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मंगलवार, 26 अगस्त 2025

जन्मदिन व वर्षगांठ जैसे महत्वपूर्ण दिनों पर वृक्षारोपण कर दी जा सकती है समाज को नई दिशा - पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव

पर्यावरण की रक्षा के लिए जरुरी है कि हम इसे अपनी दिनचर्या में शामिल करने के साथ पौधारोपण को जीवन के विभिन्न महत्वपूर्ण दिनों से जोड़ें। भारतीय परंपरा में पेड़-पौधों को परमात्मा का प्रतीक मान कर उनकी पूजा का विधान बनाया गया  है। हमारी साँसें चलती रहें, इसके लिए ऑक्सीजन बेहद जरुरी है। ऐसे में जन्मदिन व विवाह वर्षगांठ जैसे जीवन के महत्वपूर्ण दिनों को विशेष बनाने के लिए पौधारोपण कर समाज को नई दिशा दी जा सकती है। 




उक्त संदेश वरिष्ठ ब्लॉगर, साहित्यकार, लोकप्रिय प्रशासक एवं सम्प्रति उत्तर गुजरात परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने स्वदेशी समाज सेवा समिति द्वारा 10 अगस्त, 2025 को अपने 48वें जन्म दिवस पर आयोजित पौधारोपण कार्यक्रम में दिया।







इस अवसर पर श्री कृष्ण कुमार यादव ने अपनी पत्नी एवं अग्रणी महिला ब्लॉगर व साहित्यकार श्रीमती आकांक्षा यादव, पुत्री सुश्री अक्षिता, राष्ट्रीय बाल पुरस्कार विजेता एवं पुत्री सुश्री अपूर्वा संग अपने आवास पर पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।   

स्वदेशी समाज सेवा समिति, फिरोजाबाद के तत्त्वावधान में स्वामी ध्यानानन्द आश्रम नगला जोरे, फिरोजाबाद में आयोजित उक्त कार्यक्रम में श्री कृष्ण कुमार यादव, पोस्टमास्टर जनरल, उत्तर गुजरात परिक्षेत्र के 48वें जन्मदिन पर रुद्राक्ष, तुलसी, नीम, आम, आंवला, तेजपत्ता, दालचीनी, तुलसी, पान, सिंगोनियम, रजनीगन्धा, गंधराज इत्यादि के फलदार, औषधीय, छायादार वृक्षों, बेल व पुष्प सहित 48 पौधों का रोपण कर धरा को हराभरा एवं पर्यावरण को शुद्ध बनाने का संकल्प लिया गया।

इस अवसर पर स्वदेशी समाज सेवा समिति केअध्यक्ष श्री मातादीन यादव ने कहा, यह जीवन परमात्मा का उपहार है, सेवा ही सबसे बड़ी उपासना है और प्रकृति की रक्षा ही आज का सबसे बड़ा धर्म है। वर्तमान परिस्थितियों में जब वन क्षेत्र का निरंतर ह्रास होता जा रहा है तब संपूर्ण समाज को इस तरह के आयोजनों से सीख लेने की आवश्यकता है। स्वदेशी समाज सेवा समिति के संस्थापक सचिव विवेक यादव 'रुद्राक्ष मैन' ने कहा कि  सम्पूर्ण धरा और प्रकृति को सुरक्षित व संतुलित रखने हेतु हमें पौधारोपण के प्रति लोगों को सजग बनाना होगा। स्वदेशी समाज सेवा समिति के संकल्पों से जुड़कर सेवा, संस्कार एवं पर्यावरण रक्षा के इस यज्ञ में लोगों से अपनी आहुति देने का आह्वान भी किया। इस अवसर पर जितेन्द्र कुमार, आशीष, रिशभ, प्रबल प्रताप सहित तमाम पर्यावरण प्रेमियों ने पौधारोपण में अपना योगदान दिया।





 पोस्टमास्टर जनरल एवं वरिष्ठ साहित्यकार श्री कृष्ण कुमार यादव के जन्मदिन पर स्वदेशी समाज सेवा समिति ने किया वृक्षारोपण कार्यक्रम

जन्मदिन व वर्षगांठ जैसे महत्वपूर्ण दिनों पर वृक्षारोपण कर दी जा सकती है समाज को नई दिशा-पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव
 
चलो आज इस जमीं को, फिर से जन्नत बनाते हैं,
रोज न सही आज दो चार पौधे लगाते हैं !!🍁🌳

 धरती पर शिद्दत से एक पेड़ अपलोड तो करके देखिये,
बादलों के सैकड़ों झुंड आएंगे लाइक करने के लिए।
🌱🌲🌳🌴🌾🌿☘️🍁🌷
Save Trees, Save Earth, Save Environment.

