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सोमवार, 22 अगस्त 2016

विश्व आदिवासी दिवस : आदिवासियों के जीवन को बचाने के साथ-साथ उनकी भाषा और संस्कृति को भी सहेजने की जरुरत

आदिवासी जनजातियों के मानवाधिकारों के प्रति लोक के मन में सहानुभूति के भाव को जाग्रत करने के लिए उनकी जीवन सम्बन्धी चुनौतियों पर विचार करने की महती आवश्यकता को मद्देनजर रख जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर एवं एम.वी. संस्थान, जोधपुर के संयुक्त प्रयासों से दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारम्भ एम.बी.एम. संस्थान के इंटरनेशनल सेमिनार हाॅल में 9 अगस्त, 2016 को किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ आदिवासी समाज व शिक्षा जगत के ख्याति प्राप्त प्रबुद्धजनों के द्वारा आदिवासियों के बलिदान के प्रतीक ‘मानगढ धाम’ की प्रतिमा के सम्मुख द्वीप प्रजज्वलन के साथ किया गया। 

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्री हेमराज मीणा, पूर्व विधायक एवं अध्यक्ष राजस्थान जनजाति मोर्चा, अध्यक्षता-श्री शंकरलाल मीना, साहित्कार एवं सेवानिवृत्त केन्द्रीय कस्टम कमिश्नर, विशिष्ट अतिथि चर्चित ब्लॉगर व साहित्यकार श्री कृष्ण कुमार यादव, निदेशक डाक सेवाएं, राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर , मुख्य वक्ता के रूप में केन्द्रीय मिशीगन विश्वविद्यालय यू.एस.ए. की प्रो. विदु सोनी रहे।

कार्यक्रम के शुरूआत में अतिथियों का पुष्पगुच्छ एवं साफा पहनाकर स्वागत किया और इसके बाद विभागाध्यक्ष प्रो. एच. एस. राठौड़ ने अतिथियों का शब्द सुमनों से स्वागत किया और अपने अनुभवों को साझा किया तथा पढ़े-लिखे एवं उच्च पदों पर आसीन आदिवासियों को पिछड़े एवं जरूरतमन्द लोगों की हरसंभव मदद करने की बात कही। इसी क्रम में अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के निदेशक डाॅ. जनक सिंह मीना ने मानगढ़ में शहीद हुए आदिवासियों को नमन करते हुए मंचासीन अतिथियों का स्वागत एवं परिचय करवाया और संगोष्ठी के विषय पर प्रकाश डालते हुए इसे आयोजित करने के पीछे के उद्देश्यों की ओर इशारा करते हुए आदिवासी दिवस के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य को बताया। डाॅ. मीना ने कहा कि 1993 से विश्व आदिवासी दिवस मनाने की शुरूआत हुई और इसको मनाने के पीछे आदिवासियों को उनके मानव अधिकारों के प्रति जागरूक करना, उनके अधिकारों का संरक्षण करना है। डाॅ. मीना ने बताया कि डाॅ. रामदयाल मुण्डा जो यू.एन.ओ. में गैर सरकारी सदस्य के रूप में गये, उन्होंने देखा कि सरकारी प्रतिनिधि ने यू.एन.ओ. में सही तथ्य नहीं रखे। डाॅ. मीना ने बताया कि दो दिन में पांच तकनीकी सत्रों में लगभग 150 शोध पत्र पढ़े जाएँगेऔर हिन्दी व अंग्रेजी के शोध पत्रों को पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया जाएगा और इस संगोष्ठी की सिफारिशों को भारत सरकार के समक्ष रखा जाएगा।

उद्घाटन सत्र के प्रारम्भ में संगोष्ठी की मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए सेण्ट्रल मिशिगन यूनिवर्सिटी, संयुक्त राज्य अमेरिका की प्रोफेसर प्रो. विदु सोनी ने आदिवासी जनजातियों के पहचान के मुद्दे को अपना विषय बनाया और संयुक्त राष्ट्र संघ के आदिवासियों के मानवाधिकारों पर प्रकाश डाला।

मुख्य अतिथि के रूप में श्री हेमराज मीणा, अध्यक्ष जनजाति मोर्चा राजस्थान ने अपने उद्बोधन में कहा कि आदिवासी प्रारम्भ से ही संघषरर्त रहे हैं  और आदिवासियों का योगदान देश की आजादी में अहम रहा है। इन्होंने विरसामुण्डा, गोविन्द गुरू मानगढ़ की चर्चा करते हुए बताया कि मानगढ़ की पहाड़ियों पर दो हजार से अधिक आदिवासी शहीद हुए। इन्होंने बताया कि बांसवाड़ा एवं आसपास के देशी रियासतों के शासकों ने आदिवासियों के विद्रोह की गुप्त सूचनाएं अंग्रेजों को उपलब्ध करवायी इसी कारण देश में गुलामी रही। 

