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बुधवार, 5 फ़रवरी 2025

सृजन की कसौटी पर हिंदी पत्रिका 'सरस्वती सुमन' का 'आकांक्षा यादव-कृष्ण कुमार यादव युगल अंक'

कृष्ण कुमार यादव और आकांक्षा यादव पर आधारित सरस्वती सुमन का दिसंबर-2024 का अंक 'आकांक्षा-कृष्ण युगल अंक' पाकर हृदय गदगद हो गया। विश्वास ही नहीं होता कि भारतीय डाक सेवा के अधिकारी कृष्ण कुमार यादव प्रशासनिक अधिकारी अधिक हैं या साहित्यकार। इस तरह का संयोग भी कम ही मिलता है जब दम्पति दोनों ही साहित्यकार हों-राजेंद्र यादव और मन्नू भंडारी, रवीन्द्र कालिया और ममता कालिया आदि कुछ नाम ही याद आते हैं। 


यदि आप दोनों की तुलना की जाए तो भी यह तय कर पाना मुश्किल है कि आप में से पूर्ण समर्पित साहित्यकार कौन है। आपने अपनी रचनाओं में भ्रूण-हत्या,बालिका शिक्षा,महिला,पर्यावरण, रिश्ते, कुरीति जैसे अनेक विषयों पर बेबाकी से लिखा है। कविता के बारे में कृष्ण कुमार कहते हैं -'बदल रही है आज की कविता, वह सिर्फ सौंदर्य नहीं गढ़ती, बल्कि समेटती है अपने में, सामाजिक सरोकारों को भी।' अंडमान के आदिवासियों की भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहते हैं -'चौंकती है हर आहट, खड़े हो जाते हैं हिरनों की तरह कान, कोई आ रहा है उनकी दुनिया में , सभ्यता का जामा पहने'। रिश्तों का अर्थशास्त्र में वह कहते हैं -'दरकते रिश्ते इस तरह के हो गए हैं, जैसे किसी उद्योगपति ने बेच दी हो घाटे वाली कंपनी।'

आकांक्षा यादव कहती हैं-' शब्द की नियति स्थिरता में नहीं, उसकी गति में है और जीवंतता में है, जीवंत होते शब्द रचते हैं इक इतिहास'।

आप दोनों ने बहुत अच्छी कविताएं,अच्छी लघु कथाएं, बहुत अच्छे लेख और कहानियां लिखी हैं। लेखों में बहुत ही अच्छी-अच्छी सारगर्भित जानकारियां दी हैं।आपके परिवार में आपके पिता, आप स्वयं दंपति और आपकी पुत्रियां भी साहित्य के प्रति समर्पित हैं, यह एक शुभ संकेत है। आप दोनों को बहुत-बहुत साधुवाद। आप इसी तरह से सृजन करते रहें।


-डाॅ. गोपाल राजगोपाल
वरिष्ठ आचार्य एवं राजभाषा सम्पर्क अधिकारी
आर.एन.टी.मेडिकल कॉलेज,उदयपुर, राजस्थान
मो.-9414342523
 



पत्रिका - सरस्वती सुमन/ मासिक हिंदी पत्रिका/ प्रधान सम्पादक-डॉ. आनंद सुमन सिंह/ सम्पादक-किशोर श्रीवास्तव/संपर्क -'सारस्वतम', 1-छिब्बर मार्ग, आर्य नगर, देहरादून, उत्तराखंड -248001, मो.-7579029000, ई-मेल :saraswatisuman@rediffmail.com

सोमवार, 3 फ़रवरी 2025

कृष्ण कुमार यादव और आकांक्षा की युगल रचनाधर्मिता पर केंद्रित 'सरस्वती सुमन' का संग्रहणीय विशेषांक

