शब्द-सृजन की ओर

इस ब्लॉग पर आप रूबरू होंगे कृष्ण कुमार यादव की साहित्यिक रचनात्मकता और अन्य तमाम गतिविधियों से...

गुरुवार, 5 जून 2014

Think as a global citizen on World Environment Day

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Five things that We can do as a global citizen on World Environment Day: 1) Spread awareness: Let's start making changes from th...
रविवार, 1 जून 2014

भारत और इंडिया में अंतर

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भारत में गॉंव है, गली है, चौबारा है. इंडिया में सिटी है, मॉल है, पंचतारा है. भारत में घर है, चबूतरा है, दालान है. इंडिया में...
शुक्रवार, 30 मई 2014

मासूम सवाल

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माँ 6 साल के बच्चे को पीटते हुये बोली, "नालायक, तूने भँगी के घर की रोटी खायी, तू भँगी हो गया, तूने अपना धर्म भ्रष्ट कर लिया. अब क्य...
रविवार, 18 मई 2014

लोकतंत्र के चतुर्थ स्तम्भ के पहरुए पत्रकारों की सुरक्षा बेहद जरुरी - कृष्ण कुमार यादव

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पत्रकार लोकतंत्र के चतुर्थ स्तम्भ के पहरुए हैं और उनकी सुरक्षा बेहद जरुरी है। यह एक अजीब संयोग है कि जो पत्रकार लोगों की आवाज़ उठाते हैं,...
रविवार, 11 मई 2014

माँ का आँचल

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मेरा प्यारा सा बच्चा गोद में भर लेती है बच्चे को चेहरे पर नजर न लगे माथे पर काजल का टीका लगाती है कोई बुरी आत्मा न छू सके बाँहों मे...
गुरुवार, 1 मई 2014

वोट उसे जिसका जनसरोकारों से जुड़ाव व साफ सुथरी छवि : कृष्ण कुमार यादव

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चुनावी सरगर्मी चरम पर है। सभी दल व प्रत्याशी जनता को लुभाने के लिए बढ़चढ़कर वादे कर रहे हैं। मतदाताओं के सामने अहम चुनौती है कि ...
बुधवार, 30 अप्रैल 2014

लोकतंत्र का यह त्यौहार

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वोट आपकी ताकत है,  वोट देश की चाहत है।  वोट सबका अधिकार है,  बनाता यह सरकार है।  लोकतंत्र का यह त्यौहार, मनाओ जैसे उत्सव-...
गुरुवार, 24 अप्रैल 2014

लोकतंत्र का महापर्व : खुद वोट दें और दूसरों को भी प्रेरित करें

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दान भारतीय संस्कृति की पहचान है। इसे जीवन मुक्ति का मार्ग माना जाता है। मान्यता है कि इससे इहलोक और परलोक दोनों सुधर जाता है। लेकिन  ज...
रविवार, 20 अप्रैल 2014

Solah Aane Solah Log : A selective chronicle of Who’s Who in Indian literature

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"Solah Aane Solah Log by Krishna Kumar Yadav is a selective chronicle of Who’s Who in Indian literature (Hindi & regional...
शनिवार, 19 अप्रैल 2014

हिंदी एक वैज्ञानिक भाषा : हिंदी भाषियों का दिमाग ज्यादा तंदुरुस्त

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हिंदी एक वैज्ञानिक भाषा है, और कोई भी अक्षर वैसा क्यूँ है उसके पीछे कुछ कारण हैं। अंग्रेजी भाषा में ये बात देखने में नहीं आती। गौर कीजि...
मंगलवार, 1 अप्रैल 2014

मुंशी प्रेमचंद के 'लमही' में

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मुंशी प्रेमचंद को पढ़ते हुए हम  सब बड़े हो  गए।  उनकी रचनाओं से बड़ी  आत्मीयता महसूस होती है।  ऐसा लगता है जैसे इन रचनाओं के  पात्र हमार...
3 टिप्‍पणियां:
रविवार, 23 मार्च 2014

23 मार्च की याद में : जब चूम लिया था उन्होंने फांसी का फंदा

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23 मार्च : आज ही के दिन  भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव ने देश की आजादी की ख़ातिर हँसते-हँसते फाँसी का फंदा चूम लिया था। उनकी शहादत रंग रंग ...
रविवार, 16 मार्च 2014

स्नेह से रँग दो दुनिया सारी

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प्यार के रंग से भरो पिचकारी स्नेह से रँग दो दुनिया सारी  ये रंग न जाने कोई जात न बोली आप सभी को मुबारक हो यह होली !!
शनिवार, 8 मार्च 2014

एक सवाल, अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर

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नहीं हूँ मैं माँस-मज्जा का एक पिंड जिसे जब तुम चाहो जला दोगे नहीं हूँ मैं एक शरीर मात्र जिसे जब तुम चाहो भोग लोगे नहीं हूँ मैं शादी...
रविवार, 2 मार्च 2014

157 साल बाद मिली 1857 के दफन शहीदों को 'आजादी'

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1857 के गदर को गुजरे सदी बीत गई, पर गाहे-बगाहे चर्चा में बना रहता है।  सोचकर कितना अजीब लगता है कि 1857 के गदर में अंग्रेजों के जुल्मों ...
मंगलवार, 25 फ़रवरी 2014

अख़बारों में भी छाया '16 आने 16 लोग'

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विश्व पुस्तक मेले में निदेशक  Krishna Kumar Yadav  की किताब का हुआ विमोचन। (साभार : अमृत प्रभात, 24 फरवरी 2014)   '16 आने 1...
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