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शनिवार, 5 अक्टूबर 2019

सोशल मीडिया ने बढ़ाया हिंदी का दायरा -डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव

सृजन एवं अभिव्यक्ति की दृष्टि से हिंदी दुनिया की अग्रणी भाषाओं में से एक है। हिन्दी सिर्फ एक भाषा ही नहीं बल्कि हम सबकी पहचान है, यह हर हिंदुस्तानी का हृदय है। हिन्दी को राष्ट्रभाषा  किसी सत्ता ने  नहीं बनाया, बल्कि भारतीय भाषाओं और बोलियों के बीच संपर्क भाषा के रूप में जनता ने इसे चुना। उक्त उद्गार लखनऊ (मुख्यालय) परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं और चर्चित साहित्यकार व ब्लॉगर श्री कृष्ण कुमार यादव ने जवाहर नवोदय विद्यालय, पिपरसंड, लखनऊ में राजभाषा हिंदी पर आयोजित संगोष्ठी का शुभारम्भ करते हुए बतौर मुख्य अतिथि कहीं। कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप-प्रज्वलन और मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुआ। मानस, उपमा, अनन्या और सुशील ने सस्वर कविता-वाचन के माध्यम से शमां बाँधा। 


इस अवसर पर विद्यालय के बच्चों ने साहित्यिक-सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से लोगों का मन मोह लिया। डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव ने प्रधानाचार्य श्री जेसी गुप्ता संग विद्यालय की हस्तलिखित पत्रिका "कोशिशें" का विमोचन भी किया।


डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि हिन्दी में विश्व भाषा बनने की क्षमता है। हिन्दी आज सिर्फ साहित्य और बोलचाल की ही भाषा नहीं, बल्कि विज्ञान-प्रौद्योगिकी से लेकर संचार-क्रांति और सूचना-प्रौद्योगिकी से लेकर व्यापार की भाषा भी बनने की ओर अग्रसर है।  श्री यादव ने कहा कि डिजिटल क्रान्ति के इस युग में वेबसाइट्स, ब्लॉग और फेसबुक व टविटर जैसे  सोशल मीडिया ने तो हिन्दी का दायरा और भी बढ़ा दिया है। विश्व भर में हिन्दी बोलने वाले 50 करोड़ तो इसे समझने वालों की संख्या 80 करोड़ है।  विश्व के लगभग 150 विश्वविद्यालयों में हिन्दी पढ़ाई जाती है, जो कि हिन्दी की बढ़ती लोकप्रियता का परिचायक है।
जवाहर नवोदय विद्यालय, पिपरसंड, लखनऊ के प्रधानाचार्य श्री जेसी गुप्ता ने कहा कि, यह हम सभी के लिए सौभाग्य का विषय है कि डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव भी नवोदय विद्यालय के पुरा-छात्र रहे हैं और हिंदी को लेकर अपनी रचनात्मक प्रतिबद्धता व अग्रणी सोच से आपने साहित्य जगत में एक नया मुकाम बनाया है।  प्रधानाचार्य श्री जेसी गुप्ता ने कहा कि संविधान में वर्णित सभी प्रांतीय भाषाओं का पूर्ण आदर करते हुए इस विशाल बहुभाषी राष्ट्र को एक सूत्र में बांधने में भी हिन्दी की एक महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में हिन्दी भाषा के प्रयोग पर हमें गर्व महसूस करना चाहिए। उप प्रधानाचार्य प्रभात मारवाह ने  कहा कि हिंदी पूरे देश को जोड़ने वाली भाषा है और सामान्य जीवन में भी इसे बहुतायत में अपनाया जाना चाहिये।
इस अवसर पर प्रधानाचार्य जेसी गुप्ता,  उप प्रधानाचार्य प्रभात मारवाह, डॉ. वाई सी द्विवेदी, कमर सुल्तान, सुधा पाठक, प्रीति तिवारी, सुमति श्रीवास्तव, पीपी शुक्ला, डॉ. मो. ताहिर सहित नवोदय विद्यालय के तमाम अध्यापकगण व विद्यार्थी  उपस्थित रहे।  