हिंदी भाषा और साहित्य के विकास में आदिकाल से ही तमाम साहित्यकारों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। किसी कवि, लेखक या साहित्यकार को अगर ऐसा जीवनसाथी मिल जाए जो खुद भी उसी क्षेत्र से जुड़ा हो तो यह सोने पर सुहागा जैसी बात होती है। एक तरीके से देखा जाए तो ऐसे लेखकों या लेखिकाओं को उनके घर में ही पहला श्रोता, प्रशंसक या आलोचक मिल जाता है। इसी कड़ी में देव भूमि कहे जाने वाले उत्तराखंड के देहरादून से प्रकाशित 'सरस्वती सुमन' मासिक पत्रिका ने हिंदी साहित्य की एक लोकप्रिय युगल जोड़ी आकांक्षा यादव और कृष्ण कुमार यादव की रचनाधर्मिता पर केंद्रित 80 पेज का शानदार विशेषांक दिसंबर-2024 में प्रकाशित किया है।

 इसमें दोनों की चयनित कविताओं, लघुकथाओं, कहानियों, लेखों को सात खंडों में शामिल किया गया है, वहीं विभिन्न पन्नों पर उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं को समेटती तस्वीरों के माध्यम से इसे और भी रोचक बनाया गया है। कवर पेज पर इस युगल की खूबसरत तस्वीर पहली ही नज़र में आकृष्ट करती है। अपने प्रकाशन के 23 वर्षों में 'सरस्वती सुमन' पत्रिका ने तमाम विषयों और व्यक्तित्वों पर आधारित विशेषांक प्रकाशित किये हैं, परंतु किसी साहित्यकार दंपति के युगल कृतित्व पर आधारित इस पत्रिका का पहला विशेषांक है। इसके लिए पत्रिका के प्रधान संपादक डॉ. आनंद सुमन सिंह और संपादक श्री किशोर श्रीवास्तव हार्दिक साधुवाद के पात्र हैं। 'वेद वाणी' और 'मेरी बात' के तहत डॉ. आनंद सुमन सिंह ने साहित्य एवं संस्कृति के सारस्वत अभियान को आगे बढ़ाया है। अपने संपादकीय में डॉ. सिंह ने कृष्ण कुमार और आकांक्षा से अण्डमान-निकोबार द्वीप समूह में परिचय प्रगाढ़ता का भी जिक्र किया है। 


सम्प्रति उत्तर गुजरात परिक्षेत्र, अहमदाबाद के पोस्टमास्टर जनरल पद पर कार्यरत, मूलत: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जनपद निवासी श्री कृष्ण कुमार यादव जहाँ भारतीय डाक सेवा के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी हैं, वहीं उनकी जीवनसंगिनी श्रीमती आकांक्षा यादव एक कॉलेज में प्रवक्ता रही हैं। पर सोने पर सुहागा यह कि दोनों ही जन साहित्य, लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में भी समान रूप से प्रवृत्त हैं। देश-विदेश की तमाम पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशन के साथ ही इंटरनेट पर भी इस युगल की रचनाओं के बखूबी दर्शन होते हैं। विभिन्न विधाओं में श्री कृष्ण कुमार यादव की अब तक कुल 7 पुस्तकें प्रकाशित हैं, वहीं श्रीमती आकांक्षा की 4 पुस्तकें प्रकाशित हैं। 

 


 

प्रधान संपादक डॉ. आनंद सुमन सिंह ने इस युगल विशेषांक के संबंध में लिखा है, " यह युगल विगत लगभग 20 वर्षों से सरस्वती सुमन पत्रिका के साथ निरंतर जुड़ा है। इसलिए जब 'युगल विशेषांक' निकालने का विचार बना तो सबसे पहले उन्हीं से शुरुआत की जा रही है। अब तो इस युगल की दोनों पुत्रियाँ-अक्षिता और अपूर्वा भी लेखन क्षेत्र में पूरी निष्ठा के साथ जुटी हैं और अपनी शिक्षा-दीक्षा के साथ-साथ साहित्य सेवा में भी सक्रिय हैं। 'युगल विशेषांक' का उद्देश्य केवल एक साहित्यिक परिवार से साहित्य सेवियों को परिचित करवाना है और उनके लेखन की हर विधा को पाठकों के सम्मुख रखना है। अनुजवत कृष्ण कुमार यादव और उनकी सहधर्मिणी आकांक्षा यादव दोनों ही उच्च कोटि के साहित्यसेवी हैं और उनके विवाह की वर्षगांठ (28 नवंबर, 2024) पर यह अंक साहित्य प्रेमियों के लिए उपयोगी होगा ऐसी हमारी मान्यता है।  


