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गुरुवार, 31 जुलाई 2025

मुंशी प्रेमचंद की रचनाओं के पात्र हमारे आस-पास ही मौजूद हैं...

साहित्य समाज के आगे चलने वाली मशाल है। कालजयी साहित्य की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि, चरित्र और परिवेश के साथ बदलते युग में भी यह नया आख्यान रचता है। मुंशी प्रेमचंद का साहित्य इसी परम्परा को समृद्ध करता है। हिन्दी साहित्य के इतिहास में उपन्यास सम्राट के रूप में प्रसिद्ध मुंशी प्रेमचंद के पिता अजायब राय श्रीवास्तव लमही, वाराणसी में डाकमुंशी (क्लर्क) के रूप में कार्य करते थे। ऐसे में प्रेमचंद का डाक-परिवार से अटूट सम्बन्ध रहा। मुंशी प्रेमचंद को पढ़ते हुए पीढ़ियाँ बड़ी हो गईं। उनकी रचनाओं से बड़ी आत्मीयता महसूस होती है। ऐसा लगता है मानो इन रचनाओं के  पात्र हमारे आस-पास ही मौजूद हैं। प्रेमचंद जयंती (31 जुलाई) की पूर्व संध्या पर उक्त विचार ख़्यात ब्लॉगर व साहित्यकार एवं उत्तर गुजरात परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने व्यक्त किये।


पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि लमही, वाराणसी में जन्मे डाककर्मी के पुत्र मुंशी प्रेमचंद ने साहित्य की नई इबारत  लिखी। हिंदी कहानी तथा उपन्यास के क्षेत्र में 1918 से 1936  तक के कालखंड को 'प्रेमचंद युग' कहा जाता है। प्रेमचंद साहित्य की वैचारिक यात्रा आदर्श से यथार्थ की ओर उन्मुख है। मुंशी प्रेमचंद स्वाधीनता संग्राम के भी सबसे बड़े कथाकार हैं। मुंशी प्रेमचंद एक साहित्यकार, पत्रकार और अध्यापक के साथ ही आदर्शोन्मुखी व्यक्तित्व के धनी थे। 

श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि, प्रेमचंद की स्मृति में भारतीय डाक विभाग की ओर से 30 जुलाई 1980 को उनकी जन्मशती के अवसर पर 30 पैसे मूल्य का एक डाक टिकट भी जारी किया जा चुका है।

पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि, प्रेमचन्द के साहित्यिक और सामाजिक विमर्श आज भूमंडलीकरण के दौर में भी उतने ही प्रासंगिक हैं। उनकी कृतियों के तमाम चरित्र, मसलन- होरी, मैकू, अमीना, माधो, जियावन, हामिद कहीं-न-कहीं वर्तमान समाज के सच के सामने फिर से तनकर खड़े हो जाते हैं। प्रेमचंद ने साहित्य को सच्चाई के धरातल पर उतारा। प्रेमचन्द जब अपनी रचनाओं में समाज के उपेक्षित व शोषित वर्ग को प्रतिनिधित्व देते हैं तो निश्चिततः इस माध्यम से वे एक युद्ध लड़ते हैं और गहरी नींद सोये इस वर्ग को जगाने का उपक्रम करते हैं। श्री यादव ने कहा कि प्रेमचन्द ने अपने को किसी वाद से जोड़ने की बजाय तत्कालीन समाज में व्याप्त ज्वलंत मुद्दों से जोड़ा। उनका साहित्य शाश्वत है और यथार्थ के करीब रहकर वह समय से होड़ लेती नजर आती हैं।

 








 
 डाककर्मी के पुत्र मुंशी प्रेमचंद ने लिखी साहित्य की नई इबारत – पोस्टमास्टर जनरल  कृष्ण कुमार यादव

आज भी प्रासंगिक हैं प्रेमचन्द के साहित्यिक व सामाजिक विमर्श - पोस्टमास्टर जनरल  कृष्ण कुमार यादव

प्रेमचंद साहित्य की वैचारिक यात्रा आदर्श से यथार्थ की ओर उन्मुख है-पोस्टमास्टर जनरल  कृष्ण कुमार यादव


रविवार, 23 जून 2024

युवाओं को अपनी संस्कृति, कला और विरासत से जोड़कर बनायें एक श्रेष्ठ नागरिक - पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव

युवा आने वाले कल के भविष्य हैं। इनमें आरम्भ से ही अपनी संस्कृति, कला, विरासत, नैतिक मूल्यों के प्रति आग्रह पैदा कर एक श्रेष्ठ नागरिक बनाया जा सकता है। सोशल मीडिया के इस अनियंत्रित दौर में उनमें अध्ययन, मनन, रचनात्मक लेखन और कलात्मक प्रवृत्तियों की आदत  न सिर्फ उन्हें नकारात्मकता से दूर रखेगी अपितु उनके मनोमस्तिष्क में अच्छे विचारों का निर्माण भी करेगी। उक्त उद्गार वाराणसी परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने नव भारत निर्माण समिति द्वारा 21 जून, 2024 को 'भारतीय संस्कृति एवं योग' विषय पर आयोजित त्रिदिवसीय चित्रकला प्रतियोगिता एवं कार्यशाला में पुरस्कार वितरण करते हुए बतौर मुख्य अतिथि व्यक्त किये। उक्त कार्यक्रम का आयोजन नव भारत निर्माण समिति द्वारा वाराणसी समेत पूर्वांचल के 16 जिलों के 14-22 आयु वर्ग के विद्यार्थियों पर केंद्रित 'इन्हें पंख दें' अभियान के अंतर्गत किया गया था।