 

रविवार, 13 अप्रैल 2025

Navodaya Foundation Day (13 April) : नवोदय स्थापना दिवस - हम नव युग की नई भारती, नई आरती...


 हम नव युग की नई भारती, नई आरती

हम स्वराज्य की ऋचा नवल, भारत की नवलय हों

नव सूर्योदय, नव चंद्रोदय, हमी नवोदय हों। 

भारत में 13 अप्रैल, 1986 को दो नवोदय विद्यालयों से आरंभ हुआ यह सफर आज 661 तक पहुँच चुका है। नवोदय विद्यालय एक सरकारी संस्थान होने के बावजूद उत्कृष्ट शिक्षा व बेहतर परीक्षा परिणामों की वजह से आज शीर्ष पर है। 'वसुधैव कुटुंबकम्' एवं 'शिक्षार्थ आइए, सेवार्थ जाइए' की भावना से प्रेरित नवोदय में जाति, संप्रदाय, क्षेत्र से परे सिर्फ राष्ट्रवाद की भावना है। देश भर में नवोदय विद्यालय के 16 लाख से अधिक पुरा विद्यार्थियों का नेटवर्क समाज को नई दिशा देने के लिए तत्पर है। राजनीति, प्रशासन, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, सैन्य सेवाओं से लेकर विभिन्न प्रोफेशनल सेवाओं, बिजनेस और सामाजिक सेवाओं में नवोदयन्स पूरे भारत ही नहीं वरन पूरी दुनिया में पहचान बना रहे हैं। 'हमीं नवोदय हों' की भावना के साथ आज नवोदय एक ब्रांड बन चुका है। 

नवोदय सिर्फ एक विद्यालय नहीं, वह एक सपना है — उन लाखों बच्चों का सपना, जिनकी आँखों में उम्मीदें थीं, पर साधन नहीं। शिक्षा ही वह रोशनी है, जिससे एक नया, सक्षम और समृद्ध भारत गढ़ा जा सकता है। नवोदय ने ग्रामीण भारत के होनहार बच्चों को न केवल उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा दी, बल्कि आत्मविश्वास, संस्कार और देशसेवा की भावना भी दी। यह वह संस्था है जहाँ एक किसान का बेटा वैज्ञानिक बनता है, एक मजदूर की बेटी डॉक्टर बनती है, और जहाँ से निकलकर छात्र न केवल अपनी, बल्कि पूरे परिवार और समाज की तक़दीर बदलते हैं। नवोदय ने हमें सिखाया कि सपने सिर्फ देखे नहीं जाते, उन्हें जिया भी जाता है — संघर्ष, अनुशासन और समर्पण के साथ। मुझे गर्व है कि मैं नवोदय का हिस्सा रहा हूँ और मुझे पूरा विश्वास है कि आज नवोदय के पूर्व छात्र देश-विदेश में अपने-अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं।

