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शुक्रवार, 14 फ़रवरी 2014

हाँ, यही प्यार है

डायरी के पुराने पन्नों को पलटिये तो बहुत कुछ सामने आकर घूमने लगता है. ऐसे ही इलाहाबाद विश्विद्यालय में अध्ययन के दौरान प्यार को लेकर एक कविता लिखी थी. आज आप सभी के साथ शेयर कर रहा हूँ-



दो अजनबी निगाहों का मिलना
मन ही मन में गुलों का खिलना
हाँ, यही प्यार है............ !!

आँखों ने आपस में ही कुछ इजहार किया
हरेक मोड़ पर एक दूसरे का इंतजार किया
हाँ, यही प्यार है............ !!

आँखों की बातें दिलों में उतरती गई
रातों की करवटें और लम्बी होती गई
हाँ, यही प्यार है............ !!

सूनी आँखों में किसी का चेहरा चमकने लगा
हर पल उनसे मिलने को दिल मचलने लगा
हाँ, यही प्यार है............ !!

चाँद व तारे रात के साथी बन गये
न जाने कब वो मेरी जिन्दगी के बाती बन गये
हाँ, यही प्यार है............ !!



- कृष्ण कुमार यादव

फेसबुक पर भी मिलें - https://www.facebook.com/krishnakumaryadav1977

प्यार का भी भला कोई दिन होता है। इसे समझने में तो जिंदगियां गुजर गईं और प्यार आज भी बे-हिसाब है। कबीर ने यूँ ही नहीं कहा कि 'ढाई आखर प्रेम का पढ़े सो पंडित होय' . प्यार का न कोई धर्म होता है, न जाति, न उम्र, न देश और न काल। … बस होनी चाहिए तो अंतर्मन में एक मासूम और पवित्र भावना। प्यार लेने का नहीं देने का नाम है, तभी तो प्यार समर्पण मांगता है। कभी सोचा है कि पतंगा बार-बार दिये के पास क्यों जाता है, जबकि वह जानता है कि दीये की लौ में वह ख़त्म हो जायेगा, पर बार-बार वह जाता है, क्योंकि प्यार मारना नहीं, मर-मिटना सिखाता है। तभी तो कहते हैं प्यार का भी भला कोई नाम होता है। यह तो सबके पास है, बस जरुरत उसे पहचानने और अपनाने की है न कि भुनाने की। -- कृष्ण कुमार यादव


रविवार, 10 फ़रवरी 2013

प्रिया आ ! : अथर्ववेद में समाहित दो प्रेम गीत

वेलेण्टाइन डे का असर अभी से दिखने लगा है. चारों तरफ प्यार की धूम मची है. अब तो यह पूरा व्यवसाय हो गया है. हर कोई इसे अपने ढंग से यादगार बनाना चाह रहा है. फ़िलहाल प्यार की इस फिजा में वसंत के अहसास के बीच वेलेण्टाइन डे पर अथर्ववेद में समाहित दो प्रेम गीतों का हिन्दी अनुवाद प्रस्तुत है-

प्रिया आ !
मत दूर जा
लिपट मेरी देह से
लता लतरती ज्यों पेड़ से
मेरे तन के तने पर
तू आ टिक जा
अंक लगा मुझे
कभी न दूर जा
पंछी के पंख कतर
ज़मीं पर उतार लाते ज्यों
छेदन करता मैं तेरे दिल का
प्रिया आ, मत दूर जा।
धरती और अंबर को
सूरज ढक लेता ज्यों
तुझे अपनी बीज भूमि बना
आच्छादित कर लूंगा तुरंत
प्रिया आ, मन में छा
कभी न दूर जा
आ प्रिया!