देश-विदेश में तमाम सम्मानों से अलंकृत यादव दंपति पर प्रकाशित यह विशेषांक साहित्य प्रेमियों के लिए एक संग्रहणीय अंक है। साहित्य समाज का दर्पण है। इस दर्पण में पति-पत्नी के साहित्य को समाज के सामने लाकर 'सरस्वती सुमन' ने एक नया विमर्श भी खोला है। आशा की जानी चाहिये कि अन्य पत्रिकाएँ भी इस तरह के युगल विशेषांक प्रकाशित करेंगी।  निश्चितत: इस तरह के प्रयास न केवल साहित्य में बल्कि दांपत्य जीवन में भी रचनात्मकता को और प्रगाढ़ करते हैं।

समीक्ष्य पत्रिका - सरस्वती सुमन/ मासिक हिंदी पत्रिका/ प्रधान सम्पादक-डॉ. आनंद सुमन सिंह/ सम्पादक-किशोर श्रीवास्तव/संपर्क -'सारस्वतम', 1-छिब्बर मार्ग, आर्य नगर, देहरादून, उत्तराखंड -248001, मो.-7579029000, ई-मेल :saraswatisuman@rediffmail.com

समीक्षक : प्रोफेसर (डॉ.) गीता सिंह, अध्यक्ष-स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग, डी.ए.वी  पी.जी कॉलेज, आजमगढ़ (उ.प्र.), मो.-9532225244







बुधवार, 14 अगस्त 2024

गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्रभाई पटेल जी से पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव ने की शिष्टाचार मुलाकात, भेंट की पुस्तकें

उत्तरी गुजरात परिक्षेत्र, अहमदाबाद के नवागत पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने गुजरात के मुख्यमंत्री श्री भूपेन्द्रभाई पटेल जी से गांधीनगर स्थित उनके कार्यालय में 12 अगस्त, 2024 को शिष्टाचार मुलाकात की। इस दौरान डाक विभाग द्वारा सेवाओं में किये जा रहे नवाचार के बारे में उन्हें जानकारी दी।




मुलाकात के दौरान पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने मुख्यमंत्री को अपनी  पुस्तक '16 आने 16 लोग' और आकांक्षा यादव की पुस्तक 'प्रकृति, संस्कृति और स्त्री' भेंट की। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर प्रसाद के साथ भारत सरकार के राज चिन्ह के साथ जारी 'जय हिंद' डाक टिकट और 'रामायण : राम दरबार' पर जारी डाक टिकट की खूबसूरत प्रतिकृति भी भेंट की, जिसे प्राप्त कर मुख्यमंत्री जी काफी अभिभूत हुए और अपनी शुभकामनायें दीं।

गौरतलब है कि मूलत: उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ निवासी श्री कृष्ण कुमार यादव ख़्यात हिन्दी साहित्यकार, लेखक व ब्लॉगर भी हैं। भारतीय डाक सेवा के वर्ष 2001 बैच के अधिकारी श्री यादव की विभिन्न विधाओं में 7 पुस्तकें  प्रकाशित हो चुकी हैं। एक कुशल व संवेदनशील प्रशासक के रूप में लोकप्रिय श्री यादव की शिक्षा जवाहर नवोदय विद्यालय, आज़मगढ़ और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से हुई है। यह भी सुखद संयोग है कि श्री यादव ने सिविल सेवाओं में अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2003 में प्रवर डाक अधीक्षक, सूरत मण्डल के रूप में की थी। उसके बाद लखनऊ, कानपुर, अण्डमान-निकोबार द्वीप समूह, प्रयागराज, जोधपुर, लखनऊ, वाराणसी के बाद एक बार फिर से गुजरात में पोस्टमास्टर जनरल के पद पर नियुक्ति हुई है।


ગુજરાતના મુખ્યમંત્રી ભૂપેન્દ્રભાઈ પટેલ સાથે  પોસ્ટમાસ્ટર જનરલ  કૃષ્ણ કુમાર યાદવે કરી શુભેચ્છા મુલાકાત


ઉત્તર ગુજરાત ક્ષેત્ર, અમદાવાદના નવા પોસ્ટમાસ્ટર જનરલ શ્રી કૃષ્ણકુમાર યાદવે ગુજરાતના  મુખ્યમંત્રી શ્રી ભૂપેન્દ્રભાઈ પટેલસાથે ગાંધીનગરમાં તેમના કાર્યાલયમાં શુભેચ્છામુલાકાત લીધી. આ દરમિયાન, પોસ્ટ વિભાગ દ્વારા સેવાઓમાં કરવામાં આવેલી નવીનતા વિશે તેમને માહિતી આપવામાં આવી.