नवोदय विद्यालय की स्थापना का श्रेय तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री राजीव गाँधी जी को जाता है। 1984 में राजीव गांधी जी प्रधानमंत्री बने और 1985 में उन्होंने इस देश के ग्रामीण क्षेत्र के प्रतिभाशाली बच्चों को एक उच्च कोटि की शिक्षा मिल सके इस इरादे से नवोदय विद्यालय की नींव रखी। वे हमेशा एक ऐसे विजनरी प्रधानमंत्री के रूप में याद किये जायेंगे, जिन्होंने इस देश को समर्पित शिक्षा का उत्कृष्ट मॉडल नवोदय विद्यालय दिया। ग्रामीण क्षेत्रों की तमाम प्रतिभाओं को इन नवोदय विद्यालय में न सिर्फ निःशुल्क शिक्षा दी गई, बल्कि हॉस्टल से लेकर रोजमर्रा तक की चीजें निःशुल्क थीं। बस एक ध्येय था कि नवोदय में पढ़े ये बच्चे एक दिन अपनी प्रतिभा से समाज और राष्ट्र को ऊँचाइयों पर ले जाएँगे और समाज ने उन पर जो खर्च किया है, उसका अवदान देंगे। आज भी नवोदय विद्यालय अपनी उसी गरिमा के साथ संचालित हैं। देश-दुनिया में नवोदय से पढ़कर निकले लाखों विद्यार्थी आज समाज व राष्ट्र को नया मुकाम दे रहे हैं। अधिकतर ग्रामीण पृष्ठभूमि के ये विद्यार्थी आज जिन ऊँचाइयों पर हैं, उसका श्रेय नवोदय की नव उदय की उस भावना को जाता है, जहाँ जात-पात, धर्म, अमीर-गरीब, शहरी-ग्रामीण जैसे तमाम विभेद भूलकर सब सिर्फ एक सकारात्मक सोच के साथ नए पथ पर अग्रसर होते हैं। 

जवाहर नवोदय विद्यालयों की स्थापना-

सरकार की नीति के अनुसार, देश के प्रत्येक जिले में एक जवाहर नवोदय विद्यालय स्थापित किया जाना है। तद्नुसार, वर्ष 2016-17 के दौरान देश के विभिन्न जिलों में 62 नए नवोदय विद्यालय स्वीकृत किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, 10 जवाहर नवोदय विद्यालय अनुसूचित जाति जनसंख्या बहुल एवं 10 जवाहर नवोदय विद्यालय अनुसूचित जनजाति जनसंख्या बहुल क्षेत्रों के लिए स्वीकृत किए गए हैं। इसके अतिरिक्त 03 विशेष जवाहर नवोदय विद्यालय, सेनापति-II (मणिपुर), उखरुल-II (मणिपुर) तथा  रतलाम-II (मध्य प्रदेश) में स्वीकृत किए गए हैं। इस प्रकार कुल स्वीकृत जवाहर नवोदय विद्यालयों की संख्या 661 है। प्रत्येक विद्यालय के लिए कक्षाओं, शयन कक्षों, कर्मचारी आवासों, भोजन-कक्ष तथा अन्य बुनियादी सुविधाओं जैसे खेल के मैदान, कार्यशालाओं, पुस्तकालय एवं प्रयोगशालाओं इत्यादि के लिए पर्याप्त भवनों से युक्त सम्पूर्ण परिसर की व्यवस्था है। नए नवोदय विद्यालयों को खोलने का निर्णय राज्य सरकार के इस प्रस्ताव पर आधारित होता है कि वह विद्यालय के लिए लगभग 30 एकड़ भूमि (प्रत्येक मामले के आधार पर छूट सहित) निःशुल्क उपलब्ध कराने के साथ-साथ, विद्यालय को तब तक चलाने के लिए उपयुक्त अस्थायी भवन का प्रबंध करेगी जब तक कि विद्यालय के स्थायी भवन का निर्माण पूरा नहीं हो जाता।

नवोदय विद्यालय का विजन : मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिभाशाली बच्चों को उनके परिवार की सामाजिक-आर्थिक स्थिति पर ध्यान दिए बिना, गुणात्मक आधुनिक शिक्षा प्रदान करना, जिसमें सामाजिक मूल्यों, पर्यावरण के प्रति जागरूकता, साहसिक कार्यकलाप और शारीरिक शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण घटकों का समावेश हो।



Vision of Navodaya Vidyalaya : To provide good quality modern education-including a strong component of culture, inculcation of values, awareness of the environment, adventure activities and physical education- to the talented children predominantly from the rural areas without regard to their family's socio-economic conditions.  

