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सोमवार, 18 नवंबर 2019

Ahmedabad International Literature Festival : सोशल मीडिया के दौर में भाषाई शुद्धता जरुरी -डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव

गुजरात में आयोजित हुए "अहमदाबाद इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल" (Ahmedabad International Literature Festival) में चर्चित ब्लॉगर व साहित्यकार एवं लखनऊ मुख्यालय परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ कृष्ण कुमार यादव  बतौर स्पीकर शामिल हुए। इस दौरान डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव ने 16 नवंबर, 2019 को आयोजित "भाषा के बदलते स्वरुप" (Continuous evolution of languages with time) सत्र को सम्बोधित किया और लोगों से संवाद किया। 
डाक  निदेशक कृष्ण कुमार यादव यादव (Krishna Kumar Yadav, Director Postal Services, Lucknow, UP) ने कहा कि भाषा सिर्फ माध्यम भर नहीं है बल्कि किसी भी देश की संस्कृति की संवाहक है। भाषा की सहजता और अन्य भाषाओं से शब्दों को ग्रहण करने की क्षमता इसे और भी मजबूत बनाती है। सोशल मीडिया के दौर में भाषाई शुद्धता का ध्यान रखना भी जरूरी है, अन्यथा आने वाली पीढ़ियाँ इसके मूल स्वरूप से वंचित रह जाएंगी।
बॉलीवुड के चर्चित गीतकार संदीप नाथ ने फिल्मों और गीतों में भाषा के बदलते स्वरूप पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन फ़ौकिया वाजिद ने किया।
 

गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत (Acharya Devvrat, Governor of Gujarat) ने अहमदाबाद लिटरेचर फेस्टिवल का उद्घाटन करते हुए कहा कि, साहित्य समाज का दर्पण है और आज के दौर में साहित्यकारों की भूमिका और भी बढ़ गई है।
फेस्टिवल के संस्थापक निदेशक उमाशंकर यादव ने बताया कि 16 और 17 नवंबर को आयोजित हुए इस लिटरेचर फेस्टिवल में देश-दुनिया की विभिन्न क्षेत्रों की हस्तियां शामिल हुईं और सार्थक संवाद के माध्यम से समाज को एक नई दिशा देने की कोशिश की।

सोशल मीडिया के दौर में भाषाई शुद्धता जरुरी -डाक निदेशक कृष्ण  कुमार यादव 


भाषा सिर्फ माध्यम भर नहीं, बल्कि देश की संस्कृति की संवाहक है-डाक निदेशक कृष्ण  कुमार यादव 

अहमदाबाद इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल में शामिल हुए डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव 

"भाषा के बदलते स्वरुप" सत्र को सम्बोधित किया डाक निदेशक केके यादव ने

8 टिप्‍पणियां:

ahmed ने कहा…


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Prateek ने कहा…

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भाषाई शुद्धता पे ही भविष्य की सुदृढ सांस्कृतिक विरासत निर्भर करेगी।अब देखिए अंग्रेजी भाषा ने समाज का आंशिक ही सही पर सांस्कृतिक बदलाव तो कर ही दिया है,इस संदर्भ में निःसन्देह आपके विचार अनुकरणीय है सर जी

Ashok Jain ने कहा…

नीरस डाक विभाग में साहित्य का इतना बड़ा प्रेमी भी है, यह जानकार दिल बहुत खुश हुआ । काश उत्तर प्रदेश में डाक विभाग में हर काम भी हिन्दी मे ही हो तो यह हमारी राष्ट्रभाषा के प्रति सच्ची सेवा होगी ।
कभी ललितपुर पधारियेगा ।
शाखा डाकपाल-उमरिया
२८४४०३
चलित यंत्र-८६०४४४८८३५

Unknown ने कहा…

बहुत ही सराहनीय विचार प्रिय
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First Uttar Pradesh ने कहा…

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