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शनिवार, 6 दिसंबर 2014

शोषित समाज के लिए विचारों का पुंज छोड़ गए डा. अम्बेडकर

दमन के विरुद्ध विद्रोह के प्रतीक डाॅ. भीमराव अंबेडकर का व्यक्तित्व एवं कृतित्व भारतीय समाज के लिए प्रेरणादायक है। विषमतावादी समाज में गैर बराबरी, भेदभाव, छुआछूत के विरूद्ध डाॅ. अम्बेडकर ने लोकतांत्रिक एवं वैधानिक रूप से संघर्ष किया। इसके चलते सदियों से अपने अधिकारों से वंचित वर्ग को न्याय मिला। डाॅ अंबेडकर की आधुनिक सोच की झलक भारतीय संविधान में देखने को मिलती है। अम्बेडकर ने दलितों, महिलाओं के अधिकारों को स्थापित करने के साथ-साथ अंधविश्वास, पाखंड और जाति वर्गभेद के विरूद्ध भी संघर्ष किया। डाॅ. अम्बेडकर की प्रगतिवादी सोच को रूढि़वादियों ने आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की। उनके योगदान को कमतर आंकने की भूल और उनके विचारों को न समझने की कमजोरी से देश की सामाजिक-व्यवस्था को विश्वमंच पर अपमान झेलना पड़ता है। यदि अंबेडकर के विचारों से प्रेरणा लेकर लोकतांत्रिक सरकारों ने कार्य किया होता तो देश की दो तिहाई आबादी को भी व्यवस्था में पूर्ण भागीदारी मिल गई होती। 



(जनसंदेश टाइम्स में डा. अम्बेडकर की पुण्यतिथि ( 6 दिसंबर, 2014 ) पर उनका स्मरण करते हुए कृष्ण कुमार यादव का लेख)

!! आज डा. अम्बेडकर जी की पुण्यतिथि ( 6 दिसंबर, 2014 )  पर सादर नमन !! 
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