हे अश्विन!
ज्यों घोड़ा दौड़ता आता
प्रिया-चित्त आए मेरी
ओर
ज्यों घुड़सवार कस
लगाम
रखता अश्व वश में
रहे तेरा मन
मेरे वश में
करे अनुकरण सर्वदा
मैं खींचता तेरा चित्त
ज्यों राजअश्व खींचता
घुड़सवार
अथित करूं तेरा हृदय
आंधी में भ्रमित तिनके जैसा
कोमल स्पर्श से कर
उबटन तन पर
मधुर औषधियों से
जो बना
थाम लूं मैं हाथ
भाग्य का कस के।

 
( आकांक्षा जी के ब्लॉग 'शब्द-शिखर' से )

मंगलवार, 31 मई 2011

देखिये..शायद आपका प्यार मिल जाये !!

क्या आपका मन किसी को पाने के लिए या जीवन साथी बनाने के लिए मचल रहा है? क्या आपके पास सबकुछ होते हुये भी प्यार नहीं है? क्या आपकी शादी नहीं नहीं हो पा रही? तो ये परेशान मत होइए आज हम आपके लिए लाये हैं वो सभी उपाय जिनको करने के बाद आपकी प्रेमिका कहेगी कि मैं जोगन तेरे प्रेम की.........

जब भी किसी को प्रेम करें तो याद रखें कि संयम और प्रतीक्षा सबसे उत्तम उपाय है .
ईश्वर से प्रेम के लिए प्रार्थना करनी चाहिए, क्योंकि दुआओं में असर होता है .
प्रेम प्राप्ति के लिए आप भगवान् कामदेव और देवी रति के साथ साथ शिव-शक्ति,गणपति,और भगवान विष्णु जी की पूजा कर सकते हैं .
इन्द्र देवता,अग्नि देवता,चन्द्रमा देवता,अप्सराओं व यक्षिणी देवियों की उपासना भी प्रेम प्रदान करती हैं .
देवी दुर्गा जी से मांगी गयी प्रेम व सुख शान्ति सौभाग्य की तत्काल पूर्ती होती है .
यदि प्रेम विवाह करना चाहते हैं तो ब्रत एवं दान बहुत सहायक होते हैं.



प्रेम प्राप्ति के कुछ अति सरल दिव्य मंत्र
कृष्ण जी का मंत्र -ॐ क्लीं कृष्णाय गोपीजन बल्लभाय स्वाहा:
कृष्ण मंदिर में मुरली बांसुरी ले जा कर अर्पित करें
पान अर्पण से प्रेम प्राप्ति होती है
यदि प्रेम में फूट पड़ गयी हो तो उसे पुनह पाने के लिए भैरव जी की पूजा अचूक उपाय है
भैरव देवता को मीठी रोटी का प्रसाद बना कर अर्पित करें
मानसिक तौर से उत्तरनाथ भैरव का मंत्र जपें
भैरव जी का मंत्र-ॐ ज्लौम रहौं क्रोम उत्तरनाथ भैरवाय स्वाहा:
यदि आप किसी को अपना बनाना चाहते हैं तो माँ शक्ति की पूजा करे
माता को लाल रंग का झंडा अर्थात ध्वजा चढ़ाएं व मनोकामना मांगें
माँ शक्ति का मंत्र-ॐ नमो मोहिनी महामोहिनी अमृत वासिनी स्वाहा:
देवराज इन्द्र की पत्नी इंद्रायणी की स्तुति को अमोघ माना जाता हैं कई ऋषि पुत्रियों ने उनकी स्तुति कर वर पाया है
इंद्रायणी देवी की पूजा उन्हें करनी चाहिए जो नहीं जानते की उनके जीवन में कौन आने वाला है
तब देवी प्रसन्न हो कर अत्यंत स्रेष्ठ प्रेमिका व पति या पत्नी प्रदान करती है
इंद्रायणी देवी का मंत्र-ॐ देवेंद्राणी विवाहं भाग्यमारोग्यम देहि मे
बीस के अंक को विवाह का अंक माना जाता है विवाह में समस्या पर चार खाने बना कर केवल बीस बीस लिखना चाहिय
बीस के इस यन्त्र को धारण करने से या पास रखने से विवाह हो जाता है

