शब्द-सृजन की ओर

इस ब्लॉग पर आप रूबरू होंगे कृष्ण कुमार यादव की साहित्यिक रचनात्मकता और अन्य तमाम गतिविधियों से...

मंगलवार, 30 सितंबर 2014

ये भी कुछ कहते हैं

›
टेम्पो या ट्रक इत्यादि के पीछे लिखे शब्द/वाक्य कई बार गौरतलब होते हैं। यूँ ही उन पर नजर पड़ती है और मुस्कुराकर रह जाते हैं। याद आता है ...
मंगलवार, 16 सितंबर 2014

हिन्दी के क्षेत्र में सम्मान का सैकड़ा

›
आज के दौर में प्रशासनिक सेवा में रहकर राजभाषा हिंदी के विकास के लिए चिंतन मनन करना अपने आप में एक उपलब्धि है। राजकीय सेवा के दायित्वों...
शनिवार, 13 सितंबर 2014

'हिंदी' हमारे रोजमर्रा की भाषा है, सिर्फ 'दिवस' या 'पखवाड़ा' की नहीं

›
14 सितम्बर को 'हिंदी दिवस' के रूप में मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन संविधान सभा ने 1949 में हिंदी को राजभाषा के रूप में मान्यत...
गुरुवार, 4 सितंबर 2014

मास्टर जी की छड़ी

›
स्कूल के दिनों में मास्टर जी की छड़ी याद है न। आज का परिवेश भले ही बदल गया हो, पर हमारे दौर में मास्टर जी की छड़ी बड़ी अहमियत रखती थी। कभी इस...
सोमवार, 18 अगस्त 2014

राधा का प्रेम, मुरली की मिठास

›
राधा का प्रेम, मुरली की मिठास. माखन का स्वाद, गोपियों का रास. इनसे मिलकर बनता है, जन्माष्टमी का दिन खास. कृष्ण जन्माष्टमी की ह...
रविवार, 10 अगस्त 2014

जीवन निरंतर चलने का नाम है ....

›
जन्मदिन सिर्फ सेलिब्रेशन तक नहीं होता।  जन्मदिन के बहाने पिछले एक साल के पन्ने पलटकर देखना भी होता है कि क्या कमियाँ रहीं, क्या उपलब्ध...
शुक्रवार, 1 अगस्त 2014

डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव हुए पदोन्नत

›
इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं कृष्ण कुमार यादव को भारत सरकार ने सेलेक्शन ग्रेड में पदोन्नत किया है। भारतीय डाक सेवा के 2001 ब...
गुरुवार, 31 जुलाई 2014

प्रेमचंद की रचनाओं के पात्र आज भी समाज में जिंदा हैं

›
प्रेमचन्द का साहित्य और सामाजिक विमर्श आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं और उनकी रचनाओं के पात्र आज भी समाज में कहीं-न-कहीं जिंदा हैं। आधुनि...
रविवार, 20 जुलाई 2014

प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं

›
जीवन में सफलता के बहुत मायने हैं।  कई बार जब हम जीवन में असफल होते हैं तो अपने ऊपर प्रश्नचिन्ह लगाने की बजाय परिस्थितियों को दोष देने ...
शनिवार, 19 जुलाई 2014

जापान से सीखिये, मँहगाई पर काबू पाना

›
मँहगाई फिर से चरम पर है।  रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल वस्तुयें दिनों ब दिन मँहगी होती जा रही हैं।  जापान में एक परंपरा है जब किसी...
गुरुवार, 5 जून 2014

Think as a global citizen on World Environment Day

›
Five things that We can do as a global citizen on World Environment Day: 1) Spread awareness: Let's start making changes from th...
रविवार, 1 जून 2014

भारत और इंडिया में अंतर

›
भारत में गॉंव है, गली है, चौबारा है. इंडिया में सिटी है, मॉल है, पंचतारा है. भारत में घर है, चबूतरा है, दालान है. इंडिया में...
शुक्रवार, 30 मई 2014

मासूम सवाल

›
माँ 6 साल के बच्चे को पीटते हुये बोली, "नालायक, तूने भँगी के घर की रोटी खायी, तू भँगी हो गया, तूने अपना धर्म भ्रष्ट कर लिया. अब क्य...
रविवार, 18 मई 2014

लोकतंत्र के चतुर्थ स्तम्भ के पहरुए पत्रकारों की सुरक्षा बेहद जरुरी - कृष्ण कुमार यादव

›
पत्रकार लोकतंत्र के चतुर्थ स्तम्भ के पहरुए हैं और उनकी सुरक्षा बेहद जरुरी है। यह एक अजीब संयोग है कि जो पत्रकार लोगों की आवाज़ उठाते हैं,...
रविवार, 11 मई 2014

माँ का आँचल

›
मेरा प्यारा सा बच्चा गोद में भर लेती है बच्चे को चेहरे पर नजर न लगे माथे पर काजल का टीका लगाती है कोई बुरी आत्मा न छू सके बाँहों मे...
गुरुवार, 1 मई 2014

वोट उसे जिसका जनसरोकारों से जुड़ाव व साफ सुथरी छवि : कृष्ण कुमार यादव

›
चुनावी सरगर्मी चरम पर है। सभी दल व प्रत्याशी जनता को लुभाने के लिए बढ़चढ़कर वादे कर रहे हैं। मतदाताओं के सामने अहम चुनौती है कि ...
बुधवार, 30 अप्रैल 2014

लोकतंत्र का यह त्यौहार

›
वोट आपकी ताकत है,  वोट देश की चाहत है।  वोट सबका अधिकार है,  बनाता यह सरकार है।  लोकतंत्र का यह त्यौहार, मनाओ जैसे उत्सव-...
गुरुवार, 24 अप्रैल 2014

लोकतंत्र का महापर्व : खुद वोट दें और दूसरों को भी प्रेरित करें

›
दान भारतीय संस्कृति की पहचान है। इसे जीवन मुक्ति का मार्ग माना जाता है। मान्यता है कि इससे इहलोक और परलोक दोनों सुधर जाता है। लेकिन  ज...
रविवार, 20 अप्रैल 2014

Solah Aane Solah Log : A selective chronicle of Who’s Who in Indian literature

›
"Solah Aane Solah Log by Krishna Kumar Yadav is a selective chronicle of Who’s Who in Indian literature (Hindi & regional...
‹
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें

मेरे बारे में / About me

  • KK Yadav
  • Krishna Kumar Yadav
Blogger द्वारा संचालित.