ऋषिव वैदिक अनुसंधान, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र, शिवपुर, वाराणसी में आयोजित समारोह में पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने वाराणसी मंडल के मुख्य कोषाधिकारी श्री गोविन्द सिंह, अंतर्राष्ट्रीय चित्रकार श्री एस. प्रणाम सिंह के साथ विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया और उनके उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। पूजा सिंह चौहान, पालक प्रजापति, पालक कुमारी को क्रमशः प्रथम, द्वितीय, तृतीय पुरस्कार मिला वहीं संतोषी वर्मा, सचिन सेठ, स्नेहा वर्मा, रोशनी वर्मा, मानसी पांडेय, अर्चिता, महिमा को सांत्वना पुरस्कार दिया गया। सभी को मेडल, प्रशस्ति पत्र और नकद राशि सम्मान स्वरूप दी गई।






पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि आज की व्यस्त लाइफ स्टाइल में न सिर्फ शारीरिक बल्कि संवेदना के स्तर पर मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक सशक्तिकरण भी जरूरी है। योग हमारी प्राचीन परंपरा का एक अमूल्य उपहार है I 'योग: कर्मसु कौशलम्' के माध्यम से भारतीय संस्कृति की इस अमूल्य और विलक्षण धरोहर को वैश्विक स्तर पर अपनाया गया है। योग मन और शरीर, विचार और क्रिया की एकता का प्रतीक है जो मानव कल्याण के लिए मूल्यवान है।  श्री यादव ने कहा कि नव भारत निर्माण समिति ने 'बनारस लिट फेस्ट : काशी साहित्य, कला उत्सव' के माध्यम से भी लोगों को जोड़ा है, उसी कड़ी में युवाओं हेतु आयोजित  'इन्हें पंख दें' अभियान को भी देखा जाना चाहिए। स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 तक भारत को सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक, वैज्ञानिक और आध्यात्मिक रूप से विकसित एवं सशक्त राष्ट्र बनाने में युवाओं का अहम योगदान है।  





कार्यक्रम का संचालन बृजेश सिंह, सचिव नव भारत निर्माण समिति ने किया। इस अवसर पर कर्नल संदीप शर्मा, धवल प्रसाद, आर्ट क्यूरेटर राजेश सिंह, डाॅ अपर्णा, डाॅ गीतिका, शालिनी, प्रवक्ता मुकेश सिंह, सतीश वर्मा, धर्मेंद्र कुमार, योग प्रशिक्षक प्रणव पाण्डेय, कमलदीप ,ममता जी आदि उपस्थित थे।

 





 








 युवाओं को अपनी संस्कृति, कला और विरासत से जोड़कर बनायें एक श्रेष्ठ नागरिक -  पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव

नव भारत निर्माण समिति द्वारा 'इन्हें पंख दें' अभियान के विजेताओं को पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव ने किया पुरस्कृत

स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 तक भारत को  विकसित एवं सशक्त राष्ट्र बनाने में युवाओं का अहम योगदान - पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव



शनिवार, 18 मई 2024

'द मास्टर्स आफ हेल्थकेयर' का आइएमएस बीएचयू निदेशक प्रो. एस. एन संखवार एवं पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव ने किया विमोचन

रेडियो सिटी 91.9 FM की ओर से एनुअल हेल्थ मैगजीन 'द मास्टर्स आफ हेल्थकेयर : वाराणसी' का पहला संस्करण लांच किया गया। होटल क्लार्क्स में 17 मई, 2024 को आयोजित एक समारोह में आइएमएस बीएचयू के निदेशक प्रो. एस. एन संखवार व वाराणसी परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव मुख्य अतिथि और मुख्य विकास अधिकारी हिमांशु नागपाल विशिष्ट अतिथि थे। अतिथियों ने रेडियो सिटी के कार्यक्रम की तारीफ की। मैगजीन में स्थान पाने वाले 16 स्वास्थ्य विशेषज्ञों को बेहतर करने के लिए प्रेरित भी किया। इसमें डा. श्रेयांश द्विवेदी, डा. अंकुर सिंह, डा. मिन्हाज हुसैन, डा. आशीष कुमार गुप्ता, डा. कुमार आशीष, डा. निपू चौरसिया, डा. प्रदीप चौरसिया, अभिनव कटियार, डा. अमित कुमार, डा. कर्म राज सिंह, डा. अमित भास्कर, डा. मनोज कुमार गुप्ता, डा. अविनाश चंद्र सिंह, डा. अनुपम तिवारी, प्रो. पीबी सिंह और डा. शिवाली त्रिपाठी शामिल हैं। 














बताया गया कि मैगजीन का मुख्य उद्देश्य बनारस की जनता को हर क्षेत्र के डाक्टरों के बारे में जानकारी देना है जिससे उन्हें भटकना न पड़े और एक बेहतर इलाज मिल सके। संचालन आरजे नेहा व रागिनी, स्वागत महाप्रबंधक योगेश सिंह व प्रोग्रामिंग हेड रूपेश सिंह ने किया।