जोधपुर की धरती कहने को तो मरुस्थली है, पर साहित्यिक-सांस्कृतिक रूप से काफी समृद्ध है। यहाँ आने पर तमाम साहित्यकारों से मुलाकात हुई। हाल ही में हमारे आवास पर हुई एक मुलाकात की ग्रुप फोटो : प्रसिद्ध समालोचक और संपादक डॉ. रमाकांत शर्मा, रिटायर्ड जज और वरिष्ठ साहित्यकार श्री मुरलीधर वैष्णव, वरिष्ठ लेखक डॉ. हरिदास व्यास, चर्चित कवयित्री व लेखिका डॉ. पद्मजा शर्मा, चर्चित ब्लॉगर लेखिका आकांक्षा यादव, साहित्यकार व ब्लॉगर कृष्ण कुमार यादव, निदेशक डाक सेवाएं, राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर, और प्यारी बेटियाँ नन्ही ब्लॉगर और राष्ट्रीय बाल पुरस्कार विजेता अक्षिता (पाखी) और अपूर्वा।
इस ब्लॉग पर आप रूबरू होंगे कृष्ण कुमार यादव की साहित्यिक रचनात्मकता और अन्य तमाम गतिविधियों से...
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मंगलवार, 17 अप्रैल 2018
रविवार, 30 दिसंबर 2012
बच्चे की निगाह
कभी देखो समाज को
बच्चे की निगाहों से
पल भर में रोना
पल भर में खिलखिलाना।
अरे! आज लड़ाई हो गई
शाम को दोनों गले मिल रहे हैं
एक दूसरे को चूम रहे हैं।
भीख का कटोरा लिए फिरते
बूढ़े चाचा की दशा देखी नहीं गई
माँ की नजरें चुराकर
अपने हिस्से की दो रोटियाँ
दे आता है उसे।
दीवाली है, ईद है
अपनी मंडली के साथ
मिठाईयाँ खाये जा रहा है
क्या फर्क पड़ता है
कौन हिन्दू है, कौन मुसलमां।
सड़क पर कुचल आता है आदमी
लोग देखते हुए भी अनजान हैं
पापा! पापा! गाड़ी रोको
देखो उन्हें क्या हो गया ?
छत पर देखा
एक कबूतर घायल पड़ा है
उठा लाता है उसे
जख्मों पर मलहम लगाता है
कबूतर उन्मुक्त होकर उड़ता है।
बच्चा जोर से तालियाँ बजाकर
उसके पीछे दौड़ता है
मानों सारा आकाश
उसकी मुट्ठी में है।
- कृष्ण कुमार यादव (अपने काव्य-संग्रह 'अभिलाषा' से)
(चित्र में बिटिया अपूर्वा)
शनिवार, 27 अक्टूबर 2012
बिटिया अपूर्वा हुईं दो साल की : जीवन के विविध रंग
मिलिए आज की बर्थ-डे गर्ल से. ये हैं हमारी प्यारी सी बिटिया रानी अपूर्वा, जो आज अपना दूसरा हैप्पी बर्थ-डे सेलिब्रेट कर रही हैं...वैसे ये भावी ब्लागर भी हैं. आज आपको दिखाते हैं अपूर्वा की ढेर सारी गतिविधियाँ, इनका नटखटपन और मासूमियत.
फूल किसे नहीं अच्छे लगते...
कैसी लग रही हूँ सन-ग्लास में..अभी मेरी साइज़ का सन-ग्लास ढूंढा जा रहा है..
शंकर जी तो गले में साँप धारण करते हैं, मेरे लिए तो यह खिलौना ही सही.
अब मैं बड़ी हो गई हूँ. ममा का शूज़ तो पहन ही सकती हूँ.
अभी पढ़ भले ही नहीं सकती हैं, पर पुस्तकों को उलट-पलटकर चित्रों की दुनिया में खोने से कौन रोक सकता है !!
अपूर्वा अपनी दीदी अक्षिता (पाखी) की सबसे अच्छी दोस्त है.
ममा-पापा की राह पर..अभी से कलम से दोस्ती.
यह मासूम चेहरा..नटखटपन.
लान में शाम को पौधों को पानी देना नहीं भूलतीं अपूर्वा.
अपने लॉन में लगे आम के पेड़ पर आम आ गए तो अपूर्वा ने खूब आम तोड़े और खाए.
दिन भर उछल-कूद मचाना, दौड़ना..वाह क्या दिन हैं.
टाइगर की सवारी का आनंद ही कुछ और है.
अपूर्वा के दुसरे जन्मदिन पर ढेरों बधाई, आशीर्वाद, स्नेह और प्यार.
!! आपके आशीर्वाद और स्नेह की आकांक्षा बनी रहेगी !!
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गुरुवार, 27 अक्टूबर 2011
बुधवार, 10 नवंबर 2010
बिटिया रानी अपूर्वा (तान्या) आज 15 दिन की
फ़िलहाल इस महीने के अंत तक पूरा परिवार पुन: पोर्टब्लेयर में आ जायेगा. यहाँ तो मौसम भी सुहाना है, जबकि उधर ठण्ड का एहसास होने लगा है. खास बात यह है कि मेरा व बिटिया दोनों का जन्मांक 9 है. पाखी कि तो ख़ुशी ही नहीं समां रही है, उसे उसका ट्वाय जो मिल गया है, दिन भर उसे गोद में लेने को दौड़ती हैं....मेरी और आकांक्षा की ख़ुशी इससे और भी दुगुनी हो जाती है. हमारे परिवार के इस नए मेहमान को आप सभी के प्यार, स्नेह और आशीष की चाहत बनी रहेगी !!
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