विशिष्ट अतिथि के रूप में चर्चित ब्लॉगर व साहित्यकार श्री कृष्ण कुमार यादव, निदेशक डाक सेवाएं, राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर ने अपने उद्बोधन में कहा कि आदिवासी नाम में ही निहित है, जिनसे सभ्यता एवं संस्कृति का प्रारम्भ हुआ, जिन्होंने सबसे पहले धरती पर रहना शुरू किया। भारतीय परिप्रेक्ष्य में तीन प्रकार के आदिवासी हैं - पहले वे जो विकसित एवं समृद्ध हैं, जिन्होंने प्रत्येक क्षेत्र में अपनी मौजूदगी दर्ज करवायी है। दूसरे प्रकार के वे आदिवासी हैं, जिन्हें नक्सल क्षेत्र से जोड़ते हैं और इनके साथ खिलवाड़ हो रहा है। तीसरे प्रकार के  वे आदिवासी हैं, जो आज भी प्राकृतिक संसाधनों पर पूरी तरह निर्भर हैं और वे सभ्यता से कटे हुए हैं। श्री कृष्ण कुमार यादव ने अण्डमान-निकोबार द्वीप समूह में अपने प्रवास का जिक्र करते हुए वहां के आदिवासियों से जुड़े तमाम अनछुए पहलुओं की चर्चा की। उन्होने वहां की छः आदिवासी जनजातियाॅं बतायी और उनकी विलुप्त होती प्रजातियों के आंकड़ों पर प्रकाश डाला। आदिवासियों की समस्याओं एवं चुनौतियों की ओर इशारा करते हुए उनकी बोली, भाषा, संस्कृति पर मंडरा रहे संकट पर श्री यादव ने सचेत करते हुए कहा कि  आज इन जनजातियों के जीवन को बचाने के साथ-साथ इन बिखरी संस्कृतियों और इनके तत्वों को भी सहेजने की जरुरत है, अन्यथा संस्कृति और समाज की टूटन जनजातियों को राष्ट्र की मुख्य धारा से अलग ही कर देगी।

अध्यक्षीय उद्बोधन में श्री शंकरलाल मीना  ने व्यांगयात्मक भाषा में आदिवासियों की वास्तविक स्थिति को रेखांकित किया। उन्होने कहा कि आदिवासियों को पिछले कुछ समय से वनवासी कह कर पुकारा जा रहा है और उसके कद को छोटा किया जा रहा है। इन्होंने कहा कि आदिवासियों के इतिहास को लेकर प्रश्न खड़े किये जाते हैं, परन्तु क्या वर्तमान को भी नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है। इन्होंने आदिवासियों के साथ वर्तमान के परिदृश्य को उदाहरणों के माध्यम से उजागर किया। साथ ही इन्होंने कार्पोरेट जगत की झांसेबाजी एवं सरकार के विज्ञापनों की पोल खोली।

इस अवसर पर आदिवासियों से सरोकार रखती हुई  डाॅ. श्रवण कुमार मीना की ‘आदिवासी कहानी विविध सन्दर्भ’, डाॅ. मन्जू गांधी की ‘खाड़ी युद्ध में संयुक्त राष्ट्र संघ की भूमिका’ एवं आदिवासी सरोकारों को समर्पित पत्रिका "अरावली उद्घोष"  का विमोचन भी किया गया। 

इस अवसर पर चन्दनमल नवल, किशोरी लाल मीना, डाॅ रमेश चन्द्र मीना, अफगानिस्तान के मोहम्मद शफीक, यू.एस.ए. से प्रो. विधू सोनी, श्री धर्मसिंह वर्मा, श्रीमति विमला वर्मा, श्री वेदव्यास, प्रो. पूनम वावा, प्रो. कान्ता कटारिया, डाॅ. मीना बरडिया, डाॅ. यादराम मीना, डाॅ. शीतल प्रसाद मीना, प्रो. सोहन लाल मीना, डाॅ. औतार लाल मीना, डाॅ. रमा आरोड़ा, प्रो. हेमन्त शर्मा इत्यादि सहित तमाम प्राध्यापक, बुद्धिजीवी, शोध छात्र उपस्थित थे।

 उद्घाटन सत्र के अन्त में डाॅ. आर.पी. मीणा आयोजन सचिव ने सभी अथितियों का धन्यवाद ज्ञापन किया और मंच का संचालन डाॅ. निधि संधल ने किया।

                                                                      
-डाॅ. जनक सिंह मीना
संगोष्ठी निदेशक 
जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर-राजस्थान  




विश्व आदिवासी दिवस पर जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर के राजनीति शास्त्र विभाग द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार में "भारत की आदिवासी जनजातियाँ : चुनौतियाँ और संभावनाएं" विषय पर व्याख्यान देते राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक सेवाएँ कृष्ण कुमार यादव। 

आदिवासी विमर्श को समर्पित पत्रिका ''अरावली उद्घोष'' का विमोचन। 

डाॅ. श्रवण कुमार मीना की ''आदिवासी कहानी : विविध सन्दर्भ'' पुस्तक का लोकार्पण। 

आदिवासियों के बलिदान के प्रतीक ‘मानगढ धाम’ की प्रतिमा के सम्मुख द्वीप प्रजज्वलन करते राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक सेवाएं एवं साहित्यकार कृष्ण कुमार यादव 



 International Seminar on the International Day of the World's Indigenous Peoples on 9th August, 2016 at JNVU, Jodhpur

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