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रविवार, 1 अक्टूबर 2023

हिंद युग्म उत्सव 2.0: अब नई हिंदी बन रही युवाओं की भाषा - पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव


हिंदी में जितनी सहजता होगी, उतनी ही नई पीढ़ी के बीच लोकप्रिय होगी। क्लिष्ट व कठिन भाषा से लोग ऊब रहे हैं। इस वजह से नई हिंदी यानी हिंग्लिश का कारवां प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। इसके पक्ष-विपक्ष में तमाम बातें कही जा सकती हैं, पर ज्यादातर लोग नई हिंदी भाषा को ही पढ़-बोल रहे हैं। सोशल मीडिया ने भी प्रस्तुतीकरण में भाषायी स्तर पर तमाम परिवर्तन किये हैं। हिंदी सभी को आत्मसात् करके चलती है, यही इसकी सबसे बड़ी शक्ति है। हिंदी सदैव जीवंत भाषा बनी रहेगी। यह भाषा युवाओं की भाषा बनती जा रही है और नई हिंदी को भी एक नई दिशा मिलती जा रही है। आज हिंदी सिर्फ भारत ही नहीं वैश्विक स्तर पर अपना परचम फहरा रही है। उक्त उद्गार वाराणसी परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव ने व्यक्त किये। 

श्री यादव वाराणसी में सारनाथ स्थित केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान के अतिशा सभागार में आयोजित दो दिवसीय 'हिंद युग्म उत्सव' (30 सितंबर-1 अक्टूबर, 2023) के पहले दिन देश भर से आए साहित्यसेवियों के बीच हिंदी की दशा-दिशा पर विचार साझा कर रहे थे। उन्होंने 10 साल में हिंदी लेखन में बदलाव के तहत हिंदी की नई राह विषय पर चर्चा की।

हिंदनामा के संस्थापक अंकुश कुमार ने कहा कि वर्तमान में सोशल मीडिया ने हिंदी लेखकों को नई ताकत दी है। नए लेखकों के लिए जमीन बनाई है। जौन एलिया के लेखक अनंत भारद्वाज ने कहा कि हिंदी में प्रतिदिन नए प्रयोग हो रहे हैं। इसलिए इसमें बदलाव देखने को मिल रहा है। वर्तमान में हिंदी, अंग्रेजी के शब्दों को भी स्वीकार कर रही है। इस वजह से इसका विकास हो रहा है।  यही नई हिंदी भाषा है। राकेश कायस्थ ने कहा कि साहित्य में आमूलचूल परिवर्तन हो रहा है। वर्तमान परिदृश्य में यह सामाजिक न होकर व्यक्तिगत हो गई है।


सूचना का समंदर और यात्रा-लेखन विषयक चर्चा में यात्रा से जुड़ी सूचनाओं और ब्लॉगों के दौर में यात्रा लेखन की प्रासंगिकता पर मंथन किया। उमेश पंत ने कहा, यात्रा वृतांत पर लेखन पुराना है। प्राचीन समय में ह्वेनसांग व फाहियान जैसे यात्रियों ने यात्रा वृतांत लिखा। यात्रा वृतांत पर लिखी किताबों में गंभीरता व नयापन होता है। इसमें भावनात्मक अभिव्यक्ति होती है। रुपाली नागर ने कहा कि यात्रा वृतांत पर लिखी पुस्तकें अपने आप में मौलिक होती हैं। इसके माध्यम से पाठक काल्पनिक व मनोरंजनपूर्ण यात्रा का लुफ्त उठाता है। संजय शेफर्ड ने कहा, यात्रा वृतांत से ज्ञान व दृष्टि के बीच नजरिया पैदा होता है। यही साधारण इंसान को लेखक बनाता है।

लेखन के लोकतंत्र विषय पर नवीन जोशी, सुभाष चंद्र कुशवाहा, मुहम्मद रजी, प्रो. बद्री नारायण, हिंद युग्म के संस्थापक शैलेश भारतवासी, कंसल्टिंग पार्टनर संज्ञा पी.आर के संस्थापक गौरव गिरजा शुक्ला ने भी विचार व्यक्त किए। 

इसके पूर्व किशोर चौधरी की पुस्तक "मिट जाने तक" का विमोचन किया गया। इस पुस्तक की लेखनी व शीर्षक पर फतेह सिंह भाटी, डा. इंदु सिंह व हिंद युग्म के संस्थापक शैलेश भारतवासी ने चर्चा की। 


