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बुधवार, 24 नवंबर 2010

मुझे तुम्हारी तलाश है...


मुझे तुम्हारी तलाश है
ढूँढता हूँ हर कहीं
इस छोर से उस छोर तक
उस छोर से इस छोर तक
कभी तुम्हें रिमझिम फुहारों में ढूँढा
कभी अठखेलियाँ करती बहारों में ढूँढा
पर नहीं मिला मुझे मेरे जीवन का बसंत
शायद तुम आसमां के चाँद बन गये
या मेरी रातों के ख्वाब बन गये
पर मैं आज भी वहीं हूँ
आवाज देता हूँ तुम्हें
दूर तलक आवाज जाकर लौट आती है
मैं फिर भी तुम्हें खोजता फिरूँगा
जब तक मेरा अखिरी मुकाम न आ जाय
पर एक आस है दिल में
अगर यहाँ नहीं, तो वहाँ जरूर मिलोगे।
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