यन्त्र- 20 20 20 20
20 20 20 20
20 20 20 20
20 20 20 20

गोमेद नामक रत्न को गलें में पहनने से विवाह लाभ होगा
चांदी में मोती की अंगूठी पहनने से प्रेम बढेगा
हीरे अथवा जरकन के आभूषण प्रेम में बृद्धि करेंगे
नीलम की अंगूठी प्रतिष्ठित कर पहनने से और संकल्पित करने से प्रेम में सफलता मिलती है
शहद के रुद्राभिषेक से मनचाहा प्रेम मिलेगा
सोलह सोमवार के ब्रत से योग्य सुन्दर सुशील पति मिलेगा
अन्न दान करने से प्रेम विवाह संपन्न होता है
गौरी देवी को चुनरी श्रृंगार चढाने व मौली बांधने से मनमीत मिलता है
मधुर व्यबहार मीठी बाणी जीवन में स्थाई प्रेम प्रदान करने में समर्थ हैं
धीरज और संतोष के साथ साथ सकारात्मक आत्मविश्वास भी होना चाहिए
योग मेडिटेशन और संगीत सहित शाकाहार को अपनाएँ
नशों से दूर रहना चाहिए

साभार : कौलान्तक पीठाधीश्वर/महायोगी सत्येन्द्र नाथ

रविवार, 13 मार्च 2011

भगोरिया की मस्ती और आदिवासी समाज

भारतीय संस्कृति प्रेम की उपासक रही है। कभी यह राधा-कृष्ण के आध्यात्मिक प्रेम के रुप में उद्दीपत होता है तो कभी लौकिक प्रेम के रुप में। सभ्य समाज में भले ही खाप पंचायतें प्रेम के आड़े आ रही हों पर आदिवासी समाज तो अभी भी बकायदा प्रेम का उत्सव मनाता है। इसके लिए उन्हें किसी वेलेंटाइन-डे की जरुरत नहीं पड़ती। पश्चिमी मध्य प्रदेश के आदिवासी युवाओं के पारंपरिक प्रणय पर्व, ‘भगोरिया‘ की मस्ती तो देखते ही बनती है। इस साल प्रमुख भगोरिया हाटों की शुरुआत 13 मार्च से हो रही है और यह सिलसिला हफ्ते भर तक चलेगा।

प्रेम का यह परंपरागत पर्व म०प्र० के झाबुआ, धार, खरगोन और बड़वानी जैसे आदिवासी बहुल जिलों में मनाया जाता है। सदियों से मनाए जा रहे भगोरिया उत्सव के जरिए आदिवासी युवा अनूठे ढंग से अपना जीवन साथी चुनते आ रहे हैं। हर साल टेसू (पलाश) के पेड़ों पर खिलने वाले सिंदूरी फूल पश्चिमी मध्यप्रदेश के आदिवासियों को फागुन आने की खबर दे देते हैं और वे ‘भगोरिया‘ मनाने के लिए तैयार हो जाते हैं। आदिवासी टोलियाँ ढोल और मांदल (एक तरह का बाजा) की थाप और बांसुरी की स्वर लहरियों पर भगोरिया हाट में सुध-बुध बिसराकर झूमती हैं। भगोरिया हाट को आदिवासी युवक-युवतियों का ‘मिलन समारोह‘ भी कहा जा सकता है। परंपरा के मुताबिक भगोरिया हाट में आदिवासी युवक, युवती को पान का बीड़ा पेश करके अपने प्रेम का मौन इजहार करता है। युवती का बीड़ा लेने का मतलब है कि वह भी युवक को पसंद करती है। उसके बाद वह युवक भगोरिया हाट से ‘भाग‘ जाता है और तब तक घर नहीं लौटता, जब तक दोनों के परिवार उनकी शादी के लिए रजामंद नहीं हो जाते।