इससे पहले वाराणसी परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल  कृष्ण कुमार यादव , केन्द्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान, सारनाथ की कुलसचिव डा. सुनीता चन्द्रा, डा. हिमांशु पांडेय, रचना शर्मा एवं हिंद युग्म के संस्थापक शैलेश भारतवासी ने दीप जलाकर ‘हिंद युग्म उत्सव 2.O’  का शुभारंभ किया। विभिन्न सत्रों में किशोर चौधरी, सुषमा गुप्ता, रोहिण कुमार व संजय व्यास ने संचालन किया।






गौरतलब है कि ‘हिंद युग्म उत्सव 2.O’ में हिंदी साहित्य के सौ से भी ज्यादा लेखक, कवि, विचारक, आलोचक, विषय-विशेषज्ञ, कलाकार, साहित्य-कला और संस्कृतिकर्मी शामिल हो रहे हैं।  ‘हिंद युग्म उत्सव 2.O’ के दोनों दिन दर्जन भर सत्र होंगे जिनमें साहित्य, सिनेमा, भाषा, ऑडियोबुक, अपराध-कथा लेखन, पटकथा लेखन के साथ ही हर तरह के लेखन की संभावनाओं और उसके भविष्य पर गंभीर चर्चाएं होंगी। हिंद युग्म के संस्थापक शैलेश भारतवासी ने बताया कि  पहला हिंद युग्म उत्सव राजस्थान के बाड़मेर में 15 अक्टूबर, 2022 को संपन्न हुआ था।  हिंद युग्म उत्सव बाकी के साहित्य उत्सव से अलग है और इसका प्रारूप हिंदी भाषा और साहित्य को एक नया आयाम देने वाला है। मूलत: यह हिंदी के सितारों का उत्सव है, क्योंकि हिंद युग्म प्रकाशन की कई किताबें बेस्टसेलर हैं और कई किताबों पर फिल्में भी निर्माणाधीन हैं। हिंद युग्म से प्रकाशित सत्य व्यास के उपन्यास ‘चौरसी’ पर आधारित वेबसीरीज ‘ग्रहण’ बीते साल रिलीज हो चुकी है, वहीं  हाल ही में हिंद युग्म द्वारा ही प्रकाशित निखिल सचान के उपन्यास ‘यूपी 65’ पर इसी नाम से एक वेबसीरीज जियो सिनेमा पर रिलीज हुई, जिनसे खूब प्रशंसा बटोरी। 






शनिवार, 30 सितंबर 2023

डिजिटल क्रान्ति के युग में हिन्दी में विश्व भाषा बनने की क्षमता - कृष्ण कुमार यादव

हिन्दी में विश्व भाषा बनने की क्षमता है। जैसे-जैसे विश्व में भारत के प्रति दिलचस्पी बढ़ रही है, वैसे-वैसे हिन्दी के प्रति भी रुझान बढ़ रहा है। आज 'अमृत काल' में  परिवर्तन और विकास की भाषा के रूप में हिन्दी के महत्व को नये सिरे से रेखांकित किया जा रहा है। हिन्दी अपनी सरलता, सुबोधता, वैज्ञानिकता के कारण ही आज विश्व में तीसरी सबसे बड़ी बोली जाने वाली भाषा है। वैश्विक स्तर पर हिंदी बोलने व समझने वालों की संख्या 1अरब 40 करोड़ है।इस आधार पर देखें तो 2030 तक दुनिया का हर पांचवां व्यक्ति हिंदी बोलेगा। दुनिया के 200 से ज्यादा विदेशी विश्वविद्यालयों में हिन्दी पढ़ाई जा रही है। उक्त उद्गार वाराणसी परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने प्रधान डाकघर, वाराणसी में 29 सितंबर, 2023 को आयोजित हिंदी पखवाड़ा समापन व पुरस्कार वितरण समारोह की अध्यक्षता करते हुए व्यक्त किये। 

इस अवसर पर पोस्टमास्टर जनरल ने विशिष्ट अतिथि द्वय वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. श्रीप्रकाश शुक्ल और आकाशवाणी के सहायक निदेशक श्री राजेश गौतम संग क्षेत्रीय कार्यालय, प्रधान डाकघर, वाराणसी पूर्वी मंडल और पश्चिमी मंडल के कुल 48 डाककर्मियों को विभिन्न प्रतियोगिता के विजेता रूप में पुरस्कृत किया। 

पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि हिंदी हमारे रोजमर्रा की भाषा है और इसे सिर्फ पखवाड़ा से जोड़कर देखने की जरूरत नहीं है। जरूरत इस बात की है कि हम इसके प्रचार-प्रसार और विकास के क्रम में आयोजनों के साथ ही अपनी दैनिक दिनचर्या से भी जोड़ें। हिन्दी आज सिर्फ साहित्य और बोलचाल की ही भाषा नहीं, बल्कि विज्ञान-प्रौद्योगिकी से लेकर संचार-क्रांति एवं सूचना-प्रौद्योगिकी से लेकर व्यापार की भाषा बनने की ओर अग्रसर है। डिजिटल क्रान्ति के इस युग में वेबसाइट्स, ब्लॉग और सोशल मीडिया ने हिन्दी का दायरा और भी बढ़ा दिया है। 

वरिष्ठ साहित्यकार एवं बीएचयू में प्रोफ़ेसर श्रीप्रकाश शुक्ल ने कहा कि हिन्दी सिर्फ एक भाषा ही नहीं बल्कि हम सबकी पहचान है, यह हर हिंदुस्तानी का हृदय है। हिंदी की सबसे बड़ी ताकत उसके बोलने वालों की बड़ी संख्या है। लोकभाषा और जनभाषा के रूप में हिंदी भारतीय समाज के बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व हजारों वर्षों से करती रही है। हिंदी हमारी मातृभाषा के साथ-साथ राजभाषा भी है, ऐसे में इसके विकास के लिए जरुरी है कि हम हिंदी भाषा को व्यवहारिक क्रियाकलापों के साथ-साथ राजकीय कार्य में भी प्राथमिकता दें।

आकाशवाणी के सहायक निदेशक श्री राजेश गौतम ने कहा कि राजभाषा के साथ-साथ भारतीय भाषाओं और बोलियों के बीच संपर्क भाषा के रूप में भी हिंदी ने नए आयाम गढ़े हैं। राजभाषा के रूप में हिंदी के विकास के लिए भारत सरकार द्वारा अनेक प्रयास किए गए हैं। 

सहायक निदेशक राजभाषा श्री बृजेश शर्मा ने बताया कि डाक विभाग की ओर से हिंदी पखवाडे़ के दौरान निबंध, पत्र लेखन, टंकण, काव्य पाठ, टिप्पणी व आलेखन प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसमें सभी कर्मियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और हिन्दी पखवाड़े को सफल बनाने में अपना योगदान दिया।  

कार्यक्रम में प्रवर डाक अधीक्षक राजन, सहायक निदेशक राजभाषा बृजेश शर्मा, आरके चौहान, सहायक अधीक्षक दिलीप कुमार, अजय कुमार, डाक निरीक्षक श्रीकांत पाल, इंद्रजीत पाल, दिलीप पांडेय, सर्वेश सिंह, साधना मिश्रा, सहित तमाम विभागीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में स्वागत सहायक निदेशक राजभाषा बृजेश शर्मा, आभार ज्ञापन प्रवर डाक अधीक्षक राजन और संचालन सहायक अधीक्षक अजय कुमार ने किया।




शुक्रवार, 15 सितंबर 2023

हिंदी भारतीय परंपरा, संस्कृति व संस्कारों की सच्ची संवाहक - कृष्ण कुमार यादव

हिंदी भारतीय परंपरा, जीवन मूल्यों, संस्कृति व संस्कारों की सच्ची संवाहक, संप्रेषक और परिचायक है। इसके प्रचार-प्रसार से देश में एकता की भावना और सुदृढ़ होगी। सृजन एवं अभिव्यक्ति की दृष्टि से हिंदी दुनिया की अग्रणी भाषाओं में से एक है। ऐसे में हिंदी में गर्व से कार्य करने और अपनी भाषा को समृद्ध करने में सभी को योगदान देना होगा। उक्त उद्गार वाराणसी परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने डाक विभाग द्वारा क्षेत्रीय कार्यालय में आयोजित हिंदी दिवस और तदनुसार आरम्भ हिंदी पखवाड़ा का शुभारंभ करते हुए व्यक्त किये। इससे पूर्व उन्होंने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर और दीप प्रज्वलित कर हिंदी पखवाड़ा का शुभारम्भ किया।

पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि अनेकता में एकता को स्थापित करने की सूत्रधार 'हिन्दी भाषा' भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है,इसकी सबसे बड़ी ताक़त इसकी मौलिकता और सरलता है। भारत सरकार द्वारा विकास योजनाओं तथा नागरिक सेवाएं प्रदान करने में हिंदी के प्रयोग को निरंतर बढ़ावा दिया जा रहा है। आज संयुक्त राष्ट्र संघ जैसी संस्थाओं में भी हिंदी की गूंज सुनाई देने लगी है।

सहायक निदेशक राजभाषा श्री बृजेश शर्मा  ने बताया कि डाक विभाग की ओर से 14 से 29 सितंबर तक आयोजित हिंदी पखवाडे़ में तमाम प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जायेगा।

कार्यक्रम में सहायक निदेशक राजभाषा बृजेश शर्मा, आरके चौहान, लेखाधिकारी प्लाबन नस्कर, सहायक लेखाधिकारी संतोषी राय,  डाक निरीक्षक श्रीकान्त पाल, रमेश यादव, श्रीप्रकाश गुप्ता, राकेश कुमार, विवेक कुमार, मनीष कुमार, रामचंद्र, सहित तमाम तमाम विभागीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन  शंभु  प्रसाद गुप्ता ने किया।









हिंदी भारतीय परंपरा, संस्कृति व संस्कारों की सच्ची संवाहक - पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव

शनिवार, 5 अक्टूबर 2019

सोशल मीडिया ने बढ़ाया हिंदी का दायरा -डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव

सृजन एवं अभिव्यक्ति की दृष्टि से हिंदी दुनिया की अग्रणी भाषाओं में से एक है। हिन्दी सिर्फ एक भाषा ही नहीं बल्कि हम सबकी पहचान है, यह हर हिंदुस्तानी का हृदय है। हिन्दी को राष्ट्रभाषा  किसी सत्ता ने  नहीं बनाया, बल्कि भारतीय भाषाओं और बोलियों के बीच संपर्क भाषा के रूप में जनता ने इसे चुना। उक्त उद्गार लखनऊ (मुख्यालय) परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं और चर्चित साहित्यकार व ब्लॉगर श्री कृष्ण कुमार यादव ने जवाहर नवोदय विद्यालय, पिपरसंड, लखनऊ में राजभाषा हिंदी पर आयोजित संगोष्ठी का शुभारम्भ करते हुए बतौर मुख्य अतिथि कहीं। कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप-प्रज्वलन और मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुआ। मानस, उपमा, अनन्या और सुशील ने सस्वर कविता-वाचन के माध्यम से शमां बाँधा। 


इस अवसर पर विद्यालय के बच्चों ने साहित्यिक-सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से लोगों का मन मोह लिया। डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव ने प्रधानाचार्य श्री जेसी गुप्ता संग विद्यालय की हस्तलिखित पत्रिका "कोशिशें" का विमोचन भी किया।


डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि हिन्दी में विश्व भाषा बनने की क्षमता है। हिन्दी आज सिर्फ साहित्य और बोलचाल की ही भाषा नहीं, बल्कि विज्ञान-प्रौद्योगिकी से लेकर संचार-क्रांति और सूचना-प्रौद्योगिकी से लेकर व्यापार की भाषा भी बनने की ओर अग्रसर है।  श्री यादव ने कहा कि डिजिटल क्रान्ति के इस युग में वेबसाइट्स, ब्लॉग और फेसबुक व टविटर जैसे  सोशल मीडिया ने तो हिन्दी का दायरा और भी बढ़ा दिया है। विश्व भर में हिन्दी बोलने वाले 50 करोड़ तो इसे समझने वालों की संख्या 80 करोड़ है।  विश्व के लगभग 150 विश्वविद्यालयों में हिन्दी पढ़ाई जाती है, जो कि हिन्दी की बढ़ती लोकप्रियता का परिचायक है।
जवाहर नवोदय विद्यालय, पिपरसंड, लखनऊ के प्रधानाचार्य श्री जेसी गुप्ता ने कहा कि, यह हम सभी के लिए सौभाग्य का विषय है कि डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव भी नवोदय विद्यालय के पुरा-छात्र रहे हैं और हिंदी को लेकर अपनी रचनात्मक प्रतिबद्धता व अग्रणी सोच से आपने साहित्य जगत में एक नया मुकाम बनाया है।  प्रधानाचार्य श्री जेसी गुप्ता ने कहा कि संविधान में वर्णित सभी प्रांतीय भाषाओं का पूर्ण आदर करते हुए इस विशाल बहुभाषी राष्ट्र को एक सूत्र में बांधने में भी हिन्दी की एक महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में हिन्दी भाषा के प्रयोग पर हमें गर्व महसूस करना चाहिए। उप प्रधानाचार्य प्रभात मारवाह ने  कहा कि हिंदी पूरे देश को जोड़ने वाली भाषा है और सामान्य जीवन में भी इसे बहुतायत में अपनाया जाना चाहिये।
इस अवसर पर प्रधानाचार्य जेसी गुप्ता,  उप प्रधानाचार्य प्रभात मारवाह, डॉ. वाई सी द्विवेदी, कमर सुल्तान, सुधा पाठक, प्रीति तिवारी, सुमति श्रीवास्तव, पीपी शुक्ला, डॉ. मो. ताहिर सहित नवोदय विद्यालय के तमाम अध्यापकगण व विद्यार्थी  उपस्थित रहे।  