મુલાકાત દરમિયાન, પોસ્ટમાસ્ટર જનરલ શ્રી કૃષ્ણકુમાર યાદવે મુખ્યમંત્રીશ્રીને પોતાની પુસ્તકો પણ ભેટ આપી. શ્રી કાશી વિશ્વનાથ મંદિરના પ્રસાદની સાથે ભારત સરકારના રાજચિહ્નિત'જય હિંદ' ડાક ટિકિટ અને 'રામાયણ : રામ દરબાર' ઉપર પ્રકાશિત ડાક ટિકિટ ની સુંદર નકલ પણ ભેટ આપી, જેને પ્રાપ્ત કરીને મુખ્યમંત્રીશ્રીખૂબ જ પ્રભાવિત થયા અને પોતાની શુભકામનાઓ આપી.

વિશેષ નોંધનીય છે કે મૂળઉત્તરપ્રદેશના આઝમગઢ નિવાસી શ્રી કૃષ્ણકુમાર યાદવ પ્રખ્યાત હિન્દી સાહિત્યકાર, લેખક અને બ્લોગર પણ છે. ભારતીય પોસ્ટ સેવા ના વર્ષ 2001 બેચના અધિકારી શ્રી યાદવની વિવિધ શૈલીઓમાં 7 પુસ્તકો પ્રકાશિત થઈ ચૂકેલ છે. એક કુશળ અને સંવેદનશીલ વહીવટદાર તરીકે લોકપ્રિય શ્રી યાદવનું શિક્ષણ જવાહર નવોદય વિદ્યાલય, આઝમગઢ અને અલાહાબાદ યુનિવર્સિટીમાંથી થયેલ છે. આ પણ એક સવિશેષતા છે કે શ્રી યાદવએ સિવિલ સર્વિસિસ માં પોતાની કારકિર્દીની શરૂઆત વર્ષ ૨૦૦૩ માં પ્રવર ડાક અધિક્ષક, સુરત વિભાગતરીકે કરી હતી. ત્યારબાદ લખનઉ, કાનપુર, અંદમાન-નિકોબાર દ્વીપસમૂહ, પ્રયાગરાજ, જોધપુર, લખનઉ, વારાણસી અને પછી ફરી એક વાર ગુજરાતમાં પોસ્ટમાસ્ટર જનરલના પદ પર નિમણૂક થઈ છે.


Postmaster General Krishna Kumar Yadav made a courtesy call on the Chief Minister of Gujarat, Bhupendrabhai Patel

Shri Krishna Kumar Yadav, Postmaster General, North Gujarat Region, Ahmedabad has made a courtesy call on the  Chief Minister of Gujarat, Shri Bhupendrabhai Patel, at his office in Gandhinagar. During this, initiatives taken by Department of Posts in various fields were briefed to Hon’ble Chief Minister and he appreciated the active role played by India Post in the state and assured of all possible help.

During the meeting, Postmaster General Shri Krishna Kumar Yadav gifted his book "16 Aane 16 Log" and Book of Akanksha Yadav "Prakriti, Sanskriti aur Stri" to the Chief Minister. Replica of a stamp 'Jai Hind-15 August 1947' displaying the emblem of Government of India and  'Ramayana' stamps released by India Post were also presented along with Shri Kashi Vishwanath Temple Prasad. The Chief Minister was quite overwhelmed by these gifts and expressed his best wishes.

