छे लोग मिलते हैं. मैं भी अपने को उनमें से एक समझता हूँ और सौभाग्यवश आज मेरी जीवन-संगिनी आकांक्षा जी का जन्म-दिन भी है. दिन भी बढ़िया है, दो दिन की छुट्टियाँ और हाँ, आज तो सैलरी-डे भी था. फिर क्या सोचना, ईश्वर मेहरबान हैं. पत्नी आकांक्षा और बिटिया अक्षिता को जितनी खुशियाँ दे सकूँ...वही आज की उपलब्धि होगी. वैसे भी खुशियों को सेलिब्रेट करने का बहाना चाहिए और आज तो इतनी बड़ी ख़ुशी का दिन है. दस दिन बाद मेरा भी जन्मदिन है...सो, यह खुशियाँ चलती रहें !!






(हम दोनों का यह चित्र बिटिया अक्षिता (पाखी) ने लिया है)
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