प्रेम की इस सदियों पुरानी जनजातीय परंपरा पर भी आधुनिकता का रंग अब गहरा रहा है। जनजातीय संस्कृति के जानकार बताते हैं कि भगोरिया हाट अब मेलों में तब्दील हो गए है। जनजाति के परंपरागत सुरों में डीजे साउंड भी खूब घुल-मिल गया है। इनमें परंपरागत तरीके से जीवन साथी चुनने के दृश्य उतनी प्रमुखता से नहीं दिखते। पर तमाम बदलावों के बावजूद भगोरिया का उल्लास लोगों में जस का तस बना हुआ है। यही कारण है कि भगोरिया की विश्व प्रसिद्ध मस्ती को आंखों में कैद करने के लिए पश्चिमी मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल जिलों में बड़ी संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक भी उमड़ते और आदि-प्रेम का बखूबी लुत्फ़ उठाते हैं।

बुधवार, 2 मार्च 2011

प्यार का सफर


डायरी के पुराने पन्नों को पलटिये तो बहुत कुछ सामने आकर घूमने लगता है. ऐसे ही इलाहाबाद विश्विद्यालय में अध्ययन के दौरान प्यार को लेकर एक कविता लिखी थी. आज आप सभी के साथ शेयर कर रहा हूँ-

दो अजनबी निगाहों का मिलना
मन ही मन में गुलों का खिलना
हाँ, यही प्यार है............ !!

आँखों ने आपस में ही कुछ इजहार किया
हरेक मोड़ पर एक दूसरे का इंतजार किया
हाँ, यही प्यार है............ !!

आँखों की बातें दिलों में उतरती गई
रातों की करवटें और लम्बी होती गई
हाँ, यही प्यार है............ !!

सूनी आँखों में किसी का चेहरा चमकने लगा
हर पल उनसे मिलने को दिल मचलने लगा
हाँ, यही प्यार है............ !!

चाँद व तारे रात के साथी बन गये
न जाने कब वो मेरी जिन्दगी के बाती बन गये
हाँ, यही प्यार है............ !!

सोमवार, 14 फ़रवरी 2011

प्रेम (वेलेंटाइन दिवस पर विशेष)


प्रेम एक भावना है
समर्पण है, त्याग है
प्रेम एक संयोग है
तो वियोग भी है
किसने जाना प्रेम का मर्म
दूषित कर दिया लोगों ने
प्रेम की पवित्र भावना को
कभी उसे वासना से जोड़ा
तो कभी सिर्फ उसे पाने से
भूल गये वे कि प्यार सिर्फ
पाना ही नहीं खोना भी है
कृष्ण तो भगवान थे
पर वे भी न पा सके राधा को
फिर भी हम पूजते हैं उन्हें
पतंगा बार-बार जलता है
दीये के पास जाकर
फिर भी वो जाता है
क्योंकि प्यार
मर-मिटना भी सिखाता !!

बुधवार, 24 नवंबर 2010

मुझे तुम्हारी तलाश है...


मुझे तुम्हारी तलाश है
ढूँढता हूँ हर कहीं
इस छोर से उस छोर तक
उस छोर से इस छोर तक
कभी तुम्हें रिमझिम फुहारों में ढूँढा
कभी अठखेलियाँ करती बहारों में ढूँढा
पर नहीं मिला मुझे मेरे जीवन का बसंत
शायद तुम आसमां के चाँद बन गये
या मेरी रातों के ख्वाब बन गये
पर मैं आज भी वहीं हूँ
आवाज देता हूँ तुम्हें
दूर तलक आवाज जाकर लौट आती है
मैं फिर भी तुम्हें खोजता फिरूँगा
जब तक मेरा अखिरी मुकाम न आ जाय
पर एक आस है दिल में
अगर यहाँ नहीं, तो वहाँ जरूर मिलोगे।

गुरुवार, 26 अगस्त 2010

तुम्हारी खामोशी


तुम हो
मैं हूँ
और एक खामोशी
तुम कुछ कहते क्यूँ नहीं
तुम्हारे एक-एक शब्द
मेरे वजूद का
अहसास कराते हैं
तुम्हारी पलकों का
उठना व गिरना
तुम्हारा होठों में ही
मंद-मंद मुस्कुराना
तुम्हारा बेकाबू होती
साँसों की धड़कनें
तुम्हारे शरीर की खुशबू
तुम्हारी छुअन का अहसास
सब कुछ
इस खामोशी को
झुठलाता है।

