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शुक्रवार, 30 दिसंबर 2011

30 दिसंबर 1943 : जब नेताजी ने फहराया पहला राष्ट्रीय ध्वज

राष्ट्रीय ध्वज किसी भी देश के लिए बहुत मायने रखता है, विशेषकर एक पराधीन देश के लिए. इस रूप में आज का दिन काफी महत्वपूर्ण है. आज ही के दिन 30 दिसंबर 1943 को आजाद हिंद फ़ौज (Indian National Army) के सुप्रीम कमांडर के रूप में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने सर्वप्रथम अंडमान में भारतीय राष्ट्रीय ध्वज फहराया था. तब हमारा देश अंग्रेजों का पराधीन था और अंडमान में जापान का कब्ज़ा था. जापान से नेता जी के उस समय मधुर सम्बन्ध थे।


नेता जी यहाँ अंडमान में सेलुलर जेल देखने आए थे और अंडमान-निकोबार को ब्रिटिश शासन से स्वतंत्र पहले क्षेत्र के रूप में घोषित कर उन्होंने यहाँ जिमखाना ग्राउंड (अब नेता जी स्टेडियम) में भारतीय राष्ट्रीय ध्वज फहराया था. नेता जी ने इन द्वीपों को 'शहीद' और 'स्वराज' नाम दिया था. उस समय नेता जी कि सरकार को 9 देशों की सरकार ने मान्यता दी थी. तब से हर साल 30 दिसंबर को यहाँ पोर्टब्लेयर, अंडमान में भारतीय राष्ट्रीय ध्वज फहराकर उस दिन को याद किया जाता है. आज उस ऐतिहासिक पल को 68 साल पूरे हो गए...!!

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30th December is a significant day in the history of India in general and the Andamans in particular. On this day in the year 1943, Netaji Subhash Chandra Bose hoisted the National Flag for the first time at Port Blair declaring the islands, the first Indian Territory to be liberated from the British rule, renamed them “Saheed” and “Swaraj”. His historic visit to the Andamans as the head of Provisional Government of Azad Hind during the Japanese occupation made a symbolic fulfillment of the his promise that INA would stand on the Indian soil by the end of 1943.Today the day is celebrated as “Andaman Day”, the day marks the anniversary of the unfurling of the first Indian Tricolour.

- कृष्ण कुमार यादव
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