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गुरुवार, 1 मई 2014

वोट उसे जिसका जनसरोकारों से जुड़ाव व साफ सुथरी छवि : कृष्ण कुमार यादव



चुनावी सरगर्मी चरम पर है। सभी दल व प्रत्याशी जनता को लुभाने के लिए बढ़चढ़कर वादे कर रहे हैं। मतदाताओं के सामने अहम चुनौती है कि किसको चुने और किसको नकारे ? हमारा सांसद न केवल संसद में हमारे क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता है वरन हमारी रोजमर्रा की दुश्वारियों को दुरूस्त करने व बेहतर कल के निर्माण का जिम्मा भी उसके ही साथ में होता है। ऐसे में बिना समझे-बूझे अपने प्रतिनिधित्व का जिम्मा किसी के भी हाथ में दे देना समझदारी नहीं कहीं जा सकती है। योग्य प्रतिनिधि का चुनाव भी ठोक बजाकर करना चाहिए।

जनता को अपने मताधिकार का प्रयोग करते समय पार्टी, प्रत्याशी और मुद्दों में एक संतुलन बनाना चाहिए। कई बार होता है हम अपने जानने वाले को वोट दे देते हैं। यह अच्छी स्थिति नहीं है। हमें चुनाव में खड़े उम्मीदवारों में यह देखना पड़ेगा कि उसमें से कौन ऐसा है जो हमारी स्थानीय समस्याओं के साथ राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर संसद में आवाज उठा सकता है। सांसद का काम सिर्फ हैंडपंप लगवाने तक सीमित नहीं होता। इसलिए यह देखना चाहिए कि हमारा प्रतिनिधि राष्ट्रीय स्तर पर बनने वाली नीतियों के निर्माण में कितनी भागीदारी कर सकता है? कौन ऐसा प्रत्याशी है जो जनता की बात को समझता हो और जनता के बीच में रहता है। यह अहम नहीं कि हम जिसे वोट दे रहे उससे जुड़ी पार्टी की सरकार बनती है या वह विपक्ष में बैठता है। कोई व्यक्ति विपक्ष में बैठकर भी ज्यादा प्रभावी हो सकता है। इसलिए जिसको भी वोट दिया जाये उसकी छवि साफ-सुथरी हो तथा वह जनसरोकारों से जुड़ा हो।

-कृष्ण कुमार यादव
https://www.facebook.com/krishnakumaryadav1977


( साभार : डेली न्यूज एक्टिविस्ट, 30 अप्रैल 2014)



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