शनिवार, 14 फ़रवरी 2009

प्रेम (वैलेंटाइन-डे पर विशेष)

प्रेम एक भावना है
समर्पण है, त्याग है
प्रेम एक संयोग है
तो वियोग भी है
किसने जाना प्रेम का मर्म
दूषित कर दिया लोगों ने
प्रेम की पवित्र भावना को
कभी उसे वासना से जोड़ा
तो कभी सिर्फ उसे पाने से
भूल गये वे कि प्यार सिर्फ
पाना ही
नहीं, खोना भी है
कृष्ण तो भगवान थे
पर वे भी
न पा सके राधा को
फिर भी हम पूजते हैं उन्हें
पतंगा बार-बार जलता है
दिये के पास जाकर
फिर भी वो जाता है
क्योंकि प्यार
मर-मिटना भी सिखाता है !!

गुरुवार, 27 नवंबर 2008

सूरज की किरणें

पता नहीं क्यों
सूरज की पहली किरण
मुझे कुँवारी सी लगती है

बिस्तर पर अल्हड़ता से
अस्त-व्यस्त और
निश्चिन्त होकर लेटे
भर लेती है अपने बाहुपाश में

माँ की डाँट के बीच
अंगड़ाईयाँ लेते हुये
ज्यों ही कोशिश करता हूँ उठने की
रोक लेती है मुझे
धूप का नर्म अहसास

मानो ये किरणें
तैयार बैठी हों
अपना कौमार्यपन
मुझ पर लुटाने के लिए।

सोमवार, 22 सितंबर 2008

प्रेयसी

छोड़ देता हूँ निढाल
अपने को उसकी बाँहों में
बालों में अंगुलियाँ फिराते-फिराते
हर लिया है हर कष्ट को उसने।

एक शिशु की तरह
सिमटा जा रहा हूँ
उसकी जकड़न में
कुछ देर बाद
ख़त्म हो जाता है
द्वैत का भाव।

ग़हरी साँसों के बीच
उठती-गिरती धड़कनें
खामोश हो जाती हैं
और मिलाने लगती हैं आत्मायें
मानों जन्म-जन्म की प्यासी हों।

ऐसे ही किसी पल में
साकार होता है
एक नव जीवन का स्वप्न।

***कृष्ण कुमार यादव***

रविवार, 17 अगस्त 2008

तुम्हें जीता हूँ

मैं तुम्हें जीता हूँ
तुम्हारी साँसों की खुशबू
अभी भी मेरे जेहन में है
तुम्हारी आँखों की गहराइयां
अभी भी उनमें डूबता जाता हूँ
तुम्हारी छुअन का एहसास
अभी भी मुझे गुदगुदाता है
तुम्हारे केशों की राशि
अभी भी मेरे हाथों में है
तुम्हारी पलकों का उठना और गिरना
अभी भी मेरी धडकनों में है
तुम्हारे वो मोती जैसे आंसू
अभी भी मेरी आँखों में हैं
तुम्हारा वो रूठना और मनाना
सब कुछ मेरी यादों में है
नहीं हो तो सिर्फ़ तुम
पर क्या हुआ
तुम्हारे वजूद का एहसास
अभी भी मेरी छाया में है
क्योंकि मैं तुम्हें जीता हूँ ।




***कृष्ण कुमार यादव ***


रविवार, 22 जून 2008

तुम



सूरज के किरणों की पहली छुअन

थोडी अल्हड़ -सी

शरमाई हुई सकुचाई हुई

कमरे में कदम रखती है
वही किरण

अपने तेज व अनुराग से
वज्र पत्थर को भी
पिघला जाती है
शाम होते ही
ढलने लगती हैं किरणे
जैसे की अपना सारा निचोड़
उन्होंने धरती को दे दिया हो
ठीक ऐसे ही तुम हो।
***कृष्ण कुमार यादव ***