जवाहर नवोदय विद्यालय, लखनऊ में राजभाषा हिंदी पर आयोजित संगोष्ठी का डाक निदेशक केके यादव ने किया शुभारम्भ 
हिन्दी में विश्व भाषा बनने की क्षमता - डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव 
हिन्दी सिर्फ एक भाषा ही नहीं बल्कि हम सबकी पहचान है-डाक निदेशक केके यादव 
सोशल मीडिया ने बढ़ाया हिंदी का दायरा -डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव 

सोमवार, 31 अक्टूबर 2016

सोशल मीडिया पर लिखी गई पोस्टों के बीमा के लिए तत्पर हैं बीमा कंपनियाँ

(अनवरत काल से चली आ रही साहित्य, कला, संस्कृति से जुड़ी तमाम विधाओं का बीमा भले ही न हुआ हो, पर सोशल मीडिया पर लिखी गई पोस्टों के बीमा के लिए बीमा कंपनियाँ तत्पर हैं। बाजार हर चीज को अपने दायरे में लेना चाहता है........ )

सोशल मीडिया पर किसी घटना, विषय या किसी व्यक्ति के बारे में खुलकर अपनी बात लिखने वालों को अब डरने के जरूरत नहीं है। क्योंकि उनके खिलाफ यदि कोई मानहानि का केस करता है तो इंश्योरेंस कंपनी उस व्यक्ति को कवर देगी। कंपनी केस साबित करने वाले व्यक्ति को क्लेम की पूरी रकम देगी। अभी भारत में सोशल मीडिया यूजर्स का इंश्योरेंस नहीं होता है। 

देश की ऐसी पहली इंश्योरेंस पॉलिसी लाने पर निजी कंपनी बजाज आलियांज काम कर रही है। इसके बारे में कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर तपन सिंहल ने जानकारी दी है। उनका कहना है, ‘यदि किसी व्यक्ति को सोशल मीडिया पर किसी पोस्ट या कमेंट की वजह से मुकदमा झेलना पड़े और मुआवजा देने की नौबत आए तो साइबर इंश्योरेंस इस लागत को कवर करेगा। हमारी कंपनी व्यक्तिगत साइबर कवर डिजाइन कर रही है। यह कॉर्पोरेट्स के लिए वर्तमान में मौजूद साइबर इंश्योरेंस कवर जैसा ही होगा। बीमा कराने वाले व्यक्ति को दिए जाने वाले साइबर कवर में उसकी साख, डाटा सेंध और किसी निजी, वित्तीय या संवेदनशील जानकारी चोरी हो जाने के मामले में कवर मिलेगा। इंटरनेट यूजर्स की बढ़ती संख्या और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के बढ़ते चलन की वजह से नए खतरे पैदा हुए हैं। सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स वेबसाइट्स पर काफी मात्रा में निजी जानकारी मौजूद है। व्यक्तिगत साइबर इश्योरेंस पॉलिसी के तहत फिशिंग, आइडेंडिटी थेफ्ट, साइबर स्टाकिंग, शोषण और बैंक अकाउंट्स की हैकिंग को कवर किया जाएगा। अभी साइबर इश्योरेंस आईटी फर्मों, बैंकों, ई-कॉमर्स और फार्मस्यूूटिकल कंपनियों को बेचे जाते हैं। इसके तहत कॉर्पाेरेट्स को प्राइवेसी और डाटा ब्रीच, नेटवर्क सिक्योरिटी दावों और मीडिया देनदारी का कवर मिलता है।’ भारत में कॉर्पोरेट्स कंपनियों द्वारा साइबर कवर लेने का चलन पिछले कुछ सालों में बढ़ा है। देश में पिछले तीन साल से ऐसी पॉलिसी उपयोग हैं। इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक, ऐसी करीब 500 पॉलिसीज ली गई हैं। 