Navodaya Vidyalayas are affiliated to CBSE and offer free education to talented children from Class-VI to XII. (At least 75% of the seats in a district are filled by candidates provisionally selected from rural areas of the district. Minimum One third of the total seats are filled by girls.) Each Navodaya Vidyalaya is a co-educational residential institution providing free boarding and lodging, free school uniforms, text books, stationery, and to and fro rail and bus fare to students. However, a nominal fee @ Rs. 600/- per month is charged from students of Classes- IX to XII as Vidyalaya Vikas Nidhi. The students belonging to SC/ST categories, girls and children of the families Below Poverty Line (BPL) are exempted from payment of this fee. VVN is collected @ Rs. 1500/- per student per month from the students whose parents are Govt. Employees.

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यादों की वो गलियाँ आज भी महकती हैं...

कभी मेस की लाइन में खड़ी हँसी,

कभी हॉस्टल की छत पर साझा किए ख्वाब,

कभी टीचर्स की डाँट में भी छुपा अपनापन —

नवोदय ने हमें सिर्फ पढ़ाया नहीं,

बल्कि जीना सिखाया, रिश्ते निभाना सिखाया...!!


वक़्त भले ही आगे बढ़ गया हो,

पर वो दिन, वो दोस्त, वो पल आज भी दिल के सबसे करीब हैं....


तो आइए, फिर से जी लें वो लम्हे,

फिर से बाँट लें वो मुस्कानें,

और फिर से कहें — "हमीं नवोदय हों !"

नवोदयी भावना एक ऐसा अनमोल रिश्ता है, जो हर नवोदयन के दिल में खास जगह बनाए हुए है। ये सिर्फ एक समूह नहीं, बल्कि एक ऐसा अनूठा परिवार है जिसमें अलग-अलग राज्यों या जिलों के नवोदय विद्यालय भले ही हों, लेकिन जज़्बा, अपनापन और यादों की मिठास सबमें एक जैसी है।










!! नवोदय विद्यालय परिवार के सभी साथियों को ‘नवोदय स्थापना दिवस’ की हार्दिक शुभकामनाएँ !!

शुक्रवार, 31 मई 2024

Baobab, Parijat and Kalpvriksha Tree : बाओबाब, पारिजात और कल्प वृक्ष...


'पारिजात' और 'कल्प वृक्ष' के नाम से प्रसिद्ध एवं प्रयागराज के झूंसी में पवित्र नदी गंगा के बाएं किनारे पर मिट्टी के एक विशाल टीले पर स्थित अफ्रीका के एडानसोनिया डिजिटाटा प्रजाति के दुर्लभ एवं प्राचीन 'बाओबाब' वृक्ष (Baobab tree of the Adansonia Digitata species) पर प्रयागराज प्रधान डाकघर में आयोजित एक समारोह में 30 मई, 2024 को एक विशेष आवरण व विरूपण का विमोचन किया गया। शेख तकी की मजार के पास मौजूद इस ऐतिहासिक दुर्लभ वृक्ष की आयु  750 से 1350 वर्ष के बीच मानी जाती है और इसके साथ तमाम किवदंतियां और लोगों की आस्था जुड़ी हुई है। इसके तने की मोटाई 17.3 मीटर है और इस वृक्ष का फूल बड़ा तथा फल लंबा और हरे रंग का होता है। कुछ लोग इसे 'विलायती इमली' के नाम से जानते हैं। माघ मास में देश-विदेश  से आने वाले श्रद्धालु इसकी परिक्रमा करके पूजते हैं। यह वृक्ष प्रयागराज की पंचकोसी परिक्रमा के अंतर्गत आता है। ऐसे में इस पर विशेष डाक आवरण और विरूपण के माध्यम से इसकी ऐतिहासिकता, आध्यात्मिकता, वैज्ञानिकता और औषधीय गुणों के बारे में देश-दुनिया में प्रसार होगा और इसे शोध और पर्यटन से भी जोड़ने में सुविधा होगी। 