जवाहर नवोदय विद्यालय, लखनऊ में राजभाषा हिंदी पर आयोजित संगोष्ठी का डाक निदेशक केके यादव ने किया शुभारम्भ 
हिन्दी में विश्व भाषा बनने की क्षमता - डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव 
हिन्दी सिर्फ एक भाषा ही नहीं बल्कि हम सबकी पहचान है-डाक निदेशक केके यादव 
सोशल मीडिया ने बढ़ाया हिंदी का दायरा -डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव 

बुधवार, 24 जनवरी 2018

भारत सरकार के राजभाषा विभाग की पत्रिका "राजभाषा भारती" भी हुई साहित्यिक चोरी का शिकार

हिंदी साहित्य में आजकल रचनाओं की चोरी धड़ल्ले से हो रही है। इसका सबसे आसान जरिया बना है इंटरनेट, जहाँ आपकी रचना के प्रकाशन या सोशल मीडिया पर आपके मौलिक विचारों के प्रस्फुटन के साथ ही कुछेक साहित्यिक चोर धड़ल्ले से उन्हें कॉपी-पेस्ट कर अपने नाम से अन्यत्र प्रकाशित करवा साहित्यकार और लेखक होने का दम्भ भरने लगते हैं। ऐसे लोग एक जगह पकड़े जाते हैं, उनकी लानत-मलानत होती है...पर अपनी आदत से मजबूर फिर वही कार्य दोहराने लगते हैं।
उज्जैन (मध्यप्रदेश) के एक तथाकथित साहित्यकार  डॉ. प्रभु चौधरी ने सितंबर, 2016 में मेरे (कृष्ण कुमार यादव) एक लेख "विदेशों में भी पताका फहरा रही है हिंदी" को शीर्षक में कुछ बदलाव कर "विश्व में भी अपनी पहचान बना रही है हिंदी" शीर्षक से अपने नाम से जबलपुर से प्रकाशित "प्राची" पत्रिका के सितंबर अंक में प्रकाशित कराया था।  सबसे रोचक बात तो यह रही कि 'प्राची' पत्रिका में ही 4 वर्ष पूर्व मेरा यह लेख प्रकाशित हो चुका था। खैर, पत्रिका के संपादक श्री राकेश भ्रमर ने अगले महीने ही संपादकीय में इस तथाकथित साहित्यकार डॉ. प्रभु चौधरी की जमकर क्लास ली और यह घोषित भी किया कि उसकी रचनाएँ पत्रिका में अब प्रकाशित नहीं की जाएँगी। 

 और अब पुनः मेरे  (कृष्ण कुमार यादव) उसी लेख "विदेशों में भी पताका फहरा रही है हिंदी" को उक्त डॉ. प्रभु चौधरी ने भारत सरकार के राजभाषा विभाग द्वारा प्रकाशित पत्रिका राजभाषा भारती के अप्रैल-जून 2017 अंक में अपने नाम से प्रकाशित कराया है। ऐसी निर्लज्जता पर क्या कहा जाए ? इस प्रकार के साहित्यिक डॉक्टरों का क्या इलाज है ?? 
ख़ैर, इस मामले को जब हमने सोशल मीडिया पर शेयर किया और तमाम साहित्यिक मित्रों से भी इसकी चर्चा की व साथ में राजभाषा भारती पत्रिका के संपादक को भी लिखा तो उक्त डॉ. प्रभु चौधरी का माफ़ीनामा आया 

..........आप भी देखिए, कहीं प्रभु चौधरी जैसे चोर लेखक आपकी रचनाओं और विचारों को अपने नाम से प्रकाशित करवा अपनी पीठ न थपथपा रहे हों !!