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गुरुवार, 3 जून 2010

भिखमंगों का ईश्वर


मंदिर के सामने

भिखमंगों की कतारें

एक साथ ही उनके कटोरे

ऐसे आगे बढ़ जाते हैं

मानों सब यंत्रवत हों

दस-दस पैसे की बाट जोहते वे

मंदिर के सामने होकर भी

मंदिर में नहीं जाते

क्योंकि वे सिर्फ

एक ही ईश्वर को जानते हैं

जो उनके कटोरे में

पैसे गिरा देता है।
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