'द ट्री ऑफ लाइफ' के नाम से प्रसिद्ध 'बाओबाब' वृक्ष मूलतः मैडागास्कर, अफ्रीका और आस्ट्रेलिया में पाए जाते हैं। बाओबाब बेशकीमती वृक्ष है, जिसे अफ्रीका में 'द वर्ल्ड ट्री' की उपाधि दी गई है और वहां के आर्थिक विकास में इन वृक्षों का विशेष महत्व है। साल में नौ महीने तक बिना पत्ते के रहने वाला दुनिया का यह अद्भूत वृक्ष मेडागास्कर का राष्ट्रीय वृक्ष होने का गौरव प्राप्त कर चुका है। इन्हें एशिया और अन्य भागों में संभवतः पुर्तगालियों द्वारा प्रसारित किया गया। 'बाओबाब' वृक्ष का वैज्ञानिक नाम एडानसोनिया डिजिटाटा है, जो फ्रांसीसी प्रकृति विज्ञानी मिशेल एडनसन के नाम पर आधारित है। एडनसन ने ही सर्वप्रथम इस वृक्ष की विशेषताओं का अध्ययन किया था और उनका वर्णन किया था। इसमें वसन्त ऋतु से लेकर छह महीने तक ही पत्तियाँ रहती हैं, शेष छह महीने तक यह ठूँठ रहता है। इसलिए इसे उल्टा वृक्ष भी कहते हैं। ठूँठ अवस्था में इसे देख कर ऐसा लगता है जैसे इसकी जड़ें ऊपर और डालियाँ नीचे की ओर कर दी गई हैं। बाओबाब के मोटे तने में वर्षा जल को संग्रहीत करने का अनूठा गुण होता है। यह विपरीत परिस्थितियों में भी जीवित रह सकता है। इसकी प्रमुख विशेषता अतिजीविता है। यह वृक्ष अपने जीवन काल में लगभग 1,20,000 लीटर तक का पानी संग्रह कर सकता है। कहते हैं कि यदि इसे क्षति न पहुँचाई जाय तो यह छह हजार साल तक जीवित रह सकता है। संभवतः इसकी अतिजीविता और विपरीत परिस्थितियों में भी जीवित रहने की विशेषता के कारण इसे 'कल्पवृक्ष' या 'पारिजात' कहा गया है। 










मंगलवार, 21 मई 2024

Tribute to the Founder of JNV's : राजीव गाँधी और नवोदय विद्यालय

आज पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी जी (20 अगस्त 1944 – 21 मई 1991) की पुण्यतिथि है। जवाहर नवोदय विद्यालय बनाने के लिए हम नवोदय के लोग राजीव गाँधी जी के सदैव आभारी रहेंगे। वे हमेशा एक ऐसे विजनरी प्रधानमंत्री के रूप में याद किये जायेंगे, जिन्होंने इस देश को समर्पित शिक्षा का उत्कृष्ट मॉडल जवाहर नवोदय विद्यालय दिया। ग्रामीण क्षेत्रों की तमाम प्रतिभाओं को इन नवोदय विद्यालय में न सिर्फ निःशुल्क शिक्षा दी गई, बल्कि हॉस्टल से लेकर रोजमर्रा तक की चीजें निःशुल्क थीं। बस एक ध्येय था कि नवोदय में पढ़े ये बच्चे एक दिन अपनी प्रतिभा से समाज और राष्ट्र को ऊँचाइयों पर ले जाएँगे और समाज ने उन पर जो खर्च किया है, उसका अवदान देंगे। आज भी नवोदय विद्यालय अपनी उसी गरिमा के साथ संचालित हैं। देश-दुनिया में नवोदय से पढ़कर निकले लाखों विद्यार्थी आज समाज व राष्ट्र को नया मुकाम दे रहे हैं। अधिकतर ग्रामीण पृष्ठभूमि के ये विद्यार्थी आज जिन ऊँचाइयों पर हैं, उसका श्रेय नवोदय की नव उदय की उस भावना को जाता है, जहाँ जात-पात, धर्म, अमीर-गरीब, शहरी-ग्रामीण जैसे तमाम विभेद भूलकर सब सिर्फ एक सकारात्मक सोच के साथ नए पथ पर अग्रसर होते हैं। आज उस सोच को सलाम करते हुए हम तमाम नवोदयन्स की तरफ से राजीव गाँधी जी की पुण्यतिथि पर भावपूर्ण स्मरण और नमन।