It is noteworthy that Shri Krishna Kumar Yadav is a renowned Hindi literature, author and blogger. An Officer of 2001 batch of the Indian Postal Service, Sh. Yadav has authored 7 books across various genres. A native of Azamgarh district in Uttar Pradesh, Shri Yadav has received his early education from Jawahar NavodayaVidyalaya, Azamgarh and did Post graduation from University of Allahabad. It is a coincidence that he started his career in civil services as Senior Superintendent of Post offices, Surat Division in the year 2003. After that serving in various capacities in Lucknow, Kanpur, Andaman and Nicobar Islands, Prayagraj, Jodhpur, Lucknow, Varanasi, he has once again joined as Postmaster General in Gujarat circle on 9th July, 2024.






 


रविवार, 25 फ़रवरी 2024

Azamgarh Sahitya Mahotsav 2024 : साहित्य, कला, संस्कृति में नए आयाम खोले हैं डिजिटल युग ने - पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव

डिजिटल युग में साहित्य देशज से भूमंडलीकरण की ओर बढ़ रहा है। साहित्य, कला, संस्कृति सहित जीवन के विभिन्न पहलुओं में डिजिटल युग ने महत्वपूर्ण बदलाव लाए हैं। साहित्यकार, प्रकाशक, संपादक से लेकर पाठक तक सभी के लिए डिजिटल साहित्य ने संभावनाओं के लिए नए द्वार खोले हैं। उक्त उद्गार वाराणसी परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल एवं ख्यात ब्लॉगर व साहित्यकार श्री कृष्ण कुमार यादव ने आज़मगढ़ साहित्य महोत्सव में 'डिजिटल युग में साहित्य पर परिचर्चा' सत्र को संबोधित करते हुए व्यक्त किये।




श्री हरिऔध कला केंद्र, आज़मगढ़ में आयोजित तीन दिवसीय 'आज़मगढ़ साहित्य महोत्सव' (23-25 फरवरी) के दूसरे दिन आयोजित सत्र को संबोधित करते हुए पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि, हिन्दी और अन्य भाषाओं में साहित्य के विकास के लिए केवल सूचना प्रौद्योगिकी, आधुनिक तकनीकी एवं नवाचारी विचारों को मूर्त रूप देना ही काफ़ी नहीं है, बल्कि निरंतर विकासमान डिजिटल प्रौद्योगिकी के साथ इनके अनवरत उन्नयन एवं संवर्द्धन की गति को बढ़ाने की भी आवश्यकता है। वैश्वीकरण के दौर में वेबसाइट्स, ई-बुक्स, ई-पत्रिका, वेब-पत्रिका, ब्लॉग, सोशल मीडिया, पॉड कॉस्टिंग, चैट जीपीटी, मशीन लर्निंग, कृत्रिम मेधा ने साहित्य को नये क्षितिज प्रदान किए हैं। साहित्य मनुष्य की सोच को व्यापक बनाता है, ऐसे में जरूरी है कि ज्यादा से ज्यादा साहित्य को डिजिटल बनाया जाए ताकि वह सर्वसुलभ हो सके। श्री यादव ने कहा कि, लिखे हुए साहित्य की प्रासंगिकता सदैव बनी रहेगी। इंटरनेट की आभासी दुनिया असंभावित संभावनाओं की ओर ले जा रही है, पर मात्र गूगल कंटेंट के भरोसे न रहकर अपनी स्मृति और मौलिकता का लोप होने से बचाना होगा। 

श्री यादव ने कहा कि, डिजिटल मीडिया से लेकर सोशल मीडिया ने साहित्य में लोकतंत्र और संवाद को बढ़ावा दिया है, पर इसकी आड़ में पनपते फेक न्यूज और गलत तथ्यों से भी सतर्क रहने की जरूरत है। साहित्य समाज के लिए सदैव रोशनी का कार्य करता है, ऐसे में डिजिटल युग में साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों की भूमिका और भी बढ़ जाती है। 