भारत में 1000 करोड़ रु. का साइबर बाजार 

एकअनुमान के मुताबिक, भारत में साइबर बीमा का बाजार करीब 1,000 करोड़ रुपए का है। यह दायित्व बाजार के 7 से 10 फीसदी हिस्सों को कवर करता है। देश में इंटरनेट यूजर्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इसमें सबसे ज्यादा नए इंटरनेट यूजर्स का झुकाव सोशल मीडिया की तरफ होता है। अमेरिका के बाद भारत में इंटरनेट यूजर्स के लिहाज से दूसरा सबसे बड़ा देश है। कुछ साालों में भारत पहले स्थान पर होगा। 
-कृष्ण कुमार यादव @ शब्द-सृजन की ओर
Krishna Kumar yadav @ http://kkyadav.blogspot.in/

मंगलवार, 8 सितंबर 2015

हिन्दी भाषी लोगों के लिए हिन्दी में आएगी सोशल नेटवर्किंग साइट 'मूषक'

गणेश जी का वाहन मूषक जगप्रसिद्ध है।  गणेश जी को देश-दुनिया में दौड़ने के लिए मूषक जी का ही सहारा है। ऐसे में मूषक जी का महत्व समझा जा सकता है।  कम्प्यूटर का माउस भी मूषक का ही अंग्रेजी रूपांतरण है और काफी हद तक इसकी आकृति भी।  ऐसे में ट्विटर' की तर्ज पर पूरी तरह हिन्दी में काम करने वाला 'मूषक' सोशल नेटवर्किंग साइट चर्चा में है। 

भोपाल में आयोजित हो रहे दसवें विश्व हिन्दी सम्मेलन में शिरकत करने आए पुणे के अनुराग गौड़ व उनके साथियों ने 'ट्विटर' की तर्ज पर पूरी तरह हिन्दी में काम करने वाला 'मूषक' सोशल नेटवर्किंग साइट देशवासियों और हिन्दी प्रेमियों के लिए पेश की है। यह साइट अभी ऑनलाइन नहीं हुई है, कहा जा रहा है कि 10 सितंबर को इसे जारी किया जाएगा।

हिन्दी सोशल नेटवर्किंग साइट 'मूषक' के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) अनुराग गौड़ ने बताया कि जहां ट्विटर पर शब्दों की समय सीमा 140 शब्द हैं, वहीं हमने मूषक पर इसे 500 रखा है। कम्प्यूटर अथवा स्मार्टफोन पर हिन्दी टाइप करना रोमन लिपि पर आधारित है, इसलिए लोग हिन्दी लिखने से कतराते हैं। उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल युग में बदलती तकनीक के साथ हिन्दी को लोगों से परिचित कराना होगा, ताकि लोग रोमन लिपि से पिछड़कर अपनी पहचान ना खो दें।

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि स्मार्टफोन पर उनकी इस सोशल नेटवर्किंग साइट 'मूषक' को गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है तथा इसके अलावा कम्प्यूटर पर इसे गूगल सर्च में www.mooshak.in के नाम से खोजा जा सकता है।

गौड़ ने कहा कि भाषा वैज्ञानियों का विचार है कि जो भाषा हम बोलना जानते हैं, उसे थोड़े प्रयत्नों से ही सरलता से लिखना सीख जाते हैं। उन्होंने कहा कि 'मूषक' का उद्देश्य हिन्दी और देवनागरी को आज की पीढ़ी के लिए सामयिक और प्रचलित करना है। इस सोशल नेटवर्किंग साइट पर हिन्दी भाषी रोमन में टाइप करने से वहीं तत्काल हिन्दी शब्द का विकल्प पा सकेंगे।

एक अन्य प्रश्न के उत्तर में 'मूषक' के सीईओ ने कहा कि ट्विटर, फेसबुक सरीखे सोशल नेटवर्किंग साइट्स, जिसे हमारे नेताओं, अभिनेताओं और प्रतिष्ठित लोगों ने जोर-शोर से अपनाया है, वहां प्राथमिकता अंग्रेजी भाषा को दी जाती है और उसे ही देश की आवाज समझा जाता है। हिन्दी दोयम दर्जे की मानी जाती है। उन्होंने कहा कि मूषक द्वारा हम इस प्रक्रिया को सही मायनों में गणतांत्रिक बनाना चाहते हैं, जहां गण की आवाज गण की भाषा में ही उठे।