राजीव गांधी जी की उम्र 47 साल थी जब उनकी हत्या हुई और वे मात्र 40 साल के थे जब प्रधानमंत्री बने। हम सब नवोदयन्स राजीव गांधी के ऋणी हैं, ऐसे कई लोग हैं जिनके जीवन और कैरियर में नवोदय का बहुत बड़ा योगदान है। अगर नवोदय विद्यालय न होता तो आज वे वो ओहदा, वो रुतबा, वो सफलता हासिल ही न कर पाते जहां वे आज हैं।

1984 में राजीव गांधी जी प्रधानमंत्री बने और 1985 में उन्होंने इस देश के ग्रामीण क्षेत्र के प्रतिभाशाली बच्चों को एक उच्च कोटि की शिक्षा मिल सके इस इरादे से नवोदय विद्यालय की नींव रखी....जरा गौर कीजिएगा कि कितनी बेहतरीन व्यवस्था की थी उन्होंने-

- एक जिले में से 6th standard से 80 बच्चों को प्रवेश परीक्षा से चयनित किया जाएगा और बारहवीं तक मुफ्त शिक्षा प्रदान की जाएगी। 

- उन 80 में से 75 फीसदी सीटें ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों के लिए रिजर्व होंगी, ऐसा इसलिए कि अगर ऐसा न होता तो ग्रामीण इलाकों से कम ही लोग Qualify कर पाते।

- इन चयनित बच्चों को राजीव गांधी जिस दून स्कूल में पढ़े थे, ऐसे बोर्डिंग स्कूल में निःशुल्क पढ़ाया जाएगा।

- निःशुल्क माने  सरकार उनको अगले 6 साल के लिए गोद लेगी, भोजन, पढ़ाई, रहना, कपड़ा सब फ्री।

- यहां तक कि टूथ ब्रश, साबुन, हेयर आयल.... सब कुछ फ्री...मानो वे सरकार के बेटे-बेटियाँ हैं।

-पढ़ाई, खेल-कूद, विज्ञान, कला-संस्कृति आदि सब की ट्रेनिंग दी जाती है।

- 9th Standard में Migration होता है जिसके तहत बच्चों को उस राज्य से बाहर किसी और स्कूल में Migrate किया जाता है, ताकि बच्चे अन्य राज्यों की संस्कृति और रहन-सहन को जानें एवं  देश में एकता बढ़े।

- जाति, धर्म, पैसा रसूख के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाता, सब को एक नजर से देख जाता है।

- आज देश में 650 से ज्यादा ऐसे स्कूल हैं, सभी लगभग एक जैसे ही। 

- अब तक 15 लाख से ज्यादा लोग इससे पास आउट हैं। 

- हर वर्ष करीब 400 से ऊपर नवोदयन बच्चे  #IIT के लिए Qualify हो रहे हैं। 

एक अच्छा विचार, एक Innocent Politician ने कैसे लागू किया ये नवोदय विद्यालय एक श्रेष्ठ उदाहरण है इस बात का...

राजीव गांधी जी को उनकी पुण्यतिथि पर हर नवोदयन की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि। नमन !!

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जवाहर नवोदय विद्यालयों की स्थापना-

सरकार की नीति के अनुसार, देश के प्रत्येक जिले में एक जवाहर नवोदय विद्यालय स्थापित किया जाना है। तद्नुसार, वर्ष 2016-17 के दौरान देश के विभिन्न जिलों में 62 नए नवोदय विद्यालय स्वीकृत किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, 10 जवाहर नवोदय विद्यालय अनुसूचित जाति जनसंख्या बहुल एवं 10 जवाहर नवोदय विद्यालय अनुसूचित जनजाति जनसंख्या बहुल क्षेत्रों के लिए स्वीकृत किए गए हैं। इसके अतिरिक्त 03 विशेष जवाहर नवोदय विद्यालय, सेनापति-II (मणिपुर), उखरुल-II (मणिपुर) तथा  रतलाम-II (मध्य प्रदेश) में स्वीकृत किए गए हैं। इस प्रकार कुल स्वीकृत जवाहर नवोदय विद्यालयों की संख्या 661 है। प्रत्येक विद्यालय के लिए कक्षाओं, शयन कक्षों, कर्मचारी आवासों, भोजन-कक्ष तथा अन्य बुनियादी सुविधाओं जैसे खेल के मैदान, कार्यशालाओं, पुस्तकालय एवं प्रयोगशालाओं इत्यादि के लिए पर्याप्त भवनों से युक्त सम्पूर्ण परिसर की व्यवस्था है। नए नवोदय विद्यालयों को खोलने का निर्णय राज्य सरकार के इस प्रस्ताव पर आधारित होता है कि वह विद्यालय के लिए लगभग 30 एकड़ भूमि (प्रत्येक मामले के आधार पर छूट सहित) निःशुल्क उपलब्ध कराने के साथ-साथ, विद्यालय को तब तक चलाने के लिए उपयुक्त अस्थायी भवन का प्रबंध करेगी जब तक कि विद्यालय के स्थायी भवन का निर्माण पूरा नहीं हो जाता।

