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गुरुवार, 7 मार्च 2013

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर : कृष्ण कुमार यादव के हाइकु

 
जाग उठी है
आज शिक्षित नारी
हक लेने को।
 
अबला नहीं
संवेदना की स्रोत
जानिए इसे।
 
रिश्तों की डोर
सहेजती ये नारी
रुप विभिन्न।
 
नारी की शक्ति
पहचानिए इसे
दुर्गा-भवानी।
 
हर क्षेत्र में
रचे नया संसार
आज की नारी।
 
बाधाएँ तोड़
आसमां के सितारे
छू रही नारी।
 
नारी सशक्त
समाज बने सुखी
समृद्ध राष्ट्र।
-कृष्ण कुमार यादव-

2 टिप्‍पणियां:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

खुशहाली का वृहद आधार है, इनकी खुशी।

Akshitaa (Pakhi) ने कहा…



छोटी कविताओं जैसी। अच्छा लगता है पढना . पापा को ढेर सारा प्यार और बधाई।