श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि आज़मगढ़ रचनात्मक रूप से सदैव उर्वर रहा है। देश ही नहीं विदेशों में भी यहां के लोग अपनी प्रतिभा का परचम फहरा रहे हैं। ऐसे में डिजिटल सहित्य के माध्यम से आज़मगढ़ की विभूतियों, प्रमुख स्थानों, रचना कर्म और उपलब्धियों के बारे में विस्तृत चर्चा करते हुए नई पीढ़ियों को भी जोड़ा जा सकता है। उन्होंने राहुल सांकृत्यायन का जिक्र करते हुए कहा कि जिस दौर में इंटरनेट नहीं था, बौद्ध साहित्य की खोज में उन्होंने पूरी दुनिया का चक्कर लगाया और ज्ञान के भंडार को संरक्षित किया। उन्होंने आज़मगढ़ की मिटटी से जुड़े पं.अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध', राहुल सांकृत्यायन, शिब्ली नोमानी, चन्द्रबली पांडेय, कैफी आजमी एवं अन्य साहित्यकारों-शिक्षाविदों के अवदान के बारे में भी युवा पीढ़ी को जोड़ने पर जोर दिया। 


कार्यक्रम के आरंभ में आज़मगढ़ के अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) श्री भगत आज़ाद एवं अन्य अधिकारियों ने पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव को पुष्पगुच्छ, स्मृति चिन्ह एवं शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया।   

इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार श्री जगदीश बर्नवाल कुंद, डॉ. प्रवेश सिंह, श्री घनश्याम यादव, डॉ. जयप्रकाश यादव ने भी विचार रखे। 


वहीं, प्रथम सत्र में आज़मगढ़ मंडल के मंडलायुक्त श्री मनीष चौहान एवं जिलाधिकारी श्री विशाल भारद्वाज द्वारा  दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। मंडलायुक्त ने हरिऔध कला केंद्र में उपस्थित छात्र/छात्राओं, साहित्यकारों, कवियों एवं लेखकों को संबोधित करते हुए कहा कि यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि आजमगढ़ में पहली बार साहित्य महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। विभिन्न कार्यों के साथ ही यह हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा है, इसके लिए समय अवश्य निकालना चाहिए, इससे हमें रचनात्मक एवं ऊर्जा देने के साथ ही सोचने की क्षमता को बढ़ाता है। उन्होने कहा कि साहित्य के क्षेत्र में यह बहुत अच्छी शुरुआत है, जिससे कहानियां, कॉमिक्स एवं पुस्तकों को पढ़ लोग पहले इससे जुड़ते थे। उन्होंने कहा कि अब डिजिटल युग आ गया है, बच्चे ऑनलाइन चीजों से जुड़ने लगे हैं, इस समय में इस प्रकार के आयोजनों की प्रासंगिकता और अधिक बढ़ गई है। इस प्रकार के आयोजन से बच्चों को और अधिक जुड़ना चाहिए, जिससे इनको पता चले कि हमारी साहित्यिक धरोहर कितनी समृद्धशाली है, हमारे रचनाकारों ने कितनी अच्छी रचनाएं की हैं, चाहे वह कहानी हो, कविता हो, नाटक हो या अन्य प्रकार की रचना हो, यह सब हमारे साहित्यिक, सांस्कृतिक धरोहर है। उन्होंने कहा कि यदि समाज एवं अपने इतिहास को समझना है तो यह सब भी पढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि किसी साहित्यकार की कोई भी रचना हो, चाहे कहानी, कविता, नाटक या किसी प्रकार की साहित्य रचना हो, यह सब हमारी अमूल्य धरोहर है।

आज़मगढ़ के अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) श्री भगत आज़ाद ने आभार ज्ञापन किया। उन्होंने कहा कि आज़मगढ़ के साहित्यिक अवदान को डिजिटलीकरण करने के लिए भी पहल की जा रही है।

कार्यक्रम में डॉ. गीता सिंह, डॉ अखिलेश चन्द्र, कन्हैया लाल अस्थाना, प्रो. वेद प्रकाश उपाध्याय, प्रो. अलाउद्दीन शिबली, इलियास आजमी, उमेश चंद श्रीवास्तव, डॉ. जयप्रकाश, सरोज यादव, डॉ. इंदु, शिवप्रसाद शर्मा, प्रो. जगदंबा दुबे, शैलेंद्र, श्रीमती स्नेहलता, राकेश पांडेय, घनश्याम यादव, रामबचन यादव, संजय कुमार पांडेय, रत्नेश राय, डॉ. अखिलेश सिंह, अतुल कुमार यादव सहित तमाम साहित्यकार, कवि, बुद्धिजीवी उपस्थित रहे।