Navodaya Vidyalayas are affiliated to CBSE and offer free education to talented children from Class-VI to XII. (At least 75% of the seats in a district are filled by candidates provisionally selected from rural areas of the district. Minimum One third of the total seats are filled by girls.) Each Navodaya Vidyalaya is a co-educational residential institution providing free boarding and lodging, free school uniforms, text books, stationery, and to and fro rail and bus fare to students. However, a nominal fee @ Rs. 600/- per month is charged from students of Classes- IX to XII as Vidyalaya Vikas Nidhi. The students belonging to SC/ST categories, girls and children of the families Below Poverty Line (BPL) are exempted from payment of this fee. VVN is collected @ Rs. 1500/- per student per month from the students whose parents are Govt. Employees.

नवोदय विद्यालय का विजन : मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिभाशाली बच्चों को उनके परिवार की सामाजिक-आर्थिक स्थिति पर ध्यान दिए बिना, गुणात्मक आधुनिक शिक्षा प्रदान करना, जिसमें सामाजिक मूल्यों, पर्यावरण के प्रति जागरूकता, साहसिक कार्यकलाप और शारीरिक शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण घटकों का समावेश हो।

Vision of Navodaya Vidyalaya: To provide good quality modern education-including a strong component of culture, inculcation of values, awareness of the environment, adventure activities and physical education- to the talented children predominantly from the rural areas without regard to their family's socio-economic conditions.  

शनिवार, 18 मई 2024

'द मास्टर्स आफ हेल्थकेयर' का आइएमएस बीएचयू निदेशक प्रो. एस. एन संखवार एवं पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव ने किया विमोचन

रेडियो सिटी 91.9 FM की ओर से एनुअल हेल्थ मैगजीन 'द मास्टर्स आफ हेल्थकेयर : वाराणसी' का पहला संस्करण लांच किया गया। होटल क्लार्क्स में 17 मई, 2024 को आयोजित एक समारोह में आइएमएस बीएचयू के निदेशक प्रो. एस. एन संखवार व वाराणसी परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव मुख्य अतिथि और मुख्य विकास अधिकारी हिमांशु नागपाल विशिष्ट अतिथि थे। अतिथियों ने रेडियो सिटी के कार्यक्रम की तारीफ की। मैगजीन में स्थान पाने वाले 16 स्वास्थ्य विशेषज्ञों को बेहतर करने के लिए प्रेरित भी किया। इसमें डा. श्रेयांश द्विवेदी, डा. अंकुर सिंह, डा. मिन्हाज हुसैन, डा. आशीष कुमार गुप्ता, डा. कुमार आशीष, डा. निपू चौरसिया, डा. प्रदीप चौरसिया, अभिनव कटियार, डा. अमित कुमार, डा. कर्म राज सिंह, डा. अमित भास्कर, डा. मनोज कुमार गुप्ता, डा. अविनाश चंद्र सिंह, डा. अनुपम तिवारी, प्रो. पीबी सिंह और डा. शिवाली त्रिपाठी शामिल हैं। 














बताया गया कि मैगजीन का मुख्य उद्देश्य बनारस की जनता को हर क्षेत्र के डाक्टरों के बारे में जानकारी देना है जिससे उन्हें भटकना न पड़े और एक बेहतर इलाज मिल सके। संचालन आरजे नेहा व रागिनी, स्वागत महाप्रबंधक योगेश सिंह व प्रोग्रामिंग हेड रूपेश सिंह ने किया।